Latest Updates
-
किन 5 लोगों को नहीं पीना चाहिए नारियल पानी? फायदे की जगह हो सकता है गंभीर नुकसान -
International Nurses Day क्यों मनाते हैं? जानें निस्वार्थ सेवा की मूर्ति नर्सों के इस दिन का इतिहास -
Bada Mangal 2026: जय बजरंग बली! दूसरा बड़ा मंगल के शुभ अवसर पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
International Nurses Day 2026: सफेद वर्दी में छिपे फरिश्तों को कहें थैंक यू सिस्टर, भेजें ये संदेश -
Aaj Ka Rashifal 12 May 2026: मंगलवार को चमकेगा इन 4 राशियों का भाग्य, हनुमान जी की कृपा से बरसेगा धन -
दहेज के 87% मामलों के साथ बेंगलुरु बना नंबर-1; जानें Dowry Case में कितनी सजा और जुर्माने का है प्रावधान -
कोरोना के बाद अब हंतावायरस का बढ़ा खतरा; भारत भी हुआ अलर्ट, जानें कितनी जानलेवा है यह बीमारी और लक्षण -
क्या लड़कियों का भी होता है जनेऊ संस्कार? धुरंधर 2 एक्ट्रेस ने बताया क्यों सदियों पहले बंद हुई थी परंपरा -
Shani Jayanti 2026: 15 या 16 मई, कब मनाई जाएगी शनि जयंती? जानें सही तिथि और उपाय -
Mangal Gochar 2026: अपनी ही राशि में मंगल का गोचर; इन 4 राशि वालों पर मंडरा रहा है दुर्घटना' का साया
भगवान कृष्ण के जीवन से सीखें प्रेम के पाठ
भारत एक अनूठा देश है और यहां सभी धर्मों के लोग रहते हैं। इस देश की जनता स्वतंत्र रूप से अपने धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन कर सकती है।
भगवान कृष्ण को भगवान विष्णु का अवतार रूप माना जाता है। इनका उल्लेख हमें महाभारत में मिलता है, जोकि विश्व का सबसे लंबा महाकाव्य है। इस महाकाव्य में भगवान कृष्ण एक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं एवं इनकी लीलाओं को इस महाकाव्य की कहानी में देखा व सुना जा सकता है।
कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया ज्ञान आज भी भगवत गीता के रूप में मौजूद है। यह ज्ञान केवल जीने की कला ही नहीं सिखाता बल्कि मुश्किल से बाहर निकलने का मार्ग भी दिखता है।
भगवान कृष्ण को प्यार, सम्मान, मानवतावाद, बहादुरी एवं उनकी शासन कला के लिए पूजा जाता है। विष्णु को सृष्टि का पालनहार माना जाता है।
अतः उन्हें व उनके रूपों को सृष्टि के रक्षक के रूप में पूजा जाता है। युद्ध में अर्जुन दुविधा में पड जाता है और भगवान कृष्ण उन्हें सत्य के मार्ग पर चल कर अपनी जिम्मेदारियों को पूर्ण करने की राह दिखाते हैं।
भगवान कृष्ण अपने जीवन के भिन्न रिश्तों के साथ अलग भूमिकाओं को निभाते नज़र आते हैं। वे माता-पिता की ओर समर्पण, भाई का आदर, स्त्री का सम्मान व मित्रों के साथ प्रेम के भाव को व्यक्ति करते हैं। वे अपने किसी भी रिश्ते के साथ कोई भेदभाव नहीं करते हैं। बल्कि समानता व प्रेम के साथ हर रिश्ते को बांधते हैं।

1 माता पिता के लिए प्यार:
भले ही कृष्ण देवकी व वासुदेव के पुत्र कहलाए जाते हैं लेकिन उनका पाल-पोषन यशोदा व नंद ने किया था। भगवान कृष्ण ने देवकी व यशोदा दोनों को अपने जीवन में बराबर का स्थान दिया एवं दोनों की ओर अपने कर्तव्य का निर्वाह किया। इस तरह कृष्ण ने दुनिया को यह सिखाया कि हमें हमारा जीवन अपने माता-पिता कि सेवा में समर्पित करना चाहिए।

2 न्याय के लिए प्यार:
भगवान कृष्ण न्याय व प्रेम की प्रतिमा हैं। न्याय को स्थापित करने के लिए उन्होंने अपने मामा का वद किया। धर्म की स्थापना के लिए, महाभारत में कृष्ण ने पांडवों का साथ दिया। इस महायुद्ध में उनका मकसद केवल सच का साथ देना था।

3 मातृभूमि के लिए प्यार:
भगवान कृष्ण यादवों के राजा थे और पांडवों के संरक्षक। न्याय की प्रतिमा थे और ज्ञान के भंडार। भूमि पर बढते अन्याय को समाप्त करने के लिए कृष्ण धरती पर आए। इससे स्पष्ट है कि वे धरती मां से कितना प्यार करते हैं। महाभारत का युद्ध ना हो इसके लिए उन्होंने पांडवों की मांग को दुर्योधन के सामने रखा।

4 अपने शिक्षक के लिए प्यार:
भगवान विष्णु का अवतार रूप होने के बावजूद, कृष्ण के मन में अपने शिक्षकों व गुरुों के लिए बहुत सम्मान था। अपने अवतार रूप में वे जिन भी संतों से मिले उनका उन्होंने सम्मान किया।

5 अपनी प्रेमिका के लिए प्यार:
वृंदावन में कृष्ण ने राधा के साथ प्रेम लीला रचाई। केवल राधा ही कृष्ण की दीवानी नहीं थी बल्कि वृंदावन की कई गोपियां कृष्ण को मन ही मन अपना पति मान चुकी थी। वे राधा व गोपियों के साथ मिलकर रास लीला रचाते थे। कृष्ण केवल इनसे प्यार ही नहीं करते थे बल्कि इनका सम्मान भी करते थे।

6 मित्रों के लिए प्यार:
सुदामा, कृष्ण के बाल सखा थे। परंतु कृष्ण ने अपनी दोस्ती के बीच कभी धन व हैसियत को आने नहीं दिया। वे अर्जुन के भी बहुत अच्छे मित्र थे वहीं वे द्रौपदी के भी सखा थे। कृष्ण, दोस्ती का बहुत अच्छा उदाहरण हैं।

7 भाई के लिए प्यार
कृष्ण बुदिमान व शक्तिशाली दोनों थे। परंतु फिर भी उन्होंने कभी खुद को अपने बडे भाई बलराम से श्रेष्ठ नहीं समझा। बचपन में इन दोनों ने कई कठिनाइयों का सामना किया। जिस वजह से दोनों एक दूसरे की क्षमताओं से वाकिफ थे। कृष्ण अपने बडे भाई का आदर करते थे।



Click it and Unblock the Notifications