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Vinayak Chaturthi 2023: विनायक चतुर्थी आज, सुख-समृद्धि के लिए करें इन मंत्रों का जाप
चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। 25 मार्च को चैत्र नवरात्रों की चतुर्थी तिथि के साथ साथ विनायक चतुर्थी भी पड़ेगी।
इस दिन माता रानी के साथ साथ विघ्नकर्ता विनायक गणेश की स्तुति और व्रत का पालन किया जाएगा। विनायक चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की उपासना से हर कार्य में सफलता मिलती है, बल एवं बुद्धि का आशीर्वाद मिलता है। इसके साथ ही जीवन में आ रही समस्याओं और विघ्नों से छुटकारा मिलता है।

जानते हैं विनायक चतुर्थी के शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और गणेश मन्त्र के बारे में -
विनायक चतुर्थी 2023 शुभ मुहूर्त
विनायक चतुर्थी तिथि की शुरुआत 24 मार्च को शाम 04:59 बजे होगी और समापन 25 मार्च को शाम 04:23 बजे होगी। उदया तिथि को मानते हुए 25 मार्च को विनायक चतुर्थी मनाई जाएगी।
गणपति पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:14 बजे से दिन के 01:41 बजे तक रहेगा।
भद्रा का रहेगा साया
चतुर्थी के दिन भद्रा का साया रहने वाला है। सुबह 04:35 बजे से शाम के 04:23 बजे तक भद्रा काल रहने वाला है। इस समय भद्रा स्वर्ग लोक का भ्रमण करने वाली है, पृथ्वी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। परन्तु भद्रा काल में कोई भी मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए। गणेश पूजन किया जा सकता है।

विनायक चतुर्थी 2023 पूजा विधि
गणेश प्रतिमा को स्थापित करके उनके आगे दीपक प्रज्वलित करना चाहिए। इसके बाद गणपति पूजा करनी चाहिए जिसमें सिन्दूर ज़रूर रखें। गौरी पुत्र गणपति को लाल सिन्दूर का तिलक लगायें और ये मन्त्र पढ़ें - "सिन्दूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम्। शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम्॥" स्वयं भी इस सिन्दूर से तिलक लगायें। इसके बाद भगवान् गणेश को दुर्वा सहित गुड़ की 21 गोलियां भोग में चढ़ाएं। इसके साथ ही लाल रंग का गुड़हल फूल भी पूजा में अर्पित करें जो भगवान गणेश को प्रिय है।
विनायक चतुर्थी के दिन चन्द्र दर्शन बिलकुल न करें। धार्मिक मान्यता अनुसार विनायक चतुर्थी के दिन चन्द्र पर मणि चुराने के आरोप लगें। इसलिए इस दिन चन्द्रमा के दर्शन नहीं किये जाते हैं।

गणेश मन्त्र
वक्रतुंड महाकाय, सूर्य कोटि समप्रभ:। निर्विघ्नं कुरु मे देव शुभ कार्येषु सर्वदा ।।
गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारु भक्षणम्ं। उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम् ।।
पार्वतीनन्दनं शम्भोरानन्दपरिवर्धनम् । भक्तानन्दकरं नित्यं मयूरेशं नमाम्यहम् ।।
सर्वाज्ञाननिहन्तारं सर्वज्ञानकरं शुचिम् । सत्यज्ञानमयं सत्यं मयूरेशं नमाम्यहम् ।।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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