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धनतेरस पर इस विधि से करें पूजा, मिलेगा धन और अच्छी सेहत
समुद्र मंथन के समय जब धन्वन्तरि प्रकट हुए थे तब उनके हाथ में कलश था जिसके कारण इस दिन नये उपहार, सिक्का, बर्तन व गहनों की खरीदारी करना शुभ रहता है।
धनतेरस एक ऐसा त्यौहार है जो छोटी दिवाली के एक दिन पहले मनाया जाता है। इस दिन लोग कई वस्तुओ की खरीददारी करते हैं क्योंकि धनतेरस में खरीददारी करना बहुत ही शुभ माना जाता है।
यह त्योहार कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन मनाया जाता है क्योंकि कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धन्वन्तरि का जन्म हुआ था इसलिए यह त्यौहार इस तिथि में मनाया जाता है।

समुद्र मंथन के समय जब धन्वन्तरि प्रकट हुए थे तब उनके हाथ में कलश था जिसके कारण इस दिन नये उपहार, सिक्का, बर्तन व गहनों की खरीदारी करना शुभ रहता है।

इस दिन कई लोग धनिया के बीज खरीद कर भी लोग घर में रखते है। दीपावली के बाद इन बीजों को लोग अपने बाग-बगीचों में या खेतों में बोते है। घर में हमेशा भरा रहेगा पैसा, अगर घर में रखेंगे ये चीज़ें
आइये इसी के साथ जानते हैं धनतेरस की पूजा और विधि

1. धनतेरस की पूजा के लिए आपको कुछ सामग्री की जरुरत पड़ती है। सितारों को देखने के बाद शाम को पूजा करते हैं। पूजा के लिए आपको एक साफ़ पाटा चाहिए जिसके ऊपर आप रोली से स्वस्तिक बनाएंगे।
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2. उसके ऊपर चौ मुखी दीपक जलाएं। इसके लिए आप घी या तेल का दीपक जला सकते हैं।

3. अब दिए को जलाएं और मृत्यु के देवता यमराज के साथ अपने पूर्वजों को याद करें। इसके बाद धन्वंतरि की पूजा करें। इसके लिए पालथी मार कर आराम से बैठे और धन्वंतरि मंत्र का 108 बार जाप करें। यह मंत्र है ॐ धन धनवंतरी नमः।

4. धन्वंतरि पूजा के बात गणेश और लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इसके लिए गणेश और लक्ष्मी जी पर फूल और मिठाई चढ़ाई जाती है। साथ में धूब और अगरबत्ती जलाएं। इस पूजा के लिए आप गणेश और लक्ष्मी जी की मिट्टी की मूर्ति का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह भी पढ़ें- में लक्ष्मी प्राप्त करने के 8 उपाय

5. इसके बाद पंचपात्र की मदद से दीए के चारों तरफ तीन बार गंगा जल छिड़के। अब दिए पर रोली का तिलक करें और अक्षत छिड़कें। इसके बाद दिए पर मिठाई, खीलें और बताशें चढ़ाएं और साथ में एक रुपए चढ़ाएं।

6. अब दिए पर फूल चढ़ाएं और धूब बत्ती जलाएं। इसके बाद घर की महिलाएं दीए की चार बार परिक्रमा करती हैं और घर की सुख और संबृद्धि की प्रार्थना करती हैं। अब दिए को प्रणाम करें और भगवान का आशीर्वाद लें।
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7. आखिर में घर की सबसे बुज़ुर्ग या अविवाहित महिला सबके माथे पर तिलक करती है और घर के पुरुष दिया जला कर घर के प्रवेश द्वार के दाहिनी तरफ रखते हैं। ध्यान रहे की इस दिए की लौ दक्षिणी दिशा की तरफ हो।



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