Latest Updates
-
Aja Ekadashi Vrat Katha: अजा एकादशी पर पढ़ें ये व्रत कथा, मिलेगा अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य -
Aja Ekadashi 2026: नारायण की कृपा...इन संदेशों के साथ अपने प्रियजनों को भेजें अजा एकादशी की शुभकामनाएं -
National Nutrition Week: प्रेग्नेंसी में जरूरी है सही न्यूट्रिशन, जानें गर्भावस्था में क्या खाएं-क्या न खाएं -
Aja Ekadashi 2026: कब है अजा एकादशी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि और पारण समय -
Teacher's Day 2026: 5 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है शिक्षक दिवस? जानिए क्या है इसका इतिहास और महत्व -
Teacher's Day 2026 Sanskrit Wishes: इन संस्कृत श्लोकोंं के जरिए गुरुजनों को भेजें शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं -
Teacher’s Day 2026 Wishes: गुरु का ज्ञान...इन संदेशों के साथ अपने टीचर्स को भेजें शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं -
Dahi Handi 2026: 5 या 6 सितंबर, कब है दही हांडी? जानें क्यों और कैसे मनाते हैं ये पर्व -
Janmashtami 2026: धन, प्रेम विवाह और संतान प्राप्ति के लिए जन्माष्टमी पर करें ये अचूक उपाय, पूरी होगी मनोकामना -
Happy Krishna Janmashtami 2026 Wishes: नंद के घर खुशियां आईं...जन्माष्टमी पर अपनों को भेजें ये शुभकामना संदेश
Jivitputrika Vrat 2020: पुत्र की लंबी आयु के लिए रखा जाता है जितिया व्रत, जानें तिथि एवं शुभ मुहूर्त
हिंदू कैलेंडर के मुताबिक हर साल आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जीवित्पुत्रिका व्रत किया जाता। साल 2020 में यह व्रत 10 सितंबर, गुरूवार के दिन रखा जाएगा। यह व्रत जीवित्पुत्रिका व्रत, जितिया, जिउतिया, जीमूत वाहन व्रत आदि नामों से जाना जाता है। इस व्रत का काफी महत्व है। माताएं जीवित्पुत्रिका व्रत अपनी संतान खासतौर से पुत्र की लंबी आयु और सुखमय जीवन के आशीर्वाद के लिए रखती हैं। जानते हैं इस साल जीवित्पुत्रिका व्रत से जुड़ी सभी जरूरी बातें।

जीवित्पुत्रिका व्रत की तिथि एवं पूजा मुहूर्त
आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का आरंभ 9 सितंबर (बुधवार) को दोपहर 01 बजकर 35 मिनट से होगा और 10 सितंबर (गुरुवार) के दिन 03 बजकर 04 मिनट तक रहेगा। व्रत का समय उदया तिथि में मान्य होगा, ऐसे में जीवित्पुत्रिका का व्रत 10 सिंतबर को रखा जाएगा।

पारण का समय
जीवित्पुत्रिका व्रत रखने वाली माताएं 11 सितंबर (शुक्रवार) की सुबह सूर्योदय के बाद से दोपहर 12 बजे तक पारण कर सकती हैं। इस अवधि में ही उन्हें पारण कर लेना चाहिए।

जीवित्पुत्रिका व्रत या जितिया व्रत का महत्व
जिस तरह से सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए तीज का व्रत करती हैं, उसी तरह जितिया व्रत पुत्र की दीर्घ आयु के लिए मां द्वारा रखा जाता है। संतान की मंगल कामना और सेहतमंद जीवन के लिए इस दिन मां निर्जला व्रत रखती हैं। यह व्रत तीन दिनों तक चलता है। संतान की सुरक्षा और सुखद भविष्य के लिए यह व्रत बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।



Click it and Unblock the Notifications
