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ओ-नामी की महान लहरें

ओ-नामी ने इस बात को महसूस किया और सोचा कि उसे एक जैन गुरू की मदद लेनी चाहिए। ओ-नामी ने एक जैन गुरू को देखा जो कि पास के छोटे मंदिर में ठहरे हुऐ थे उनका नाम हाकउजू था। ओ-नामी ने अपनी गुप्त समस्या, हाकउजू को बतायी। गुरू ने कहा- तुम्हारे नाम का अर्थ महान लहरें है तो इस मंदिर में ठहरो और कल्पना करो कि बड़ी- बड़ी लहरें सब कुछ निगल रही है तथा कोई भी बड़ा पहलवान नहीं है जो ड़रा हुआ न हो।
इसका पालन करो और तुम अपनी धरती पर सबसे महान पहलवान बन जाओगे। ओ-नामी, गुरू की सलाह मानकर अभ्यास के लिए बैठ गया। उसने सोचना शुरू किया कि वह विशाल लहर है। शुरूआत में यह सोचने पर उसका दिमाग घूम गया। धीरे-धीरे लहरों के बारे में सोचने और महसूस करने लगा। जैसे-जैसे रात गुजरती गई लहरें बढ़ती गई और फूलदानों के फूलों तक व बुद्धा की मूर्ति तक पॅहूच गई। जल्दी ही वह छोटा मंदिर एक बड़े समुद्र में था और बड़ी लहरें उफान मचाऐ हुए थी।



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