Latest Updates
-
Aja Ekadashi Vrat Katha: अजा एकादशी पर पढ़ें ये व्रत कथा, मिलेगा अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य -
Aja Ekadashi 2026: नारायण की कृपा...इन संदेशों के साथ अपने प्रियजनों को भेजें अजा एकादशी की शुभकामनाएं -
National Nutrition Week: प्रेग्नेंसी में जरूरी है सही न्यूट्रिशन, जानें गर्भावस्था में क्या खाएं-क्या न खाएं -
Aja Ekadashi 2026: कब है अजा एकादशी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि और पारण समय -
Teacher's Day 2026: 5 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है शिक्षक दिवस? जानिए क्या है इसका इतिहास और महत्व -
Teacher's Day 2026 Sanskrit Wishes: इन संस्कृत श्लोकोंं के जरिए गुरुजनों को भेजें शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं -
Teacher’s Day 2026 Wishes: गुरु का ज्ञान...इन संदेशों के साथ अपने टीचर्स को भेजें शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं -
Dahi Handi 2026: 5 या 6 सितंबर, कब है दही हांडी? जानें क्यों और कैसे मनाते हैं ये पर्व -
Janmashtami 2026: धन, प्रेम विवाह और संतान प्राप्ति के लिए जन्माष्टमी पर करें ये अचूक उपाय, पूरी होगी मनोकामना -
Happy Krishna Janmashtami 2026 Wishes: नंद के घर खुशियां आईं...जन्माष्टमी पर अपनों को भेजें ये शुभकामना संदेश
मार्च की इस तारीख से है होलाष्टक, अगले आठ दिनों तक न करें ये काम
इस साल होली का त्योहार 10 मार्च को मनाया जाएगा। शास्त्रों के मुताबिक फाल्गुन माह की शुक्ल अष्टमी से लेकर होलिका दहन तक का समय होलाष्टक कहलाता है। यह होली से आठ दिन पहले शुरू हो जाता है। इसके मुताबिक इस साल होलाष्टक 3 मार्च से लग जाएगा। इस अवधि का विशेष महत्व है। होलाष्टक लगने के साथ ही होली की तैयारियां शुरू हो जाती है मगर इस दौरान कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है। जानते हैं कि होलाष्टक से जुड़ी मान्यता के बारे में और क्यों इस दौरान कोई भी शुभ कार्य करने से माना किया जाता है।

शिवजी से जुड़ा है होलाष्टक
ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव ने होलाष्टक की शुरुआत वाले दिन ही कामदेव को भस्म कर दिया था। इन आठ दिनों के दौरान अलग अलग ग्रह उग्र रूप में रहते हैं। यही वजह है कि होलाष्टक के दौरान कोई भी शुभ काम करने से माना किया जाता है।

होलाष्टक से जुड़ी पौराणिक मान्यता
होलाष्टक से जुड़ी ये भी मान्यता है कि होली के पहले आठ दिनों तक भगवान विष्णु के परम भक्त प्रह्लाद को काफी कष्ट दिए गए थे। फाल्गुन के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को ही हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को बंदी बना लिया था। प्रह्लाद को जान से मारने के लिए उसे अलग अलग तरीकों से प्रताड़ित किया गया था। मगर भगवान विष्णु ने हर मुश्किल से अपने भक्त को बचाया था। प्रह्लाद के जीवन में वो आठ दिन यातनाओं से भरे हुए थे इस कारण होलाष्टक के समय को शुभ नहीं माना जाता है।

होलाष्टक के दौरान इन कामों को करने की होती है मनाही
होलाष्टक लगने के बाद से होली के दिन रंग खेलने तक किसी भी तरह के मांगलिक कार्यों का आयोजन नहीं किया जाता है। होलाष्टक के इन आठ दिनों में शादी-विवाह, भूमि पूजन, गृह प्रवेश, नया व्यापर शुरू करने की भूल नहीं करनी चाहिए। शास्त्रों के अनुसार होलाष्टक के साथ ही नामकरण संस्कार, विवाह संस्कार, जनेऊ संस्कार जैसे 16 संस्कार पर पाबंदी लग जाती है।

धर्म कर्म के कार्यों में बिताएं समय
होलाष्टक का समय धर्म-कर्म का काम करने के लिए बेहद अच्छा माना जाता है। इस दौरान किये व्रत और दान का लाभ मिलता है और जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है। आप वस्त्र, अनाज और धन का दान कर सकते हैं।



Click it and Unblock the Notifications
