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जानें क्यों मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाई जाती है, पतंगबाजी के दौरान बरतें सावधानी
मकर संक्रांति का नाम सुनते ही आसमान में रंग बिरंगे उड़ते हुए पतंगों का दृश्य दिमाग में उकेर जाता है। सभी अपने घर की छतों पर पतंग उड़ाने के साथ तिल के व्यंजनों का मजा लेते हुए दिखाई देते हैं। पतंगबाजी की धूम चारों तरफ आराम से देखी जा सकती है। लेकिन इस पतंगबाजी के चलते कई हादसे भी हो जाते हैं, जिनके बारे में सोचकर ही पतंग उड़ानी चाहिए। इसलिए आज हम आपको कुछ बाते बताने जा रहे हैं, अगर आप पतंग उड़ाते समय इन बातों का ध्यान रखते हैं तो ये आपके और दूसरों के लिए भी हितकारी रहेगा। तो आइये जानते हैं उन बातों के बारे में।

गिरने का रहता है डर
पतंग बाजी करते समय उचित स्थान पर ही जाकर पतंग उड़ाए। किसी भी बिना मुंडेर की छत से पतंग न उड़ाएं क्योंकि पूरा ध्यान पतंग पर रहने के कारण छत से गिरने की संभावना हो सकती है।

कुछ भी चुभ सकता है
पतंग उड़ाते समय विशेष ध्यान रखे क्योंकि कई बार धागे में कांच के टुकड़े भी मौजूद होते हैं जो आपके लिए खतरनाक हो सकते हैं।

चायनीज डोर से बनाएं दूरी
पतंग खरीदते वक़्त ध्यान रखें कि चीन वाली डोर की बजाये सामान्य मांझा खरीदकर लाएं। जिससे आप तो सेफ रहेंगे ही पशु पक्षी भी सुरक्षित रहेंगे। अगर गलती से चाइना वाली डोर घर में आ भी गयी है तो उससे बच्चों को दूर ही रखे। क्योंकि ये आपके लिए खतरनाक हो सकती है। पतंग उड़ाने वाली डोर में नायनॉल का यूज होता है, जिस पर कांच का बुरादा चढ़ा होने के कारण यह लोगों और आसमान में उडऩे वाले पक्षियों के लिए खतरनाक हो सकता है।
मकर संक्रांति पर हजारों पक्षी तेज मांझों से कटकर घायल हो जाते हैं। पतंगों से बेजुबान परिंदों की जान न जाए इसलिए पर्यावरण का भी ध्यान रखें।

बिजली के खंभों से रहे दूर
पतंग कभी भी पावर लाइन या बड़े बिजली के खंभों के पास न उड़ाएं। क्योंकि अगर मांझा गीला है तो ये पावर लाइन के संपर्क में आ सकता है। ये जानलेवा हो सकता है। कई बार पतंग बिजली के तारों पर अटक जाती है। इसे निकालने के लिए अपनी जान जोखिम में न डालें क्योंकि खंभे से पतंग निकालने के चक्कर में आपको करंट भी लग सकता है। पतंग उड़ाने के दौरान फर्स्ट एड किट साथ रखें। कभी-कभी पतंग के मांझे से हाथ में कट लग जाता है। फर्स्ट एड साथ होगा, तो जल्द ही राहत मिलेगी।

रोड के साइड भी न उड़ाए
आपकी पतंग के मांझे से सड़क पर चल रहे बाइकर्स को भी जान से हाथ धोना पड़ सकता है। ऐसे में रोड और हाईवे पर पतंग बिल्कुल भी न उड़ाएं। वरना आपका शौक किसी की जान पर भारी पड़ सकता है।

आंखों का रखें ध्यान
पतंग उड़ाते समय आंखों का विशेष ख्याल रखें।दरअसल, पतंग उड़ाते समय सूर्य की सीधी रोशनी आंखों पर पड़ती है जो आंखों के लिए नुकसानदायक है। सनबर्न और डाइट से संबंधित परेशानी होना आम है। इसलिए बाहर का कोई भी फूड खाने से बचें। बेहतर होगा कि आप घर पर बने पकवान ही खाएं।

डोर न फेंके इधर-उधर
पतंग उड़ाते समय अगर उलझ जाती है तो उसे ज्यादा खींचने का प्रयास ना करें इसकी डोर से आप घायल हो सकते हैं। पतंगबाजी के बाद बचे हुए मांझे को इधर-उधर न फेंकें, नहीं तो यह अन्य लोगों के हाथ-पैरों या वाहन में उलझकर मुसीबत को निमंत्रण दे सकता है। बच्चों के लिए बेहतर होगा कि वे माता-पिता या किसी बड़े की निगरानी में ही पतंगबाजी करें।

माना जाता है शुभ
मकर सक्रांति के पर्व को बेहद पुण्य पर्व माना जाता है। कहा जाता है कि इस पर्व से ही शुभ कार्यों की शुरूआत होती है क्योंकि मकर संक्रांति के दिन से ही सूर्य उत्तर की ओर गमन करने लगता है। ऐसे में शुभता की शुरूआत का जश्न मनाने के लिए पतंग का सहारा लिया जाता है। घर में शुभता के आगमन की खुशी में मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की प्रथा है।

सेहत के लिए लाभदायक
मकर संक्रांति के पर्व पर पतंग उड़ाना सेहत के लिए विशेष रूप से लाभदायी माना गया है। हालांकि पतंग उड़ाने के पीछे कोई धार्मिक पक्ष नहीं है लेकिन फिर भी सेहत को देखते हुए इस दिन पतंग उड़ाना अच्छा माना जाता है। अमूमन सर्दी के मौसम में लोग अपने घरों में कम्बल में रहना पसंद करते हैं लेकिन उत्तरायण के दिन अगर कुछ देर धूप के संपर्क में रहा जाए तो इससे शरीर के कई रोग स्वतः ही नष्ट हो जाते हैं। वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार, उत्तरायण में सूर्य की गर्मी शीत के प्रकोप व शीत के कारण होने वाले रोगों को समाप्त करने की क्षमता रखती है। ऐसे में घर की छतों पर जब लोग पतंग उड़ाते हैं तो सूरज की किरणें एक औषधि की तरह काम करती हैं। शायद इसलिए मकर संक्रांति के दिन को पतंग उड़ाने का दिन भी कहा जाता है।



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