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नवरात्रि उपवास के दौरान क्यूं वर्जित होता है अन्न का सेवन?
नवरात्रि क्या है?
भारत में हिंदू धर्म में सबसे पवित्र त्यौहारों में से एक त्यौहार, नवरात्रि माना जाता है। इस त्यौहार को साल में दो बार, नौ-नौ दिनों के लिए मनाया जाता है।
इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस त्यौहार के दौरान, हिंदू धर्म के अनुयायी सात्विकता को प्राथमिकता देते हुए उपासना करते हैं।
नवरात्रि के नियम
हिंदू धर्म के अन्य त्यौहारों की नवरात्रि में भी पूजा की जाती है लेकिन इन 9 दिनों में काफी सख्त नियमों का पालन किया जाता है। पूजा के दिनों में किसी भी प्रकार का अन्न का सेवन नहीं किया जाता है, अगर किसी व्यक्ति ने उपवास रखा है। साथ ही इन दिनों सभी हिंदू घरों में शराब, प्याज, मीट, मांस आदि का सेवन भी वर्जित होता है।

नवरात्रि के दिनों में क्या खाएं?
जिन परिवारों में देवी मां की स्थापना की जाती है उन घरों में हर दिन बनने वाला भोजन उपवास वाला होता है। कई लोग समय न होने के कारण या अन्य बातों को ध्यान में रखते हुए सिर्फ पहले और आखिरी दिन ही उपवास रखते हैं। ऐसे में वह अपने लिए किचेन को साफ करने के बाद उपवास वाला भोजन जैसे- साबूदाना, कुट्टू के आटे की पूड़ी आदि बनाते हैं। लेकिन इन दिनों में रोटी या परांठे खाना मना होता है। लेकिन ऐसा क्यों होता है - ऐसा करना सिर्फ अंधभक्ति है या इसके पीछे कोई कारण भी होता है। हिंदू धर्म के तर्क के अनुसार इसकी निम्न वजह होती है:

अन्न न खाने का कारण:
नवरात्रि के दौरान अन्न न खाने के दो कारण होते हैं - धार्मिक और तार्किक। कहा जाता है कि नौ दिन तक अन्न न खाने से मेटाबोल्जिम सही हो जाता है और वर्ष भर पेट सम्बंधी समस्याएं नहीं होती हैं। आधुनिक समय में लोग डायटिंग के हिसाब नौ दिन अन्न का सेवन करना पसंद नहीं करते हैं। धर्म में अति आस्था रखने वाले लोग भयवश भोजन नहीं करते हैं।

नवरात्रि व्रत का धार्मिक विश्वास:
भारतीय त्यौहारों में नवरात्रि के दौरान उपवास रखना महत्वपूर्ण रस्म होती है। इसे काफी गंभीरता से लिया जाता है। लोग इन दिनों पूरी सात्विकता से इसका पालन करते हैं और स्वयं को सकारात्मकता से भरने का प्रयास करते हैं। ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से आत्मा की शुद्धि हो जाती है और इच्छा शक्ति दृढ़ हो जाती है।

वैज्ञानिक तथ्य:
नवरात्रि का पर्व, बदलते मौसम में पड़ता है, उन दिनों खान-पान की वजह से अक्सर बीमारियां हो जाती है। इसलिए इन दिनों तक संतुलित आहार लेने से शरीर के पाचन में कोई गड़बड़ी नहीं होती है और शरीर को नए मौसम की आदत हो जाती है।

आयुर्वेदिक तथ्य:
आयुर्वेदिक तथ्यों के अनुसार, शराब, मांस, अन्न, लहसून या प्याज आदि का सेवन शरीर में नकारात्मकता पैदा करता है जो बदलते मौसम में हानिकारक साबित हो सकता है। ऐसे में शरीर को बदलते मौसम के प्रभाव से बचाने के लिए नौ दिन का उपवास सही रहता है इससे शरीर की प्रतिरक्षा क्षमता में इजाफ़ा होता है।

शरीर को राहत मिले :
लम्बे समय से एक ही तरीके से शरीर की प्रक्रिया होने के कारण, उपापचय में समस्या हो सकती है ऐसे में नौ दिन के उपवास से शरीर को काफी राहत मिलती है।

शरीर की विषाक्तता समाप्त होना:
नवरात्रि के दिनों में नौ दिन तक सात्विक भोजन करने से शरीर की विषाक्तता समाप्त हो जाती है, सेंधा नमक के सेवन से भी शरीर को काफी मिलता है। गेंहू के आटे की बजाय कुट्टु या सिंघाडे के आटे की पूडी खाने से शरीर को लाभ मिलता है।

मन को संतोष:
नवरात्रि के दिनों में आप स्वयं को काफी सरल बनाएं रखने का प्रयास करते हैं ऐसे में मन को काफी संतोष मिलता है और व्यक्ति में सकारात्मकता का संचार हो जाता है।



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