Budhwar Vrat Katha: बुधवार को गणेश जी की ये कथा पढ़ने/सुनने से खुलते हैं सौभाग्य के द्वार, पढ़ें पूरी कहानी

Budhwar Vrat Katha Aarti In Hindi: बुधवार का दिन गणेश जी को समर्पित माना गया है और इस दिन विधि-विधान से पूजा एवं व्रत करने से जीवन में सौभाग्य, धन, करियर, व्यापार, संतान और स्वास्थ्य के मार्ग खुलते हैं। मान्यता है कि बुधवार व्रत के दौरान गणेश जी की यह विशेष कथा पढ़ने या सुनने से भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है तथा घर-परिवार से संकट और बाधाएं दूर होती हैं। हिंदू धर्म में कोई भी शुभ काम होता है तो सबसे पहले गणपति जी की ही पूजा होती है ऐसे में सभी अच्छे कार्यों में सबसे पहले गणेश जी का आह्वान किया जाता है।

ऐसा कहा जाका है कि गणपति बाप्पा प्रसन्न होकर व्रतधारी को बुद्धि, विवेक और समृद्धि का वरदान प्रदान करते हैं। अगर आप बुधवार का व्रत करते हैं या गणेश जी की कृपा पाना चाहते हैं, तो आज यह कथा अवश्य पढ़ें क्योंकि कथा सुने बिना व्रत अधूरा और निष्फल माना गया है।

पूरी बुधवार व्रत कथा (Budhwar Vrat Katha)

एक समय की बात है, एक धनी व्यापारी था जो गणेश जी का परम भक्त था। वह हर बुधवार उपवास रखता था और बड़े श्रद्धा से पूजा करता था। एक दिन व्यापार के काम से उसे दूर शहर जाना पड़ा। जाने से पहले उसने अपनी पत्नी को सख्त आदेश दिया कि बुधवार को कोई लेन-देन न करना, क्योंकि इस दिन उधार देना शुभ नहीं माना जाता।

कुछ दिनों बाद बुधवार के दिन व्यापारी की पत्नी पूजा कर रही थी कि तभी घर पर रिश्तेदार आ गए और कुछ जरूरी समान उधार माँगने लगे। स्त्री ने पहले मना किया लेकिन बार-बार आग्रह करने पर वह विवश हो गई और सामान उधार दे दिया।
उसी रात व्यापारी जब यात्रा करके घर पहुंचा, तो उसके सारे सामान और संबंधों में खटास आ गई व्यापार घाटे में, परिवार में तनाव और स्वास्थ्य में गिरावट। व्यापारी बहुत दुखी हुआ और गणेश जी से प्रार्थना करने लगा,हे गणपति! मुझसे कहां भूल हो गई? उसी रात सपने में गणेश जी ने दर्शन दिए और बोले- तुम्हारी पत्नी ने बुधवार के दिन लेन-देन किया, इसलिए बाधाएं उत्पन्न हुईं। लेकिन यदि फिर से व्रत पूरी श्रद्धा से करोगे और मेरी कथा सुनोगे, तो सभी संकट दूर हो जाएंगे।

भोर होते ही व्यापारी ने संकल्प के साथ बुधवार व्रत किया, गणेश जी की कथा सुनी, प्रसाद बांटा और दान-पुण्य किया।
कुछ दिनों के भीतर उसका व्यापार फिर से चल पड़ा, घर में खुशियां लौट आईं और परिवार पर से हर संकट टल गया। तभी से बुधवार व्रत में कथा पढ़ना/सुनना सौभाग्य और सफलता प्राप्ति का महत्वपूर्ण नियम माना गया।
कथा समाप्त।
श्री गणेशाय नमः।

गणेश जी की आरती (Budhwar Aarti)

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।
एकदंत दयावंत चार भुजा धारी,
माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा...
अंधन को आँख देत, कोढ़िन को काया,
बंधन को छूट देत, निर्धन को माया।
श्याम सरोज के सुमरन से मन की हर इच्छा पूरी होती देवा।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा...

बुधवार व्रत पूजा विधि (Budhwar Puja Vidhi)

प्रातः स्नान करके व्रत का संकल्प लें।

हरे वस्त्र धारण करें (संभव हो तो)।

पूजा स्थल पर हरे कपड़े पर गणेश जी की प्रतिमा/चित्र रखें।

दूर्वा घास, मोदक, हल्दी, धूप, दीप, पुष्प और पान अर्पित करें।

"ॐ गं गणपतये नमः" मंत्र का 108 बार जप करें।

प्रसाद में हरी मूंग/मोदक वितरित करें।

बुधवार के दिन उधार लेन-देन न करें।

Story first published: Wednesday, December 10, 2025, 8:04 [IST]
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