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ईद मुसलमानों का सबसे बड़ा त्योहार है। तीस दिन के रोजों के बाद चांद के दीदार के साथ ही ईद का जश्न शुरू हो जाता है। रमजान के महीने में लोग रोजे रखकर अपना दिन अल्लाह की इबादत में बिताते हैं। खुदा भी अपने उन अकीदतमंदों को इन रोजों को पूरी करने की हिम्मत देता है जो ईमानदारी से इस राह पर चलते हैं।

इस साल ईद के मौके पर स्थिति पहले की तरह नहीं है। कोरोना वायरस महामारी के कारण न बाजारों में रौनक है और न सड़कों पर वो चहल-पहल है। लगभग सभी पर्व इस कोरोना की भेंट चढ़ चुके हैं। मगर आप निराश न हों। इस निराशा की घड़ी में हम सभी एक दूसरे की हिम्मत बढ़ाने का काम कर सकते हैं और ईद एक बेहतरीन मौका है। इस ईद के मौके पर आप घर पर ही रहें और अपने परिवार के साथ इसका आनंद लें।

घर पर पढ़ें नमाज
देश भर में जितनी तेजी से कोरोना संक्रमण के मामले फैल रहे हैं, उसे देखते हुए सोशल डिस्टन्सिंग का पालन करें और घर पर ही नमाज अदा करें। मस्जिदों और ईदगाहों में जाना मुमकिन नहीं है। आप परिवार के साथ सादगी से ये पर्व मनाएं।

फितरे का हिस्सा रख दें अलग
ईद के दिन नमाज से पहले हर मुसलमान फितरा देना अपना फर्ज समझता है। इसका मतलब है कि फितरे में हर इंसान पौने दो किलो अनाज या उसकी कीमत गरीबों को देता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि गरीब तबके के लोग भी ईद मना सकें। इस साल कोरोना के कारण कई राज्यों में लॉकडाउन लगा है। ऐसे में ईद के दिन ही फितरा देना मुमकिन नहीं है। आप फितरे का सामान अथवा रकम अलग निकाल कर रख सकते हैं और जब आपको बाहर जाने का मौका मिले तब आप किसी जरुरतमंद को दे सकते हैं।

दें डिजिटल मुबारकबाद
ईद के मौके पर सब एक दूसरे के घर जाते हैं और गले लगकर ईद-उल-फितर की मुबारकबाद देते हैं। मगर कोरोना काल में ऐसा कुछ करना खतरे से खाली नहीं है। आप अपना और अपने करीबियों का ख्याल रखें और इस साल ईद की खुशियां फोन या व्हाट्सएप के जरिये बांटें।

मांगे सेहतमंद रहने की दुआ
पूरे महीने रोजे रखने के बाद ईद का दिन आता है। ऐसा विश्वास है कि इस दिन मांगी गई दुआ जरुर कबूल होती है। इस समय देश और दुनिया में जिस तरह के हालात हैं उसकी बेहतरी के लिए जरुर दुआ करें। कई तरह की बंदिशों के बावजूद इस त्योहार को खुशी और आपसी मेलजोल के साथ मनाने से आपको कोई नहीं रोक सकता है। केवल सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें और मास्क जरुर पहनें।
आप सभी को ईद की ढेरों मुबारकबाद।



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