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Shukrawar Vrat Katha: शुक्रवार को पढ़ें व सुनें संतोषी माता की व्रत कथा, जीवन से दूर होंगे सारे कष्ट
Shukrawar Vrat Katha In Hindi: सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित होता है। आज शुक्रवार है जो माता संतोषी और शुक्र देव को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि शुक्र देव और संतोषी माता की कृपा से जीवन में संपन्नता, सुख-शांति, दांपत्य सुख, आर्थिक उन्नति और मन की संतुष्टि प्राप्त होती है। जो व्यक्ति सच्चे मन से शुक्रवार व्रत रखकर माता संतोषी की कथा पढ़ता या सुनता है, उसकी सभी बाधाएं दूर होती हैं और घर में खुशहाली का आगमन होता है। खासकर आर्थिक समस्याएं, कर्ज, कलह और मानसिक तनाव से छुटकारा पाने के लिए यह व्रत अत्यंत शुभ माना गया है।
अगर आप शुक्रवाक व्रत रखते हैं या नहीं भी रखते तो नीचे दी गई कथा और आरती पढ़ने से आपके सारे कष्ट दूर होंगे। आइए पढ़ते हैं संतोषी माता की पवित्र व्रत कथा, पूजा विधि और आरती...

संतोषी माता शुक्रवार व्रत कथा (Shukrawar Vrat Katha)
एक समय की बात है। एक वृद्ध दंपती के तीन पुत्र थे दो बड़े बेटे कमाते थे, पर छोटी बहू के कहने पर वे माता-पिता की सेवा नहीं करते थे। छोटा बेटा सीधा-सादा था और वह अपने माता-पिता की बहुत सेवा करता था, लेकिन नौकरी नहीं होने के कारण हमेशा पैसा न होने की वजह से दुखी रहता था। एक दिन छोटे बेटे ने माता-पिता से कहा, मां! मुझे भी कमाने के लिए बाहर जाना है। माता ने समझाया- बेटा, जाओ, भगवान तुम्हारा भला करेंगे।
छोटा बेटा नौकरी की तलाश में घर छोड़कर चला गया। इधर घर पर उसकी पत्नी सास-ससुर का पूरा ध्यान रखती, लेकिन जेठानियां उससे ईर्ष्या करती थीं। समय बीतता गया। छोटे बेटे को बाहर नौकरी मिल गई और वह खूब परिश्रम कर काफी धन कमाने लगा। लेकिन उसकी जेठानियां लालच में उसकी पत्नी को झूठ बोलती रहतीं और कहते- तेरा पति हमें पैसे भेजता है, पर हम तुझे नहीं देते। बेचारी बहू इस झूठ पर विश्वास कर दुखी रहती।
एक दिन वह अत्यंत दुखी होकर एक वृद्धा के पास पहुंची। वृद्धा ने कहा- बेटी, तुम संतोषी माता का शुक्रवार व्रत करो। न खट्टा खाओ, न किसी को खाने दो। 16 शुक्रवार व्रत करने से तुम्हारे सारे कष्ट दूर होंगे। बहू ने श्रद्धा से व्रत शुरू किया। उधर उसका पति भी अचानक घर की याद आने पर लौट पड़ा। बहू ने दरवाज़ा खोला और खुशी के आंसू बहाने लगी। छोटा बेटा जब घर आया तो सच्चाई का पता चला कि उसके पैसे उसकी पत्नी को कभी दिए ही नहीं गए थे।
पति ने पत्नी की तकलीफ समझी और उससे पूछा- तुमने कैसे इतने दुखों में भी धैर्य रखा? पत्नी बोली-संतोषी माता की कृपा से। तभी माता संतोषी प्रकट हुईं और बोलीं- बेटी, तुम्हारे सत्य, संयम और व्रत के प्रभाव से ही यह सब संभव हुआ है। उन्होंने परिवार को आशीर्वाद दिया और घर में सुख-शांति भर दी। माता के आशीर्वाद से उनका परिवार फिर से खुशहाल हो गया। जो भी भक्त इस कथा को सच्चे मन से सुनता-पढ़ता है, उसके जीवन से दुख-कष्ट दूर हो जाते हैं और घर पर धन, शांति और संतोष का वास होता है।
संतोषी माता की आरती (Santoshi Mata Aarti)
जय संतोषी माता, मैया जय संतोषी माता,
आप ही के गुण गाते, मायें जय संतोषी माता।
रतन सिंहासन बैठी, तीन लोक फैलाए,
दास जनों के संकट, क्षण में दूर भगाए।
जय संतोषी माता...
जिस घर में तुम रहतीं, सुख-शांति वहाँ बसती,
सब बाधाएँ मिटतीं, मन की मुरादें भरतीं।
जय संतोषी माता...
भोग लगाएँ गुड़-चना, रुचि से माता खाती,
भक्तों का दुःख पाकर, झट से दौड़ी आती।
जय संतोषी माता...
जो भी तुमको ध्याता, उसका दुख हर लेती,
जीवन में खुशियाँ भरकर, मन का संतोष देती।
जय संतोषी माता...
शुक्रवार व्रत पूजा विधि (Shukrawar Vrat Puja Vidhi)
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
साफ एवं हल्के रंग के वस्त्र पहनें।
पूजा स्थल साफ करें और माता संतोषी की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।
शुद्ध जल, रोली, चावल, धूप, दीप जलाएं।
माता को गुड़-चना का भोग लगाएं (खट्टा पूर्णतः वर्जित)।
शुक्रवार व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें।
"जय संतोषी माता" का जाप करें।
परिक्रमा कर आरती करें।
व्रतधारी खट्टा नहीं खाता और न किसी को खाने देता है।
16 शुक्रवार पूरे होने पर ब्राह्मण या सुहागिन महिलाओं को भोजन कराकर व्रत पूर्ण करें।



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