Latest Updates
-
Gandhi Jayanti 2026 Essay, Speech: गांधी जयंती पर ऐसे करें भाषण और निबंध की तैयारी, मिलेगा इनाम -
Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष में खीर बनाते समय न करें ये गलती, नहीं तो नाराज हो सकते हैं पितर, जानें सही विधि -
Koffee With Karan 9: करण जौहर का ‘कॉफी विद करण’ 22 साल बाद होगा खत्म, जानें कब और कहां स्ट्रीम होगा आखिरी सीजन -
Jitiya Vrat 2026: कब है जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत? जानें सही तारीख, और नहाय-खाय से लेकर पारण तक का समय -
लाखों में बिकती है दुनिया की सबसे महंगी कॉफी, लेकिन बनाने का प्रोसेस जानकर फ्री में भी पीने से करेंगे तौबा! -
पाम ऑयल क्या होता है और इसे खाने से क्या नुकसान होते हैं? जानिए इससे शरीर पर क्या असर होता है -
October 2026 Vrat Tyohar List: नवरात्रि, दशहरा से करवा चौथ तक, यहां देखें व्रत-त्योहारों की पूरी लिस्ट -
जुबिन नौटियाल बने पापा, पत्नी ने दिया बेटे को जन्म, गणेश चतुर्थी पर घर आया नन्हा मेहमान -
'मन की बात' में PM मोदी ने बताया क्यों इतना खास है आंवला, जानिए इसके 5 जबरदस्त फायदे और सेवन का सही तरीका -
World Heart Day 2026: क्रॉनिक स्ट्रेस बन सकता है हार्ट अटैक और स्ट्रोक की वजह, डॉक्टर से जानें बचाव के तरीके
क्या है नमाज़ पढ़ने का असली मकसद
यह रमज़ान का मुबारक़ महीना चल रहा है। रमजान इस्लामी महीने का नौवां महीना है। इसका नाम भी इस्लामिक कैलेंडर के नौवें महीने से बना है। यह महीना इस्लाम के सबसे पाक महीनों में शुमार किया जाता है। इस महीने में इस्लाम को मानने वाले अनुयाईयों को रोज़े रखने की हिदायत दी गयी है।
रोज़े रखने का मतलब यह बिल्कुल भी नहीं कि आप भूखे प्यासे रहें, बल्कि इस मुबारक़ महीने में आपको सारे गिले शिक़वे भुला कर, समाज में दोस्ती और एकता क़ायम करने कि सलहा दी गयी है। यही नहीं इस पाख महीने में रोज़े दार किसी तरह का अश्लील या गलत काम करने से भी बचें। इसके साथ ही उन्हें ग़रीबों और जो बेसहारा हैं उनकी मदद करने को भी कहा गया है। रमजान के वक्त पेट में गैस बनने लगे तो करें ये उपाय

नामाज़ या सलाह नमाज फारसी शब्द है, जो उर्दू में अरबी शब्द सलात का पर्याय है। कुरान शरीफ में सलात शब्द बार-बार आया है और प्रत्येक मुसलमान स्त्री और पुरुष को नमाज पढ़ने का आदेश ताकीद के साथ दिया गया है। रमज़ान के मुबारक महीने रोज़े रखने के साथ, पांच बार की नमाज़ अदा करना भी जरुरी है। नमाज के मुताल्लिक उलैमा इकराम लिखते हैं कि, "हर नमाज ऐसे अदा करो जैसे कि यह तुम्हारी आखिरी नमाज हो।" इससे यह पता चलता है कि इस्लाम में नमाज़ का क्या महत्व है। इस्लाम में पांच वक्त की नमाज़ फर्ज़ है, यानि पांच बार नमाज़ पढ़ना जरूरी है।
नमाज़ इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है। नमाज़ जिंदगी में परहेज़गारी लाती है, यानि नमाज़ पढ़ने वाला कभी भी ग़लत और हराम काम नहीं कर सकता। जो मुस्लमान पांच बार कि नमाज़ पढ़ते हैं, ज़िंदगी में वह कभी किसी कि बुराई, किसी के गलत काम में उसका साथ और ऐसा कुछ नहीं बोलते हैं जिससे किसी का दिल दुखे। रमज़ान के दौरान रोज़े रखने का महत्व
इसके साथ ही नमाज़ अल्लाह से मांगने का ज़रिया है। इस माह रोज़े रख कर मुस्लमान अल्लाह की इबादद करते हैं और महीने के खत्म होने पर ईदुल फितर का त्योहार मनाते हैं। जिसमें परिवार के सभी लोग सुबह नमाज़ पढ़ कर अल्लाह का शुक्रिया करते हैं। और फिर अपने परिवार के साथ बड़ी ही धूम धाम से ईद का पर्व मानते हैं।



Click it and Unblock the Notifications
