Latest Updates
-
‘रामायण’ के ट्रेलर लॉन्च के दौरान रणबीर कपूर की घड़ी क्यों हुई वायरल? कीमत सुन उड़ जाएंगे होश, जानें खासियत -
लंबे समय तक बैठे रहने से रीढ़ की हड्डी को पहुंचता है नुकसान, डॉक्टर ने बताया इतने घंटे में ब्रेक जरूरी -
Imran Khan Net Worth: भारत छोड़ने के आदेश के बाद इमरान खान की संपत्ति का क्या होगा? जानें कितनी है नेटवर्थ -
ग्रेटर नोएडा के इस गांव में आज भी होती है रावण की पूजा, दशहरे पर दहन बल्कि शोक मनाते हैं लोग -
Shardiya Navratri 2026 Day 6: नवरात्रि के छठे दिन करें मां कात्यायनी की पूजा, जानें विधि, मंत्र, भोग और आरती -
National Boss Day 2026 Wishes: कभी गाइड करते...बॉस डे पर अपने बॉस का दिल से कहें शुक्रिया, भेजें ये खास संदेश -
क्रिएटिनिन क्या होता है? जानें स्वस्थ किडनी के लिए क्रिएटिनिन का नॉर्मल लेवल कितना होना चाहिए -
Durga Puja Pandals in Delhi NCR: ये हैं दिल्ली-एनसीआर के टॉप 10 दुर्गा पूजा पंडाल, इस नवरात्रि जरूर करें दर्शन -
बारिश में बाल झड़ना कैसे रोकें: कारण, देखभाल और जरूरी पोषक तत्व -
Ashtami Navami 2026 Date: अष्टमी और नवमी कब है? जानें सही तिथि, कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त और महत्व
छठ पूजा और व्रत के वैज्ञानिक पहलू को नहीं जानते होंगे आप, चमत्कार है ये
हमारे देश में दीवाली के त्योहार के बाद सबसे बड़ा पर्व छठ पूजा के नाम से हिंदू धर्म के लोग मनाते है। वैसे तो इसको लेकर कई सारी मान्यताएं है। पर जो सबसे बड़ी मान्यता है वो है सूर्य और उसकी बहन को लेकर। छठ पर्व से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी है।
छठ के 4 दिनों के दौरान सूर्य उपासना आपको धन-धान्य और सेहत से मालामाल कर सकती है। इस चमत्कारी व्रत से जीवन के हर हिस्से में बेहतरी आती है। लेकिन छठ का नाता केवल धर्म से नहीं। इसके तमाम वैज्ञानिक पहलू भी हैं। इसीलिए इस महान पर्व का महत्व और भी बढ़ जाता है। कैसे? आइए जानते हैं।
कार्तिक मास में भगवान सूर्य की पूजा की परंपरा है, शुक्ल पक्ष में षष्ठी तिथि को इस पूजा का विशेष विधान है। छठ पूजा के तमाम वैज्ञानिक महत्व हैं। आइए जानते है इससे संबंधित सभी वैज्ञानिक पहलुओं के बारे में।

ऊर्जा को अवशोषित करता है व्रत
आपको शायद ये पता नहीं होगा कि जह हम छठ पूजा के दौरान व्रत रहते है तो उसके शरीर को इसकी ऊर्जा अवशोषित करते है।
इसी प्रक्रिया के जरिए प्राचीन भारत में ऋषि-मुनि बिना भोजन-पानी ग्रहण किए बिना कठोर तपस्या करने की ऊर्जा प्राप्त करते थे।


खगोलीय अवसर होता है
इस व्रत के दौरान ये पता चला है कि षष्ठी में पड़ने वाला ये व्रत खगोलीय होता है। इस दौरान जो सबसे बड़ी बात होती है वो ये होती है कि सूरज की पराबैगनी किरणें इस दौरान दोगुनी मात्रा में जमीन में पड़ती है। इस कारण ये व्रत रखने वाले के लिए बहुत फायदेमंद है।

शरीर निरोगी रहता है
आपको बता दें कि अस्ताचलगामी और उगते सूर्य को अर्घ्य देने के दौरान इसकी रोशनी के प्रभाव में आने से कोई चर्म रोग नहीं होता और इंसान निरोगी रहता है। इसलिए छठ पूजा के दौरान आपके ये काम करना बेहद जरूरी है।

सेहत सही रहती है
इस दौरान पूजा करने की वैज्ञानिक मान्यता ये है कि ऐसे में आपके शरीर को कोई बीमारियां नहीं परेशान करती है। ऐसे में आपको चाहिए कि आप रोज पूजा पाठ करें। ऐसा करना छठ के दौरान वैज्ञानिक दृष्टि से भी अच्छा है।

सूर्य की उपासना
ऐसा भी माना गया है कि वैज्ञानिक रूप से देखें तो इस माह में सूर्य उपासना से हम अपनी ऊर्जा और स्वास्थ्य का स्तर बेहतर बनाए रख सकते हैं। इसलिए इस दौरान आप सूर्य की भरपूर उपासना करें। ये आपके लिए ही ज्यादा अच्छा है। सूर्य भी इस दौरान आपके सेहत के लिए अच्छा प्रकाश निकालता है।

सूर्य का ताप कम हो जाता है
आपको बता दें कि ऐसा माना जाता है कि दीवाली के दियों से सर्दियां बिखर जाती है और दीपावली के बाद सूर्यदेव का ताप पृथ्वी पर कम पहुंचता है। इसलिए व्रत के साथ सूर्य के ताप के माध्यम से ऊर्जा का संचय किया जाता है, ताकि शरीर सर्दी में स्वस्थ रहे। इस दौरान सूर्य की रोशनी किसी अमृत से कम नहीं होती है।

सर्दी में होते है ये बदलाव
आपको बता दे कि जैसे ही सर्दी आती है तो कई तरह के बदलाव देखने को मिलते है। आपको बता दें इस दौरान षष्ठी का व्रत रखना आपके लिए बहुत ज्यादा लाभ दायक होता है। इस व्रत को रहने से आपके शरीर से कई बीमारियां बाहर निकल जाती है।



Click it and Unblock the Notifications
