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Navratri Day 6: नवरात्रि का छठा दिन मां कात्यायनी को है समर्पित, जानें पूजा की विधि, भोग, मंत्र व आरती
Navratri Day 6: इस वर्ष की शारदीय नवरात्रि धूम धाम से मनाई जा रही है। शहर-गाँव के कोने कोने में मां के पंडाल लगाए गये हैं और मंदिरों में मां के भक्तों की भरी भीड़ दिखाई पड़ रही है। 15 अक्टूबर से इस वर्ष की नवरात्री की शुरुआत हुई है। नौ दिनों तक मां के नौ रूपों की उपासना करके दशमी के दिन दशहरा मनाया जाता है।
शारदीय नवरात्रि के छठें दिन मां कात्यायनी देवी की पूजा की जाती है। मां कात्यायनी के रूप को उज्जवल और ज्योतिर्मय स्वरुप माना जाता है। उनकी चार भुजाएं होती हैं और वे सिंह की सवारी करती हैं। मां कात्यायनी की पूजा, छठे दिन यानि 20 अक्टूबर को की जाएगी। जानते हैं मां कात्यायनी की पूजा विधि, पूजा मन्त्र, आरती और भोग के बारे में विस्तार से -

मां कात्यायनी की पूजा विधि
नवरात्रि के छठे दिन सुबह सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत होकर मां कात्यायनी का ध्यान लगायें। इसके बाद पूजा स्थल की साफ़ सफाई करें। और कलश स्थापना की जगह पर मां कात्यायनी की तस्वीर को स्थापित करें। माता को कुमकुम और अक्षत लगायें और उनके समक्ष दीपक व धुप जलाएं। मां कात्यायनी को सफ़ेद व लाल रंग पसंद होता है, इसलिए इन रंग के वस्त्र पहन कर पूजा करें और सफ़ेद व लाल फूल अर्पित करें। विधिवत पूजा करके आरती और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। पूजा का अभिजित मुहूर्त सुबह 11:43 बजे से 12:24 बजे तक रहेगा।
मां कात्यायनी का भोग

मां को छठे दिन शहद का भोग लगाना शुभ माना जाता है। जीवन में मधुरता और सुख समृद्धि लाने के लिए शहद से बनी कोई मिठाई या कद्दू या सूजी का हलवा चढ़ाया जा सकता है।
मां कात्यायनी पूजा मंत्र
"ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥"
"या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥"
"कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि ।
नन्द गोपसुतं देविपतिं मे कुरु ते नमः ॥
ॐ ह्रीं कात्यायन्यै स्वाहा, ह्रीं श्रीं कात्यायन्यै स्वाहा ॥"
मां कात्यायनी पूजा आरती
जय जय अंबे जय कात्यायनी।
जय जगमाता जग की महारानी॥
बैजनाथ स्थान तुम्हारी।
वहां वरदानी नाम पुकारा॥
कई नाम है कई धाम हैं।
यह स्थान भी तो सुखधाम है॥
हर मंदिर में जोत तुम्हारी।
कही योगेश्वरी महिमा न्यारी॥
हर जगह उत्सव होते रहते।
हर मंदिर में भक्त हैं कहते॥
कात्यायनी रक्षक काया की।
ग्रंथि काटे मोह माया की॥
झूठे मोह से छुड़ानेवाली।
अपना नाम जपनेवाली॥
बृहस्पतिवार को पूजा करियो।
ध्यान कात्यायनी का धरियो॥
हर संकट को दूर करेगी।
भंडारे भरपूर करेगी॥
जो भी माँ को भक्त पुकारे।
कात्यायनी सब कष्ट निवारे॥
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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