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Mangalvar Vrat Katha: मंगलवार के उपवास में पढ़ें ये व्रत कथा, करें बजरंग बलि को प्रसन्न
Mangalvar Vrat Katha In Hindi: मंगलवार का दिन भगवान श्री हनुमानजी को समर्पित माना गया है। जो भक्त मंगल या शनि से पीड़ित हों, धन-संबंधी रुकावटें, रोग-व्याधि, कार्य में असफलता या मानसिक तनाव का सामना कर रहे हों उनके लिए मंगलवार का व्रत अत्यंत फलदायी होता है। मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियम के साथ करने से बजरंगबली प्रसन्न होते हैं और जीवन से संकट, भय, बाधाएं और दुर्भाग्य दूर करते हैं।
मंगलवार के उपवास में हनुमान जी की कथा पढ़ने से व्रत पूर्ण फल देता है, इसलिए भक्त इस दिन पूजा के बाद कथा का श्रवण अनिवार्य रूप से करते हैं। आज हम आपके लिए लेकर आए हैं मंगलवार व्रत की पौराणिक कथा, पूजा-विधि और आरती, जिसे सुनने और करने से हनुमान जी की कृपा तुरंत प्राप्त होती है।

मंगलवार व्रत कथा (Mangalwar Vrat Katha in Hindi)
प्राचीन समय में एक साहूकार था। उसके घर में हर सुविधा थी, लेकिन कोई संतान नहीं थी। पति-पत्नी ने कई देवी-देवताओं की पूजा की, तीर्थ किए, लेकिन संतान की प्राप्ति नहीं हुई। एक दिन साहूकार की पत्नी मार्ग में जा रही थी कि उसे एक साधु मिले। साधु ने कहा- "बेटी, चिंता मत करो। मंगलवार का व्रत रखो और हनुमान जी की पूजा करके कथा सुनो, जल्द ही तुम्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति होगी।" स्त्री ने पूरे भाव से मंगलवार का व्रत रखना शुरू किया। पूजा की, कथा सुनी और प्रसाद बाँटा। कुछ ही महीनों में उसके गर्भ ठहरा और समय आने पर एक सुंदर पुत्र का जन्म हुआ।
समय बीतने लगा, लेकिन एक दिन साहूकार के मन में सवाल आया कि "हमें पुत्र कैसे मिला? किसके आशीर्वाद से?" पत्नी बोली "हनुमान जी की कृपा से।" लेकिन साहूकार को इस बात पर यकीन नहीं हुआ और उसने कथा सुनना व पूजा करना बंद कर दिया। धीरे-धीरे व्यापार में घाटा हुआ और घर में कलह होने लगी। पुत्र भी गंभीर रूप से बीमार पड़ गया। तब पत्नी ने पुनः मंगलवार का व्रत शुरू किया और हनुमान जी से प्रार्थना की। उसने कथा सुनकर प्रसाद वितरित किया। कुछ ही दिनों में पुत्र स्वस्थ हो गया, व्यापार सुधर गया और घर में सुख-शांति लौट आई। इस प्रकार माना जाता है कि जिसने श्रद्धा से मंगलवार का व्रत कर कथा सुनी, उसके सभी कष्ट और बाधाएँ समाप्त हो जाती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
हनुमान जी की आरती (Aarti of Hanumanji)
आरती कीजै हनुमान लला की,
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।
जाके बल से गिरि वर कांपे,
रोग-दोष जाके निकट न झांके।
अंजनिपुत्र महा बलदाई,
संतन के प्रभु सदा सहाई।
देव, दनुज, यक्ष, नर, नागा,
सब मिल कर करते हैं मागा।
आरती श्री हनुमान लला की,
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।
व्रत के लाभ
संकटों से मुक्ति
शत्रु भय का नाश
धन एवं व्यापार में वृद्धि
घर में सुख-शांति
मंगल व शनि दोष शांति
मंगलवार व्रत पूजा-विधि (Puja Vidhi)
व्रत का संकल्प सुबह स्नान के बाद लें।
हनुमानजी की प्रतिमा / चित्र पर जल चढ़ाएं और गंगाजल छिड़कें।
सिंदूर, अक्षत, लाल फूल, लाल वस्त्र, जनेऊ और पान चढ़ाएँ।
हनुमान चालीसा, सुंदरकांड या बजरंग बाण का पाठ करें।
बूंदी के लड्डू या चने-गुड़ का भोग लगाएँ।
कथा का श्रवण / पाठ करें।
अंत में आरती करें और प्रसाद बांटें।
व्रत में नमक, तला-भुना तथा मांस-मदिरा का सेवन वर्जित है।



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