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Yashoda Jayanti 2022: ममता की पर्याय माता यशोदा जयंती पर जरूर पढ़ें ये कथा
श्री कृष्ण की माता यशोदा सदियों से ममता की आदर्श मानी जाती रहीं हैं। उन्होंने कृष्ण को जन्म ना देते हुए भी पूरी ममता, त्याग और श्रद्धा से उनका लालन पालन किया। हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी को माता यशोदा की जयंती का शुभ अवसर होता है। इस वर्ष यशोदा जयंती 22 फरवरी को है। इस उपलक्ष पर माता यशोदा की उपासना करके जीवन में सौभाग्य और संतान का सुख प्राप्त होता है। चलिए जानते हैं यशोदा माता की कथा और उनके पूजन के बारें में महत्वपूर्ण बातें-

यशोदा जयंती का महत्व
इस शुभ अवसर पर सच्ची श्रद्धा से यशोदा माता और श्री कृष्ण की उपासना करने से जीवन में संतान प्राप्ति का सुख मिलता है। इसके साथ ही कई अधूरी मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं। यशोदा जयंती पर व्रत रखने और ज़रुरतमंदों बच्चों को खाना खिलाने से संतान की सेहत अच्छी रहती है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु और उन्नति की कामना के लिए पूजा-पाठ व व्रत करती हैं।

माता यशोदा की कथा
धार्मिक मान्यता के अनुसार ब्रज के गोपाल सुमुख और उनकी पत्नी के घर भगवान ब्रम्हा के आशीर्वाद से माता यशोदा का जन्म हुआ था। उनका विवाह ब्रज के राजा नन्द से हुआ। माता यशोदा ने भगवान विष्णु से आग्रह किया था कि वे उनकी संतान बनकर जन्म लें। तब विष्णु ने उनको वचन दिया था कि वे द्वापरयुग में उनके पुत्र बनकर आयेंगे। द्वापरयुग में विष्णु के अवतार श्री कृष्ण ने भले ही माता देवकी की कोख से जन्म लिया परन्तु उनका लालन पालन ब्रज में यशोदा माता की छांव में ही हुआ।

पूजन विधि और उपाय
यशोदा जयंती के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर, स्नान करके साफ़ वस्त्र धारण करें। लकड़ी की चौकी लेकर उसपर गंगाजल छिड़कर शुद्ध करें और फिर उसपर लाल कपड़ा बिछाएं। फिर उस चौकी के एक तरफ कलश स्थापित करें। वहीं दूसरी तरफ माता यशोदा की मूर्ति या तस्वीर रखें। माता यशोदा को लाल चुनरी, माला, कुमकुम आदि से सजाएं और फूल अर्पित करके उनकी आरती करें। इसके बाद माता का ध्यान लगायें और सच्चे मन से माता यशोदा और श्री कृष्ण की अराधना करें। इसके बाद माता यशोदा की कथा सुनें और अंत में उन्हें मीठे रोठ का भोग लगाएं। श्री कृष्ण को भी माखन और पंजीरी का भोग लगाएं।
इस दिन गाय को अवश्य खाना खिलाएं और दान पुण्य का कार्य करें। यशोदा जयंती के दिन घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक या फिर ॐ बनाने से नकारात्मक ऊर्जा से छुटकारा मिलता है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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