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Nirjala Ekadashi: श्रीहरि के क्रोध से बचने के लिए एकादशी के दिन न करें ये काम
ज्येष्ठ महीने की शिक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी अथवा भीमसेन एकादशी के नाम से जाना जाता है। एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित मानी गई हैं। स्कंद पुराण की मानें तो इस व्रत से साल की सभी एकादशियों के व्रत के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है। श्रीहरि का विशेष आशीर्वाद पाने के लिए एकादशी तिथि सर्वश्रेष्ठ बताई गई हैं। मगर इस दिन कुछ बातों का ख्याल रखना भी जरूरी है। इस लेख के माध्यम से जानते हैं एकादशी तिथि के दिन क्या काम करें और किन कामों को करने से बचें।

निर्जला एकादशी व्रत का महत्व
निर्जला एकादशी को अन्य एकादशी व्रतों से कठिन माना जाता है। इस व्रत में जातक को पानी की एक बूंद भी ग्रहण करने की मनाही होती है। यही वजह है कि इस व्रत का प्रभाव भी अधिक है। निर्जला एकादशी के दिन जो व्रती ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: का 108 बार जप करता है उसे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इस व्रत को करने से जातक के जीवन में चल रही समस्याओं का अंत होता है। साथ ही भगवान विष्णु का आशीर्वाद बना रहता है।

निर्जला एकादशी के दिन क्या करें
इस दिन सृष्टि के पालनकर्ता श्री हरि की विशेष पूजा करें। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। श्री राम रक्षा स्त्रोत का पाठ करवा सकते हैं। श्री रामचरित मानस के अर्ण्यकांण पाठ से भी लाभ मिलता है। भगवान श्रीकृष्ण की अराधना करें। माता, पिता और गुरु के साथ घर के बड़े सदस्यों का आशीर्वाद लें। इस दिन धार्मिक पुस्तकों का दान करना शुभ माना जाता है। आप जरूरी क्षेत्रों में प्याऊ की व्यवस्था करवा सकते हैं। गर्मी के मौसम में जानवरों के लिए भी पानी का इंतजाम करें।

निर्जला एकादशी के दिन क्या न करें
इस दिन जातक को चावल का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। इस दिन पान खाना भी वर्जित बताया गया है। एकादशी की रात को सोने की भी मनाही होती है। रात भर का समय भगवान विष्णु की भक्ति में बिताना चाहिए।
इस दिन जातको को क्रोध न करने की सलाह दी जाती है। न ही उन्हें किसी का अपमान करना चाहिए। मन में कटु भावना लेकर आराधना करने से भगवान विष्णु बिल्कुल प्रसन्न नहीं होंगे। मांसाहार और शराब के सेवन के बारे में विचार भी न करें।



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