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तो इस वजह से छठ पर महिलाएं लगाती हैं लंबा गाढ़ा पीला सिंदूर!

दिवाली के जश्न के बाद, उत्तर भारत में छठ पूजा की धूम शुरू हो जाती है। छठ को महाव्रत कहा जाता है जो चार दिनों तक चलता है और दुनिया के सबसे कठिन व्रतों में इसकी गिनती की जाती है। इस पूजा में महिलाएं अपने परिवार और सुहाग के लिए 36 घंटों का कठोर निर्जला व्रत रखती हैं।

यह हर साल दिवाली के छह दिनों के बाद कार्तिक महीने में मनाया जाता है। इस महापर्व का शुभारंभ नहाय खाय के साथ शुरू हो गया। इस व्रत के दौरान छठ के गीतों का भी अलग ही आनंद होता है।
इस व्रत की शक्ति को देखकर अब छठ पूजा को मानने वालों की संख्या में भी लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है। देश के जिन हिस्सों में यह पर्व मनाया जाता है वहां औरतें पूरी श्रद्धा के साथ इसका व्रत रखती हैं। छठ पूजा के दौरान महिलाएं माथे से लेकर मांग तक सिंदूर लगाए हुए दिखती हैं, जानते हैं इसका क्या महत्व है।

सिंदूर और सुहाग का रिश्ता
सभी जानते हैं कि सिंदूर का सुहाग से गहरा संबंध होता है। विवाह के समय एक वधू की मांग में सिंदूर भरने का रिवाज़ होता है जिसे विवाहिता आगे तक जारी रखती है। दरअसल सिंदूर सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। साथ ही ये विवाहित स्त्रियों का सबसे बड़ा श्रृंगार माना जाता है।

छठ पूजा के दौरान लगाया जाता है लंबा पीला सिंदूर
छठ पूजा कर रही औरतों को तो आपने देखा होगा। वो इस पावन पर्व के दौरान नाक से लेकर पूरे मांग तक सिंदूर भरती है। दरअसल महिलाएं भगवान सूर्य से अपने सुहाग और बेटे की रक्षा की कामना मांगने के लिए ये व्रत करती हैं। ये माना जाता है कि सिंदूर जितना लंबा होगा, पति की उम्र भी उतनी लंबी होगी और उनकी कामयाबी में भी वृद्धि होगी। ये व्रत रख कर स्त्रियां छठी मैया से परिवार की सुख और समृद्धि की दुआ मांगती हैं।
महिलाओं से जुड़े इस पर्व की खास बात ये है कि विधवा स्त्रियां भी ये व्रत अपने घर-परिवार की तरक्की और शांति के लिए रखती हैं।

इसलिए आप भी लगाएं गहरा सिंदूर
प्रचलित मान्यता के अनुसार ये कहा जाता है कि महिलाओं के मांग में सिंदूर लगाने के तरीके का असर पति पर पड़ता है। ऐसा माना जाता है कि यदि कोई विवाहिता मांग के सिंदूर को अपने बालों में छिपा लेती है, तो उसका पति भी समाज में छिप जाता है। अर्थात उसे समाज में मान सम्मान नहीं मिल पाता है। इस वजह से औरतों को कहा जाता है कि सिंदूर लंबा और ऐसा लगाएं जो सभी को नज़र में आए। महिला ने यदि बीच मांग में सिंदूर भरा और लंबा लगाया है तो उसके पति की उम्र लंबी होती है।

हर मनोकामना होती है पूरी
छठ के व्रत को काफी कठिन माना जाता है और इसमें किसी भी तरह की गलती की कोई गुंजाइश नहीं होती। घाट जाते समय दंडवत प्रणाम करने की प्रक्रिया भी खास होती है। इसमें भक्त भगवान सूर्य को नमस्कार करते हुए ज़मीन पर दंडवत लेटते हुए घर से नदी तक का सफर पूरा करते हैं। ये मान्यता है कि ऐसा करने से मन में मांगी हुई मुराद पूरी होती है और व्रत सफल होता है।



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