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Navratri 9 Days Colour 2023: नवरात्रि के भाग्यशाली रंग जिनसे होती हैं माँ दुर्गा प्रसन्न
Navratri 2023 Lucky Colours: शारदीय नवरात्रि 15 अक्टूबर 2023 से प्रारंभ हो रहे हैं। शक्ति की देवी माँ दुर्गा की आराधना का पावन समय है नवरात्रि जिसमे माता के नौ रूपों की पूजा होती है।
इन दिनों माता प्रसन्न हुई तो भक्तो को सिद्धि प्राप्त होती है, भाग्य चमक उठते हैं और शत्रु पर विजय प्राप्त होती है। वैसे तो माता की पूजा के लिए कई विधि विधान हैं जिसमें उपवास, यज्ञ हवन और मन्त्रों का जाप शामिल है लेकिन एक बहुत महत्वपूर्ण बात आपको जान लेनी चाहिए कि माता के विभिन्न रूपों को अलग अलग रंग प्रिय हैं।

अगर नवरात्रि के ख़ास दिन ख़ास रंग का प्रयोग किया जाता है तो माता और भी प्रसन्न होती हैं। इसलिए हम आपको बताने जा रहे हैं माता के प्रिय रंग जो होंगे आपके लिए भाग्यशाली।
पहला दिन - नारंगी
माता का पहला रूप है शैलपुत्री जिनको नारंगी रंग बहुत प्रिय है। नारंगी ऊर्जा, त्याग और ऊष्मा का प्रतीक है। माता की भक्ति में जो त्याग करता है माता उसके जीवन में ऊर्जा भर देती हैं। आज के दिन नारंगी रंग का प्रयोग करें। नारंगी रंग के फूल चढ़ाएं।
दूसरा दिन - सफेद
माता का दूसरा रूप है ब्रह्मचारिणी जिनको सफ़ेद रंग बहुत प्रिय है। यह रंग शांति का प्रतीक है। स्वच्छता और पवित्रता का प्रतिक है। आज के दिन सफ़ेद रंग के वस्त्र धारण करें, सफ़ेद पुष्पों से माता की पूजा करें तो माता जीवन में सुख शांति भर देती हैं।
तीसरा दिन - लाल
माता का तीसरा रूप है चंद्रघंटा जिनको लाल रंग बहुत प्रिय है। लाल शक्ति और उग्रता का प्रतीक है। इस दिन लाल वस्त्र धारण करें और लाल पुष्पों से माता चंद्रघंटा की पूजा करें तो माता शत्रु पर विजय प्राप्त करने हेतु शक्ति देती हैं। लाल रंग के फल भी माता को अर्पित किये जा सकते हैं।
चौथा दिन - नीला
माता का चौथा रूप है कुष्मांडा जिनको नीला रंग बहुत प्रिय है। ये रंग माता का सबसे प्रिय रंग हैं। देवी कुष्मांडा अगर प्रसन्न हुई तो फिर अच्छा स्वस्थ्य और धन वैभव प्रदान करती हैं। आज के दिन नील रंग के वस्त्र धारण करें, नील रंग से माता का दरबार सजायें और नील पुष्प चढ़ाएं।

पांचवां दिन - पीला
माता का पांचवा रूप है स्कंदमाता जिनको पिला रंग बहुत प्रिय है। दक्षिण भारत में कार्तिकेय भगवान् को मुरुगा नाम से भी जाना जाता है। स्कंदमाता कार्तिकेय की माँ हैं। माता को प्रसन्न करने के लिए हल्दी चढ़ाएं, पिला वस्त्र धारण करें, पिला रंग का प्रसाद चढ़ाएं और पीले पुष्प से पूजा करें।
छठवां दिन - हरा
माता का छठा रूप है कात्यायनी जिनको हरा रंग बहुत प्रिय है। हरा रंग किसी चीज के प्रारंभ का प्रतीक है इसलिए यह बहुत शुभ रंग है। माँ कात्यायनी प्रसन्न हुई तो फिर भक्तो को समृद्धि प्रदान करती हैं। हरे रंग की साड़ी पहनें, हरा रंग का पुष्प चढ़ाएं और माता के पूजा स्थल पर हरे रंग से सजावट करें।
सातवां दिन - भूरा (ग्रे)
माता का सातवां रूप है कालरात्रि जिनको भूरा रंग बहुत प्रिय है। माता कालरात्रि अधर्म और नकारात्मकता का नाश करने वाली देवी हैं, इन्हें भूरा रंग पसंद है। आप इस दिन भूरे रंग के वस्त्र धारण कर सकते हैं। आज के दिन माता के दरबार में ज्यादा चमक धमक ना करके थोडा सादा सजावट ही रखें। आप भूरे रंग की साड़ी पहन सकती हैं।
आठवां दिन - बैंगनी
माता का आठवां रूप है महागौरी जिनको बैंगनी रंग बहुत प्रिय है। बैंगनी रंग सकारात्मकता और अच्छे स्वस्थ्य का प्रतिक है। माता की कृपा से भक्तो का कष्ट दूर हो जाता है। बैंगनी रंग के फूल चढ़ाएं, बैंगनी रंग के वस्त्र धारण करें और सजावट में बैंगनी रंग का इस्तेमाल करें तो माता प्रसन्न होती हैं।
नौवां दिन - चटकीला हरा
माता का नौवा रूप है सिद्धिदात्री जिनको चटकीला रंग (मयूरी हरा) रंग बहुत प्रिय है। यह रंग दया, स्नेह और शांति का प्रतिक है। माता सिद्धिदात्री प्रसन्न हुई तो भक्तो को सिद्धि प्राप्त होती है। इसलिए इस दिन मयूरी हरा रंग का प्रयोग करें, इस रंग के वस्त्र धारण करें और इस रंग से माता के पूजा स्थल पर सजावट करें। माता अलौकिक शक्ति प्रदान करती हैं। इसी के साथ माता के नौ रूपों की पूजा संपन्न होती है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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