Ujjain History: जानिए उज्जैन नगरी से जुड़ी ये रोचक बातें और हिंदू धर्म में इसका महत्व

भारत देश में कई तीर्थ स्थल है जहां देवी देवताओं का वास होता है। कहते हैं इन तीर्थ स्थलों पर जाकर भगवान के दर्शन करने से मनुष्य के सारे कष्ट दूर होते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इन्हीं तीर्थ स्थलों में से एक है महाकाल की नगरी उज्जैन। यहां कई महत्वपूर्ण और प्रमुख स्थान। उज्जैन शिप्रा नदी के तट पर बसा है। इस जगह को मंदिरों का स्थान भी कहते हैं। यह वह स्थान है जहां 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर स्थित है। माना जाता है कि किसी भी शुभ कार्य को शुरू करने से पहले यदि महाकाल के दर्शन किए जाए और उनका आशीर्वाद लिया जाए तो वह काम बिना किसी बाधा के सरलता से पूरा हो जाता है। लोग दूर दूर से अपनी मनोकामाएं लेकर महादेव के पास आते हैं और कभी भी खाली हाथ नहीं लौटते हैं।

Historical Importance of Ujjain in Hindu Religion and its interesting Facts in Hindi

भोलेनाथ की इस नगरी में हर दिन चमत्कार होते हैं। ईश्वर में जिनकी आस्था न हो उन्हें भी भगवान के होने पर विश्वास होने लगता है। इन्हीं कारणों से उज्जैन को सब तीर्थ स्थलों में सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। आइए आपको इस स्थान से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बाते बताते हैं।

कालभैरव की प्रतिमा करती है मदिरा पान

कालभैरव की प्रतिमा करती है मदिरा पान

महाकाल से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर है काल भैरव का मंदिर जहां भगवान को प्रसाद के रूप में मदिरा चढ़ाया जाता है। बाबा के मुंह के आगे मदिरा का कटोरा लगाया जाता है जिसके बाद धीरे धीरे सारी मदिरा कटोरे से गायब हो जाती है। कहा जाता है कि भगवान अपने भक्तों की बुराइयों को अपने अंदर समाने के लिए मदिरा पान करते हैं।

ग्रहों की बाधाएं होती है दूर

ग्रहों की बाधाएं होती है दूर

काल भैरव ग्रहों की बाधाओं को भी दूर करते हैं। ऐसी मान्यता है कि यदि किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में राहु दोष है तो काल भैरव के मंदिर में आकर दर्शन करने और प्रसाद चढ़ाने से उसके सारे कष्ट दूर होते हैं।

उज्जैन में होता है पिंडदान

उज्जैन में होता है पिंडदान

मध्य प्रदेश के उज्जैन में भी पिंडदान का अपना एक विशेष महत्व होता है। उज्जैन के भैरवगढ़ क्षेत्र सिद्धनाथ तीर्थ है जिसे प्रेतशिला तीर्थ भी कहते हैं। शिप्रा नदी के तट पर यह स्थान है जहां एक बड़ा बरगद का पेड़ है। माना जाता है कि इस पेड़ को खुद माता पार्वती ने लगाया था। यही वह स्थान है जहां उन्होंने अपने पुत्र कार्तिकेय का मुंडन भी करवाया था। कहते हैं मुगलों ने इस पेड़ को कटवा कर ऊपर से लोहे के तवे रख दिये थे लेकिन यह पेड़ लोहे के तवो को चीर कर फिर से उग गया था।

उज्जैन में सिद्धवट, गया कोठा और रामघाट पर तर्पण किया जाता है।

उज्जैन के राजा महाकाल

उज्जैन के राजा महाकाल

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राजा विक्रमादित्य के बाद कोई भी राजा उज्जैन नगरी पर राज नहीं कर पाया। जो भी यहां का राजा बनता वह मारा जाता यह फिर उसका जीवन कष्टों से भर जाता। यही वजह है कि आज तक कोई भी मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री यहां रात को रुकने का साहस नहीं करता।

ऋषि संदीपानि का आश्रम

भगवान श्री कृष्ण और उनके भाई बलराम ने ऋषि संदीपानि के आश्रम में शिक्षा ग्रहण की थी। यहां श्री कृष्ण की मुलाकात उनके प्रिय मित्र सुदामा से हुई थी। लोग महाकाल के दर्शन करने के बाद यहां जरूर आते हैं। इसके अलावा महाकाल ज्योतिर्लिंग से कुछ दूरी पर ही देवी सती के 51 शक्तिपीठों में से एक हरसिद्धि माता का मंदिर है। यहां भी भक्तों की भीड़ देखने लायक होती है। महाकाल के गर्भ गृह में देवी पार्वती के साथ श्री गणेश और कार्तिकेय जी की मूर्तियां भी स्थापित है।

Story first published: Monday, March 6, 2023, 15:30 [IST]
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