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आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2022, पांचवें दिन होती है स्कंदमाता की पूजा

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नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा की जाती है। ऐसा कहा जाता है कि स्कंदमाता की पूजा करने से, मूर्ख व्यक्ति भी ज्ञानी या बुद्धिमान बन सकता है। तो यहां हम आपको स्कंदमाता की उत्पत्ति से जुड़े कुछ रोचक तथ्य बताने के साथ ही नवरात्रि के पांचवें दिन के पूजा-विधान, भोग, मंत्र और आरती के बारे में बताने वाले है।

स्कंदमाता की गोद में उनका पुत्र स्कंद विराजित है

नवरात्रि का पाँचवाँ दिन स्कंदमाता की उपासना का होता है। मां के इस रूप की पूजा इस बार 4 जुलाई, रविवार को होगी। देवी स्कन्द माता ही हिमालय की पुत्री पार्वती हैं, जिन्हें माहेश्वरी और गौरी के नाम से भी जाना जाता है। गोद में स्कन्द यानी कार्तिकेय स्वामी को लेकर विराजित माता का यह स्वरुप जीवन में प्रेम, स्नेह, संवेदना को बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

स्कंदमाता को प्रसन्न करके मूर्ख व्यक्ति भी ज्ञान प्राप्त कर सकता है

भगवान स्कंद 'कुमार कार्तिकेय' नाम से भी जाने जाते हैं। पुराणों में स्कंद को कुमार और शक्ति कहकर इनकी महिमा का वर्णन किया गया है। देवी स्कन्दमाता की तीन आंखें और चार भुजाएं हैं। स्कंदमाता अपने दो हाथों में कमल का फूल धारण करती हैं और एक भुजा में भगवान स्कन्द या कुमार कार्तिकेय को सहारा देकर अपनी गोद में लिये बैठी हैं जबकि मां का चौथा हाथ भक्तों को आशीर्वाद देने की मुद्रा मे होता है। ऐसा कहा जाता है कि मां स्कंदमाता की पूजा करने से, मूर्ख व्यक्ति भी ज्ञानी या बुद्धिमान बन सकता है।

देवी स्कंदमाता अपने अमोघ भक्तों को मुक्ति प्रदान करती है

नवरात्रि के पांचवें दिन, भक्त का मन विशुद्धा चक्र तक पहुंच जाता है और इसी में रहता है। इस स्थिति में, भक्त का मन अत्यधिक शांत रहता है। स्कंदमाता की पूजा करने से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। इसके अलावा ये भक्त के लिए मुक्ति का रास्ता खोलती है और सूर्य की भांति अपने भक्तों को असाधारण तेज और चमक प्रदान करती है।

स्कंदमाता की पूजा का शुभ मूहुर्त

अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12:04 से दोपहर 12:58 तक।

स्कंदमाता का मंत्रः ॐ ह्रीं सः स्कंदमात्रये नमः , इस मंत्र का 108 बार जाप करें।

पांचवें दिन का रंग: क्रीम

पांचवें दिन का प्रसादः केसर पिश्ता वाला श्रीखंड

स्कंदमाता की आरती

जय स्कन्द माता , ॐ जय स्कन्द माता ।

शक्ति भक्ति प्रदायिनी, सब सुख की दाता ।। ॐ जय स्कन्द माता ।।

कार्तिकेय की हो माता , शंभू की शक्ति ।

भक्तजनों को मैया, देना निज भक्ति ।। ॐ जय स्कन्द माता ।।

चार भुजा अति सोहे ,गोदी में स्कन्द ।

द्या करो जगजननी, बालक हम मतिमन्द ।। ॐ जय स्कन्द माता ।।

शुभ्र वर्ण अति पावन ,सबका मन मोहे ।

होता प्रिय माँ तुमको, जो पूजे तोहे ।। ॐ जय स्कन्द माता ।।

स्वाहा स्वधा ब्रह्माणी , राधा रुद्राणी ।

लक्ष्मी शारदे काली, कमला कल्याणी ।। ॐ जय स्कन्द माता ।।

काम क्रोध मद , मैया जगजननी हरना ।

विषय विकारी तन मन, को पावन करना ।। ॐ जय स्कन्द माता ।।

नवदुर्गो में पंचम , मैया स्वरूप तेरा ।

पाँचवे नवरात्रे को, होता पूजन तेरा ।। ॐ जय स्कन्द माता ।।

तू शिव धाम निवासिनी, महाविलासिनी तू ।

तू शमशान विहारिणी, ताण्डव लासिनी तू ।। ॐ जय स्कन्द माता ।।

English summary

Ashadha gupt navratri 2022 day 5 maa skandmata puja vidhi shubh muhurat mantra bhog and aarti

Mother Skandmata is worshiped on the fifth day of Navratri. It is said that by worshiping Skandamata, even a foolish person can become wise. So here we are going to tell you some interesting facts related to the origin of Skandmata, as well as about the worship, Bhog, Mantra and Aarti of the fifth day of Navratri.
Story first published: Saturday, July 2, 2022, 17:59 [IST]
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