Latest Updates
-
Ganesh Chaturthi Decoration Ideas: गणेश चतुर्थी पर ऐसे सजाएं बप्पा का दरबार, कम खर्च में ये आइडियाज आएंगे काम -
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज पर हाथों में लगी मेहंदी का चाहती हैं डार्क कलर, तो आजमाएं ये 4 आसान टिप्स -
Modak Recipe: गणेश चतुर्थी पर बप्पा के लिए घर पर बनाएं उनके प्रिय उकडिचे मोदक, जानें इसकी आसान रेसिपी -
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज का व्रत कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व -
ना मूर्ति, ना पुजारी, सूर्यास्त के बाद एंट्री भी मना, जानिए फिल्म 'The Vvaan' वाले वन देवी मंदिर का रहस्य -
नेपाल में बाढ़ के बाद भूकंप, इंडोनेशिया में फटा ज्वालामुखी, क्या बाबा वेंगा की भविष्यवाणी हुई सच? -
Pithori Amavasya 2026: आज या कल, पिठोरी अमावस्या कब है? जानें सही तारीख, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और महत्व -
World Suicide Prevention Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस? जानें इसका इतिहास और महत्व -
तांबे के बर्तन में पानी पीने से मिलेंगे ये 5 फायदे, डायजेशन के साथ इम्यूनिटी भी होगी मजबूत -
Ganesh Chaturthi 2026: कब है गणेश चतुर्थी? जानें तिथि, गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त और विसर्जन की तारीख
Bhanu Saptami 2023: संतान प्राप्ति, निरोग जीवन के लिए उत्तम है भानु सप्तमी, जानिये 2023 में तिथि-मुहूर्त
अगर आप संतान प्राप्त करना चाहते हैं और रास्ते में अड़चन है, जीवन में संकट बहुत आते हैं, मंगल ग्रह से परेशान हैं तो फिर आपके लिए उत्तम समाधान है सूर्य देव की पूजा। वैसे सूर्य देव की पूजा तो प्रतिदिन सूर्योदय के समय करनी चाहिए, इससे सूर्य प्रसन्न होते हैं, शरीर को रोग मुक्त करते हैं, जीवन में समृद्धि देते हैं। मगर भानु सप्तमी को सूर्य की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है। इस दिन की पूजा का शास्त्रों में बहुत महत्त्व दिया गया है।

भानु सप्तमी 2023 तिथि एवं मुहूर्त
सूर्य पूजा फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को की जाती है इसलिए इस दिन को भानु सप्तमी कहते हैं। भानु सूर्य का पर्यायवाची है। इस वर्ष यानी 2023 में भानु सप्तमी 26 फ़रवरी को है। इसका शुभ मुहूर्त 26 फरवरी 2023 को प्रात: 12 बजकर 20 मिनट से आरम्भ होगा और अगले दिन 27 फरवरी 2023 को सुबह 12 बजकर 59 मिनट पर समाप्त होगा।

सूर्य पूजा का समय और मंत्र
सूर्य को अर्घ्य दें। अर्घ्य देने का समय नीचे बताया गया है। सूर्य के प्रकाश को अपने शरीर से अनुभव करते हुए पूरे सम्मान के साथ जल देते हुए इन बताये गए मंत्र का जाप करें।
सूर्य पूजा का समय - सुबह 06.54
सूर्य देव को जल दें और इस मंत्र का जाप करें -
ऊँ ऐही सूर्यदेव सहस्त्रांशो तेजो राशि जगत्पते। अनुकम्पय मां भक्त्या गृहणार्ध्य दिवाकर:।।
ऊँ सूर्याय नम:, ऊँ आदित्याय नम:, ऊँ नमो भास्कराय नम:। अर्घ्य समर्पयामि।

भानु सप्तमी को ऐसे करें पूजा और व्रत
प्रयास करें की सूर्योदय से पहले स्नान कर लें ताकि सूर्योदय के समय अर्घ्य दिया जा सके। अगर ना हो पाए तो सूर्योदय के तुरंत बाद भी स्नान करके पूजा कर सकते हैं। स्नान करके तिलक लगाएं, गेरुआ वस्त्र पहनें और लाल आसन बिछा कर ताम्बे के लोटे से अर्घ्य दें। लोटे में केसर, अक्षत और फूल डाल सकते हैं। अगर व्रत कर रहे हैं तो नमक का सेवन ना करें। फलाहार करना उत्तम रहता है। रात में जागरण करें और सुबह सात्विक भोजन करें। सूर्य देव प्रसन्न होंगे और आपके जीवन में सुख समृद्धि आएगी।

भानु सप्तमी का महत्व
सूर्य देव प्रसन्न होने पर संतान प्राप्ति का आशीर्वाद देते हैं। सूर्य की किरणों में कई चर्म रोग और गंभीर बीमारियों को दूर करने की शक्ति होती है। इसके अलावा ये मान्यता भी है कि इस दिन सूर्य को अर्घ्य देने से कुंडली में मंगल के कुप्रभाव कम होते हैं।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications
