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Shaniwar Vrat Katha: शनिवार के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, साढ़ेसाती और ढैय्या से मिलेगी मुक्ति
Shaniwar Vrat Katha: शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से व्रत रखने, पूजा करने और शनिवार व्रत कथा (Shaniwar Vrat Katha) पढ़ने व सुनने से शनि देव के प्रकोप से मुक्ति मिलती है। ऐसा कहा जाता है कि शनिवार को सच्चे मन से जो भी व्रत रखता है उसके सारे दुख दूर हो जाते हैं।शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या, शनि दोष, कष्ट, बाधाएं और आर्थिक परेशानियां दूर करने के लिए आप भी इस कथा को करें।
जो भी भक्त ऐसा करते हैं उनके घर में सुख-समृद्धि आती है। शनि देव कर्म के देवता हैं, इसलिए सच्ची श्रद्धा और भक्ति से उनकी कृपा प्राप्त होती है। आइए पढ़ें ये व्रत कथा, आरती और जानें पूजा विधि।

उसी नगर में एक धनी व्यापारी भी रहता था, लेकिन वह घमंडी था और किसी देवी-देवता की पूजा नहीं करता था। उसे ब्राह्मण की बढ़ती समृद्धि देखकर जलन होती थी। एक दिन उसने ब्राह्मण

व्यापारी इस बात का मज़ाक उड़ाने लगा। कुछ समय बाद व्यापारी पर शनि की ढैय्या लग गई। उसके व्यापार में हानि होने लगी, घर में कलह बढ़ गई और बीमारियों ने उसे घेर लिया। वह परेशान होकर ब्राह्मण के पास आया। ब्राह्मण ने उसे शनि देव की महिमा समझाई और शनिवार का व्रत करने का उपदेश दिया। व्यापारी ने उसी दिन से व्रत शुरू कर दिया तेल चढ़ाया, गरीबों को वस्त्र दान दिए, कौवे, कुत्तों और जरूरतमंदों को भोजन कराया। धीरे-धीरे उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगे। व्यापार फिर बढ़ा, परिवार में शांति लौटी और स्वास्थ्य ठीक होने लगा। कुछ ही समय में वह फिर से समृद्ध हो गया और उसे यह विश्वास हो गया कि- शनिवार के दिन व्रत, दान और कथा सुनने से शनि देव तुरंत प्रसन्न होते हैं।
Shaniwar Puja Vidhi (शनिवार पूजा विधि)
प्रातः स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें। विशेषकर काले या नीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
शनि देव की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें और सरसों का तेल चढ़ाएं।
एक कटोरी में तेल लेकर शनि देव को अर्पित करें।
काले तिल, काला कपड़ा और लौंग चढ़ाएं और शनि मंत्र का जाप ॐ शं शनैश्चराय नमः 108 बार करें।
पीपल के पेड़ का दीपक जलाएं ये काम आप शनिवार सुबह और शाम करें।
काले कुत्ते, कौवे और गरीबों को भोजन कराएं और अंत में शनिवार व्रत कथा का पाठ करें।
शनिदेव आरती Shani Dev Ki Aarti
ॐ जय श्री शनिदेव भगवाना।
निराकार है ज्योति तुम्हारी,
शनि रूप में करो उजियारा॥
ॐ जय श्री शनिदेव भगवाना॥
चाय चढ़े तेल का दीप,
शनि देव करो कृपा की थाली।
भक्तों के दुख दूर करो तुम,
पूर्ण करो मन की हर मुरादि॥
ॐ जय श्री शनिदेव भगवाना॥
पान सुपारी लाल चढ़ाएँ,
काले तिल और उड़द दान।
जो जन करता नित्य पूजन,
शनि देव करते उसका कल्याण॥
ॐ जय श्री शनिदेव भगवाना॥



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