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Shani Amavasya 2025: कब है साल की पहली शनि अमावस्या ? साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति पाने के लिए करें ये काम
हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को बहुत पावन माना गया है। साल में 12 अमावस्या तिथियां पड़ती हैं और प्रत्येक का अपना महत्व होता है, लेकिन शनि अमावस्या को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। जब अमावस्या तिथि शनिवार के दिन पड़ती है, तो उसे शनि अमावस्या या शनिश्चरी अमावस्या कहा जाता है।
यह तिथि हर साल एक या दो बार आती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनि देव का जन्म भी अमावस्या तिथि को ही हुआ था, इसलिए इस दिन शनि देव की पूजा करना विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। इस वर्ष शनि अमावस्या कब पड़ेगी और इसका महत्व क्या है, आइए जानते हैं।

शनि अमावस्या की तिथि
साल 2024 में पहली शनि अमावस्या चैत्र माह की अमावस्या को होगी। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह 28 मार्च को शाम 7:30 बजे से प्रारंभ होगी और 29 मार्च को शाम 4:30 बजे समाप्त होगी। चूंकि हिंदू धर्म में उदया तिथि का विशेष महत्व है, इसलिए इस वर्ष शनि अमावस्या 29 मार्च को मनाई जाएगी।
शनि अमावस्या का महत्व
शनि अमावस्या का दिन शनि देव के प्रकोप को शांत करने और शनि से संबंधित दान-पुण्य करने के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इस दिन विशेष रूप से शनि देव से जुड़े दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। शनि देव को प्रसन्न करने के लिए इस दिन उनके निमित्त सरसों के तेल में तिल डालकर चढ़ाना चाहिए और काले वस्त्र, काले तिल, सरसों का तेल, लोहे की वस्तुएं और उड़द दाल का दान करना चाहिए। इसके अलावा, शनि देव का अभिषेक और उनके मंत्रों का जाप भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
ज्योतिष शास्त्र में शनि देव की महिमा
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि देव कर्मफलदाता और न्याय के देवता हैं। उन्हें सबसे क्रूर ग्रह भी कहा जाता है, लेकिन वे भाग्य विधाता भी माने जाते हैं। शनि देव व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं और गलत कर्मों के लिए दंडित भी करते हैं। यदि किसी व्यक्ति पर शनि की कृपा होती है, तो उसके सभी कार्य सफल होते हैं, लेकिन अगर शनि अशुभ स्थिति में हों, तो जीवन में अनेक बाधाएं उत्पन्न होती हैं।
शनि अमावस्या पर क्या करें?
शनि देव को सरसों का तेल और काले तिल अर्पित करें।
108 बार 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' मंत्र का जाप करें।
काले वस्त्र, लोहे की वस्तुएं और काले तिल का दान करें।
पीपल के वृक्ष की पूजा करें और सरसों के तेल का दीप जलाएं।
जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं और पक्षियों के लिए अनाज डालें।
सूर्योदय से पहले स्नान करके तांबे के लोटे में जल भरकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें।
साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति के उपाय
जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या का प्रभाव है, उन्हें इस दिन तर्पण, पिंडदान और पीपल के पेड़ की पूजा करनी चाहिए। इससे शनि दोष के प्रभाव कम होते हैं और जीवन में शांति एवं समृद्धि आती है। साथ ही, इस दिन शनि देव को सरसों का तेल अर्पित करना और काले तिल चढ़ाते हुए 108 बार 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' मंत्र का जाप करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। इससे शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के अशुभ प्रभावों से राहत मिलती है।
इस दिन दान-पुण्य करने से मिलेगा लाभ
शनि अमावस्या का विशेष महत्व है और इस दिन शनि देव की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति प्राप्त होती है। इस अवसर पर किए गए दान-पुण्य और मंत्र जाप से शनि देव प्रसन्न होते हैं और उनके अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है। इस वर्ष 29 मार्च को आने वाली शनि अमावस्या पर श्रद्धापूर्वक इन उपायों को अपनाकर शनि देव की कृपा प्राप्त की जा सकती है।



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