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स्वर्ण मंदिर की ये 7 रोचक बातें घुमा देंगी आपका दिमाग
गोल्डन टेंपल (स्वर्ण मंदिर) जो कि हर्मिन्दर साहिब के नाम से भी जाना जाता है, यह दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करता है। यहाँ केवल सिख समुदाई के लोग ही नहीं बल्कि हर धर्म के व्यक्ति उतनी ही श्रद्धा से आते हैं।
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यह गुरुद्वारा पवित्र अमृतसर नगर में है और यह आज भारत के मुख्य पर्यटन स्थलों में से एक है। इस मंदिर की सुंदरता मन को लुभाती है और यह पर्यटकों में एक खास धार्मिक महत्व रखता है।
इसके धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के अलावा इसके कुछ रोचक और अनोखी बातें भी है। आइये हम बताते हैं कुछ ऐसी ही बातें...

1. पहले कैसा दिखता था स्वर्ण मंदिर
मंदिर को जब शुरू में बनाया गया तो इसमें सोने की पोलिश नहीं की गई थी। 19वी सदी में पंजाब के राजा रहे महाराजा रणजीत सिंह के कार्यकाल में इसका रिनोंवेशन करवाया गया। इसके बाद इसका वो स्वरूप सामने आया जो आज दिखता है।

2. मंदिर बनने से पहले
यह मंदिर बना इससे पहले इस जगह पर सिखों के प्रथम गुरु, गुरु नानक जी ने ध्यान किया था। सिखों के पांचवे गुरु, गुरु अंजान के समय में यह मंदिर बना था।

3. अन्य धर्मों से भी आते हैं लोग
यह एक पवित्र स्थान है जहां आने वाले 35 प्रतिशत पर्यटक सिख के अलावा अन्य धर्मों को मानने वाले हैं

4. लंगर में 2 लाख से ज्यादा लोग खाते हैं
धार्मिक कार्यक्रमों में यहाँ लगने वाले लंगर में 2 लाख से ज्यादा लोग भोजन प्रसादी पाते हैं। और इससे ज्यादा आश्चर्य की बात है कि ये सारा खाना भक्तों द्वारा दान किया जाता है।

5. सीढियां ऊपर नहीं, नीचे जाती हैं
यहाँ की सीढ़ियाँ अन्य पवित्र स्थानों की तरह ऊपर नहीं जाती बल्कि ये नीचे की तरफ उतरती हैं। इसकी डिजाइन में दिखावे की बजाय एक विनम्रता दिखाई देती है। यह पूरा मंदिर शहर के लेवल से नीचे की ओर बना हुआ है।

6. सोने की पालकी
हर सुबह गुरु ग्रंथ साहिब (सिखों का धार्मिक ग्रंथ) को अकाल तख्त साहिब से फूलों और गुलाब जल के साथ सोने की पालकी में मंदिर के दरबार हॉल में लाया जाता है। पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब को वापस अकाल तख्त में ले जाने के बाद पूरे दरबार हॉल को दूध से धोया जाता है।

7. मुगल और भारतीय वास्तुकला का नमूना
हाथ से पेंट किए गए चित्रों और कलाकृतियों से यह मुगल और भारतीय वास्तुकला का एक नायाब नमूना प्रतीत होता है।



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