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Shani Jayanti : इस गांव में खुले आसमान में रहते हैं शनिदेव, दर्शन करने से ही दूर हो जाते हैं भक्तों के कष्ट
शनिदेव के प्रकोप से हर कोई डरता है, जिस कारण शनि देव को खुश करने के लिए वो कई तरह के उपाय करता है। आज शनि जयंती है, इस दिन भक्त शनि देव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा करते हैं, शनि मंदिरों में शनि देव को तेल चढ़ाने और दीपक जलाने के लिए लंबी-लंबी लाइनों में खड़े रहते हैं।
वैसे तो भारत में शनिदेव के कई प्राचीन मंदिर हैं, लेकिन इन सभी मंदिरों में शनि शिंगणापुर सबसे खास है। ये मंदिर महाराष्ट्र के अहमदनगर के एक गांव में स्थित है। इस मंदिर को शनि देव का जन्मस्थल माना जाता है। जिस कारण शनि जयंती के मौके पर यहां विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं शनि देव के शिंगणापुर मंदिर से जुड़ी कुछ खास बातें...

शिंगणापुर मंदिर से जुड़ी रोचक बातें
1. खुले आसमान के नीचे हैं शनि देव की प्रतिमा
शनि शिंगणापुर मंदिर में भगवान शनिदेव की प्रतिमा खुले आसमान के नीचे रखी गई है। इस मंदिर में कोई छत नहीं है। ऐसा माना जाता है कि जब भी शनि देव की प्रतिमा के ऊपर छत डालने की कोशिश की गई तो इसमें लोगों को असफलता ही मिली है। जिस कारण लोगों में ये बात प्रचलित हो गई कि शनिदेव को किसी की भी छाया में रहना पसंद नहीं है।
2. केसरिया कपड़े में ही करते हैं पुरुष शनिदेव का अभिषेक
शनि शिंगणापुर में शनिदेव की प्रतिमा का अभिषेक सरसों के तेल से करने की परंपरा हैं। लेकिन ये काम सिर्फ पुरुष ही कर सकते हैं। महिलाएं यहां शनिदेव को तेल नहीं चढ़ा सकती है। प्रतिमा पर अभिषेक करने से पहले पुरुषों को स्नान करने के बाद केसरिया रंग के कपड़े पहनना अनिवार्य होता है। बिना स्नान किए और केसरिया कपड़े पहने पुरुष शनिदेव की प्रतिमा पर अभिषेक नहीं कर सकते हैं।
3. गांव के घरों में नहीं लगते ताले
शिंगणापुर गांव में एक बहुत ही अजीबो-गरीब परंपरा है। इस गांव के लोग कहीं भी कितने दिन के लिए क्यों न चले जाएं, लेकिन अपने घरों पर ताले नहीं लगाते और न हीं अपने कीमती सामान तिजोरी या लॉकर में बंद करके रखते हैं। ऐसी मान्यता है कि अगर कोई भी व्यक्ति इस गांव में चोरी करता है तो उसे खुद शनिदेव दंडित करता है। इसी कारण लोगों को यहां घर में चोरी होने का डर नहीं रहता है।
शिंगणापुर मंदिर से जुड़ी कथा
शनि शिंगणापुर मंदिर के बारे में एक कथा काफी प्रचलित है। इस कथा के अनुसार प्राचीन समय में एक अंधे साधु शिंगणापुर आए थे। जहां रात में उनके सपने में शनिदेव आए और कहा, "इस गांव में जमीन के अंदर मेरी प्रतिमा है, उसे बाहर निकालकर स्थापित करो।" जिसके बाद साधू ने शनिदेव से कहा कि "मैं तो अंधा हूं, फिर ये काम कैसे कर सकता हूं।" साधु की बात सुनकर शनिदेव ने उनकी आंखों की रोशनी वापस लौटा दी। जिसके बाद साधु ने शनि देव के बताए स्थान पर खुदाई की तो वहां से काले पत्थर की एक विशाल शिला निकली। साधु ने इसे ही शनिदेव का रूप मानकर पूजा की। जिसके बाद लोगों के बीच इस मंदिर को लेकर भक्ति और श्रद्धा बढ़ती गई।



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