दीवाली में मां लक्ष्मी पूजन में जाप करें इन मंत्रों का

By Aditi Pathak

हिंदू धर्म में देवी लक्ष्‍मी को धन-धान्‍य की देवी माना जाता है। हर पर्व या उत्‍सव के दौरान उनकी पूजा की जाती है। दीवाली के दौरान, मां लक्ष्‍मी की विशेष पूजा होती है। दीवाली की पूजा में एक ख़ास विधि का पालन किया जाता है जिसके अंतर्गत पूरे परिवार के साथ मिलकर पूजा को आयोजित किया जाता है, मां लक्ष्‍मी का श्रृंगार होता है, उनको भोग चढ़ाया जाता है और उनके लिए मंत्रों का जाप किया जाता है।

कहा जाता है कि मां लक्ष्‍मी की पूजा करने से व्‍यक्ति का भाग्‍य खुल जाता है और उसके जीवन में सम्‍पन्‍नता आ जाती है।

मंत्र, कुछ शब्‍दों का ऐसा संग्रह होता है जो शरीर और वातावरण में सकारात्‍मक ऊर्जा भर देता है। वैसे तो कई सारे लक्ष्‍मी मंत्र है जो अलग-अलग पूजा के दौरान पढ़े जाते हैं लेकिन इस लेख में हम आपको ऐसे मंत्रों के बारे में बता रहे हैं जिन्‍हें आप दीवाली के अवसर पर मां लक्ष्‍मी की पूजा के दौरान जाप कर सकते हैं। इनका जप करने से मन में एक विशेष ऊर्जा की अनुभूति होती है जो मन में अच्‍छे विचार ला देती हैं। इस मंत्रों का जाप करने के दौरान आप कमल के बीजों को गिनती करने के लिए प्रयोग में ला सकते हैं या किसी माला का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। इन मंत्रों का जाप अपनी इच्‍छानुसार कर सकते हैं, वैसे इन्‍हें 108 बार जप करना सही माना जाता है। यदि समय की कमी है तो आप मां लक्ष्‍मी के लिए दिन में एक बार भी जप कर सकते हैं। ये मंत्र कुछ इस प्रकार हैं:

Lakshmi Mantras

लक्ष्‍मी मंत्रों की सूची

लक्ष्‍मी बीज मंत्र 1

''श्रीं''

''श्रीं'' मां लक्ष्‍मी को प्रसन्‍न करने का एक मूल मंत्र है। इसे परावर्तन शब्‍द की तरह भी इस्‍तेमाल किया जाता है जो एक दिशा से दूरी दिशा में ऊर्जा को स्‍थानांतरित कर देता है। क्‍लीम, ह्रीं, आदि ऐसे ही शब्‍द होते हैं। इनमें सबसे ज्‍यादा शक्तिशाली से ही माना जाता है।

लक्ष्‍मी बीज मंत्र 2

॥ ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः॥

यह पूर्ण बीज मंत्र है। जिसे आप पूजा के शुरूआत में या देवी के अलंकार के दौरान जाप कर सकते हैं।

लक्ष्‍मी बीज मंत्र 3

॥ ॐ श्रृंग श्रियै नमः॥

यह एक अन्‍य बीज मंत्र है। इसमें श्रीं शब्‍द का इस्‍तेमाल नहीं किया जाता है जोकि इस मंत्र की विशेषता है।

Lakshmi Mantras

लक्ष्‍मी मंत्र -

॥ॐ ह्री श्रीं क्रीं श्रीं क्रीं क्लीं श्रीं महालक्ष्मी मम गृहे धनं पूरय पूरय चिंतायै दूरय दूरय स्वाहा ॥

यह मंत्र ऑफिस या कार्यस्‍थल छोड़ने से पहले जप करना चाहिए। इससे आपको चिंताओं के विनाश में सहायता मिलती है और आप अन्‍य कार्य को करने के लिए प्रोत्‍साहित होते हैं।

लक्ष्‍मी गायत्री मंत्र

ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ ।।

हम आपको देवी लक्ष्मी कहते हैं जो श्री हैं और भगवान विष्णु की पत्नी हैं। कृपया हमें बुद्धि, भाग्य और समृद्धि के साथ आशीर्वाद दें।

महा लक्ष्मी मंत्र

॥ॐ सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो, धन धान्यः सुतान्वितः। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः ॐ ॥

हे देवी महा लक्ष्मी, कृपया सभी बुराइयों को नष्ट करें और हमें एक उज्ज्वल और समृद्ध भविष्य का आशीर्वाद दें।

महा लक्ष्मी मंत्र (तांत्रिक)

॥ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं सौं ॐ ह्रीं क ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं सकल ह्रीं सौं ऐं क्लीं ह्रीं श्री ॐ ॥

यह एक शक्तिशाली मंत्र है जिसे महालक्ष्‍मी को प्रसन्‍न करने के लिए जाप किया जाना चाहिए।

लक्ष्मी नरसिंह मंत्र

॥ॐ ह्रीं क्ष्रौं श्रीं लक्ष्मी नृसिंहाय नमः ॥

॥ ॐ क्लीन क्ष्रौं श्रीं लक्ष्मी देव्यै नमः ॥

इस मंत्र का जाप अपने पति/पत्‍नी के साथ पूजा के दौरान करना चाहिए।

देवी महा लक्ष्‍मी -

एकदशक्ष सिद्ध लक्ष्मी मंत्र

॥ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं सिध्द लक्ष्म्यै नमः ॥

यह लक्ष्‍मी मंत्र सिद्धी प्राप्‍त करने में काफी शक्तिशाली होता है।

श्री दक्षिण लक्ष्‍मी स्‍त्रोतम -

''त्रिलोक्य पूजिथे देवी कमल, विष्णु वल्लभे,

यया थवम् अचला कृष्णे थाथाभव मयी स्थिरा.

कमल चञ्चल लक्ष्मी चला भूथिर हरि प्रिय,

पद्म पद्मालया सम्यक उचै श्री पद्म धारिणी,

ड्वदसैथनि नामानि लक्ष्मी संप्पोज्य य पदेतः,

स्थिरा लक्ष्मीर भवेद थस्य पुत्र धर अभि सह,

इथि श्री दक्षिणा लक्ष्मी स्तोत्रं संपूर्णं.''

अर्थ- इसका अर्थ है कि ''हे देवी महा लक्ष्मी, आप सभी तीनों ही लोक में पूज्‍यनीय हैं। आप भगवान विष्णु की पत्नी हैं, जो भगवान कृष्ण के अवतार हैं, उनकी पत्‍नी हैं। हे मां कमला! मैं चाहता हूं कि आप सदैव मेरे पास रहें। हे गतिशील मां, आप समृद्धि की देवी हैं और जो एक स्थान से दूसरे स्थान पर हमेशा स्थानांतरित करती हैं। हे देवी, हरि की प्यारी, हे देवी पद्मा, आप हमेशा सुखद रहती हैं, हे धन की देवी, आप उनमें से एक हैं जो कमल धारण करती हैं। जो देवी लक्ष्मी के 12 नामों का जाप करते हैं, उनके पास वह अवश्‍य आएगी। वह व्‍यक्ति एक पत्नी और बेटों के साथ धन्य होगा। इसके साथ, दक्षिण लक्ष्मी स्तोत्रम को समाप्त होता है।

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