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Vat Purnima Vrat In Periods: वट पूर्णिमा पर आ गयी पीरियड्स की डेट! जानें कैसे रखें ये व्रत
Periods Me Vat Purnima Vrat Kaise Kare: वट पूर्णिमा व्रत में विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और खुशहाली के लिए प्रार्थना करती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार देवी सावित्री को महासती के रूप में पूजा जाता है और वट वृक्ष मृत्यु के देवता यमराज का प्रतीक है।
वट पूर्णिमा का व्रत पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा तिथि को आता है। सुहागिन महिलाओं के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण दिन है। हालांकि, उन्हें अक्सर अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है कि उनका मासिक धर्म कब शुरू होगा। इससे यह भ्रम होता है कि मासिक धर्म के दौरान व्रत रखना चाहिए या नहीं।

ऐसे में यह समझना बहुत ज़रूरी है कि मासिक धर्म एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। इसे शुभ या अशुभ नहीं माना जाना चाहिए। पीरियड्स के दौरान वट पूर्णिमा का व्रत रखना एक संवेदनशील विषय है, और विभिन्न परिवारों और परंपराओं में इसे लेकर अलग-अलग मान्यताएँ हो सकती हैं।
कुछ परंपराओं में महिलाएं पीरियड्स के दौरान धार्मिक अनुष्ठान और व्रत से दूर रहती हैं, जबकि अन्य में कुछ नियमों के साथ व्रत रखा जा सकता है। यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं जो मददगार हो सकते हैं। तो आइये जानते हैं पीरियड चल रहे हों तो वट पूर्णिमा का व्रत रखना कितना सही है।
वट पूर्णिमा व्रत 2024 (Vat Purnima Vrat 2024)
वट सावित्री पूर्णिमा शुक्रवार, जून 21, 2024 को
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ - जून 21, 2024 को 07:31 ए एम बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त - जून 22, 2024 को 06:37 ए एम बजे
अगर आपने व्रत की तैयारी कर ली है और आप मासिक धर्म से गुजर रही हैं, तो व्रत को सही तरीके से करने के लिए इन खास नियमों का पालन करें। इन दिशा-निर्देशों का पालन करके आप वट पूर्णिमा व्रत का पूरा लाभ प्राप्त कर सकती हैं।
पीरियड्स में वट पूर्णिमा व्रत कैसे करें (Periods Me Vat Savitri Ka Vrat Kaise Kare)
* अगर कोई विवाहित महिला पहली बार वट सावित्री व्रत रख रही है और उसके मासिक धर्म शुरू हो गए हैं, तो उन्हें व्रत शुरू न करने की सलाह दी जाती है। आपके लिए यही उचित होगा कि इतना पावन व्रत आप सही तरीके, शुभता और मन में बिना किसी संशय के साथ करें। इसके लिए आप अगले वर्ष आने वाले व्रत का इंतजार कर सकती हैं।
* अगर आप पहले भी वट पूर्णिमा का व्रत कर चुकी हैं और इस बार मासिक धर्म चल रहा है, तो व्रत के दिन अपने बाल धो लें और स्नान करें। आप किसी भी पूजा सामग्री को न छुएं। आप ऐसी स्थिति में अपनी ओर से किसी दूसरी महिला से पूजा करवा सकती हैं। वट सावित्री व्रत की कथा सुनना इस पर्व का अभिन्न हिस्सा है। आप दूर बैठकर व्रत कथा सुन सकती हैं। इससे अनुष्ठान की पवित्रता बनी रहती है और आप भी इसमें भाग ले पाते हैं। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति के पैर धोती हैं। आप किसी दूसरी महिला द्वारा की गई पूजा के बाद बचे पानी से भी ऐसा कर सकते हैं। आप उन्हें रक्षा सूत्र भी बांध सकते हैं और तिलक भी लगा सकते हैं, लेकिन अन्य पूजा सामग्री को छूने से बचें।
* यदि आपके पीरियड्स का पांचवा दिन है तो आप स्नान करने के पश्चात् सावित्री माता की पूजा कर सकती हैं। लेकिन पूजा सामग्री को हाथ लगाने से बचें /इससे यह सुनिश्चित होता है कि अनुष्ठान सही तरीके से हो रहा है।
* वट पूर्णिमा की पूजा में बरगद के पेड़ की पूजा करने का नियम है। ऐसी मान्यता है कि वट वृक्ष में त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) का वास होता है। जब तक आपका मासिक धर्म पूरी तरह से खत्म न हो जाए, तब तक इस पेड़ को न छुएं।
* इस दौरान आप अपने शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें। पीरियड्स के दौरान शरीर कमजोर हो सकता है, इसलिए अपनी सेहत का ख्याल रखते हुए व्रत रखें।
* यदि आपके परिवार की परंपरा में पीरियड्स के दौरान पूजा न करने की सलाह दी जाती है, तो आप अपने घर के एक अलग स्थान पर या मानसिक रूप से पूजा कर सकती हैं। शारीरिक पूजा की बजाय मानसिक पूजा पर ध्यान दें। मन में वट वृक्ष का ध्यान करें और मन ही मन पूजा के मंत्रों का उच्चारण करें।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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