Latest Updates
-
दिल्ली में तेजी से बढ़ रहे स्वाइन फ्लू के मामले, जानें बच्चों में H1N1 के लक्षण और बचाव के उपाय -
53 की उम्र में दूल्हा बने अर्जुन रामपाल, गोवा में 14 साल छोटी गर्लफ्रेंड गैब्रिएला संग रचाई शादी -
IND vs SL 2nd Test: कोलंबो में सीरीज जीत की दहलीज पर भारत, बारिश और पिच का क्या है हाल? -
Varalakshmi Vrat Katha: वरलक्ष्मी व्रत के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, धन से जुड़ी बाधाएं होंगी दूर -
Varalakshmi Vrat 2026 Wishes: मां लक्ष्मी का आशीर्वाद...वरलक्ष्मी व्रत पर प्रियजनों को भेजें ये शुभकामना संदेश -
Rakhi Gift Ideas For Sister: इस रक्षाबंधन बहन को दें ये 7 प्यार भरे तोहफे, देखते ही खुशी से झूम उठेगी -
World Mosquito Day 2026: मच्छरों के काटने से हो सकती हैं ये खतरनाक बीमारियां, बचाव के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय -
पुरूषों को स्पर्म काउंट बढ़ाने के लिए खानी चाहिए ये 7 चीजें, फर्टिलिटी में होगा सुधार -
घर में अचानक कॉकरोच निकलना शुभ या अशुभ? जानें ज्योतिष और वास्तु के संकेत -
40 की उम्र में भी नजर आएंगी 20 की, हेल्दी और ग्लोइंग स्किन के लिए डाइट में शामिल करें ये 7 फूड्स
इस्लाम में मांसाहार के बारे में चौकानें वाले तथ्य
इस्लाम धर्म को लेकर आधुनिक समय में कई सैद्धान्तिक मतभेद हैं। इस्लाम धर्म के अनुयायियों का मानना है कि उनका धर्म बहुत सच्चा है लेकिन कई बार बात सार को समझने में समस्या होती है। इस आर्टिकल में हम आपको इस्लाम धर्म के एक पहलू के बारे में बात करेगें, जो उनके मांसाहार के बारे में विचार को दर्शाता है। इस्लाम धर्म में मांसाहार के बारे में कई चौकानें वाले तथ्यों को बयां किया गया है, जो आपको उनके मांसाहारी होने के नजरिए को परिवर्तित कर सकता है। आइए जानते है कुछ ऐसे ही तथ्यों के बारे में:
स्तनपान करवाने वाली महिलाएं कैसे रखें रोजे?

पैगम्बर शाकाहारी थे: आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि इस्लाम धर्म के पैगम्बर शाकाहारी थे, कहा जाता है कि जब पैगम्बर साहब मक्का-मदीना यात्रा पर गए थे, तो उन्होने वहां भी किसी जानवर की बलि नहीं दी थी। उनका मानना था कि किसी जीव के मृत शरीर से इंसान अपना खाली पेट कभी नहीं भर सकता है।

इस्लाम का आधिकारिक रंग हरा है: इस्लाम का आधिकारिक रंग हरा है जो शाकाहार का प्रतीक है, जो जानवरों को स्वतंत्र और फल व सब्जी खाने के लिए प्रेरित करता है। कुरान में भी वर्णन किया गया है कि जानवर, मानव की तरह ही होते हैं जिन्हे शोषित करना उचित नहीं है।
रमज़ान के दौरान रोज़े रखने का महत्व

अरब ने मांसाहार का बढावा दिया: अरब ने ही मांसाहार को बढावा दिया है, क्योंकि वहां के लोगों के पास भोजन के साधन सीमित थे और ऐसा भी कहा जाता है कि कई लोगों ने इसी वजह से इस्लाम को स्वीकार भी कर लिया था। वरना इस्लाम धर्म शाकाहार को ही समर्थन देता था।

पहले पशुओं की हत्या उचित नहीं मानी जाती थी: इस्लाम में पहले स्वाद के लिए पशुओं की हत्या उचित नहीं मानी जाती थी, उन्हे किसी भी खुशी के अवसर पर हलाल नहीं किया जाता था, लेकिन एक बार ऐसा होने के बाद यह उनके जलसे का हिस्सा बन गया और वह इसे मीट के नाम पर खाने लगे। हालांकि उनका धर्म भी पशु हत्या के पक्ष में नहीं है।



Click it and Unblock the Notifications