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कितना भोजन कर सकते हैं पवनपुत्र हनुमान? इन दिलचस्प घटनाओं से जानें
प्रभु श्री राम के अनन्य भक्त के रूप में बजरंगबली का स्थान सर्वोपरि है। हनुमान जी को बल, बुद्धि और विद्या का देवता माना जाता है। लोगों की आस्था है कि कलयुग में संकटमोचन हनुमान ही हमारी रक्षा करते हैं। हिंदू धर्म में हनुमान ऐसे देव हैं जो बड़ों के साथ साथ बच्चों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। हनुमान जी से संबंधित कई ऐसी धार्मिक कहानियां हैं जो उनके गुणों को दर्शाती है और उनके भक्तों को हैरान भी कर देती है। आज हम ऐसी ही घटनाओं का जिक्र कर रहे हैं जिससे अंदाजा हो जाएगा कि आखिर हनुमान जी कितना भोजन करते थे।

जब हनुमान की भूख देख माता सीता पहुंची श्रीराम के पास
अगर आपने रामायण टीवी सीरियल देखा हो या रामायण पढ़ा हो तो एक घटना आपको याद होगी जिसमें माता सीता हनुमान जी को भोजन करा रही हैं। मगर हनुमान जी का पेट भरने का नाम ही नहीं ले रहा। माता सीता जितना परोसती हनुमान जी सब चट कर जाते और कहते "और परोसिये माता"। माता सीता भोजन देती गयीं और हनुमान जी खाते गए। फिर रसोई का सारा भोजन समाप्त हो गया। सीता माता बहुत असमंजस में पड़ गयीं कि अब क्या किया जाये। फिर माता सीता श्री राम के पास पहुचीं, उन्हें पूरी घटना सुनाई और सलाह मांगीं। प्रभु श्री राम हंस पड़े और फिर तुलसी का एक पत्ता देते हुए कहा कि जाओ और हनुमान को ये पत्ता खिला दो। माता सीता ने ऐसा ही किया। हनुमान का पेट तुरंत भर गया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि तुलसी में विष्णु का वास है और राम विष्णु के अवतार थे और हनुमान के आराध्य। इसलिए तुलसी का पत्ता खाते ही हनुमान तृप्त हो गए।

जितना बल उतना भोजन
पूरी रसोई का भोजन समाप्त करने के पश्चात भी पेट ना भरा हो तो आपको अंदाजा हो ही गया होगा की हनुमान कितना भोजन कर सकते थे। हनुमान को "अतुलित बलधामम" कहते हैं अर्थात जिसके पास अतुलनीय बल हो। अब जिसके पास अतुलित बल हो तो भोजन तो वो उसी अनुपात में ही करेंगे ना।

अशोक वाटिका के फल देख प्रसन्न हुए बजरंगबली
एक और बात याद कीजिये। जब हनुमान अशोक वाटिका में माँ सीता के पास गए तब उन्होंने यह नहीं कहा कि मुझे भूख लगी है बल्कि ये कहा कि -
" सुनहु मातु मोहि अतिसय भूखा।"
अतिसय का अर्थ होता अति से भी ज्यादा। बहुत ज्यादा भूखा। हनुमानजी का इशारा था कि वो तो जन्म से ही भुक्खड़ हैं क्योंकि बचपन में भूख लगने पर उन्होंने सूर्य देव को ही निगल लिया था। अशोक वाटिका में माता सीता से आज्ञा मिलने के बाद हनुमान जी ने अशोक वाटिका में कंद-मूल के पेड़ो का जो हाल किया वो तो आप जानते ही होंगे। हनुमान जी से ये शिक्षा मिलती है कि बड़ी से बड़ी भूख भी स्नेह से शांत हो जाती है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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