Latest Updates
-
Women's Day Special: 30 की उम्र के बाद महिलाएं फॉलो करें ये हेल्थ टिप्स, कई बीमारियों से होगा बचाव -
Rang Panchami 2026: रंग पंचमी पर कर लिए ये अचूक उपाय तो चमक जाएगी किस्मत, वैवाहिक जीवन रहेगा खुशहाल -
8 मार्च को ही क्यों मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस? जानें इस दिन का इतिहास और इस साल की थीम -
Rang Panchami 2026: कब है रंग पंचमी? जानें तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व -
पेट के कैंसर के शुरुआती स्टेज में दिखाई देते हैं ये 5 लक्षण, ज्यादातर लोग साधारण समझकर करते हैं इग्नोर -
Bhalchandra Sankashti Chaturthi Katha: भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, दूर होगी हर परेशानी -
Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026: 6 या 7 मार्च, कब है भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी? जानें शुभ मुहूर्त, महत्व औ -
वरमाला डालते ही अर्जुन ने सानिया चंडोक को लगाया गले, सचिन तेंदुलकर का ऐसा था रिएक्शन, वीडियो वायरल -
बिग बॉस 17 फेम यूट्यूबर अनुराग डोभाल ने की सुसाइड की कोशिश, इंटरकास्ट शादी को लेकर परिवार पर लगाए गंभीर आरोप -
प्रेग्नेंसी में कटहल खाना चाहिए या नहीं? डाइट में शामिल करने से पहले जान लें इसके फायदे-नुकसान
100 रु के वेतन पर करते रहे राम लला की पूजा, जानिये अयोध्या राम मंदिर के पुजारी के बारे में दिलचस्प जानकारी
Ayodhya Ram Mandir Pujari: अयोध्या स्थित राम लाला की जन्मभूमि काफी अरसे तक विवादों के घेर में रही। इस पवित्र स्थल ने कई ऋतु बदलते देखे, भक्ति देखी और रक्तरंजित इतिहास का भी गवाह बना।
बाबरी मस्जिद के विध्वंस से लेकर सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय आने तक, काफी कुछ बदला लेकिन एक व्यक्ति जो शांति से अपना कर्म करता रहा, राम लाला की पूजा अर्चना करता रहा और राम मंदिर के धार्मिक, राजनितिक और न्यायिक गलियारे में उपस्थिति का गवाह रहा उसका अटूट विश्वास था कि एक दिन मंदिर जरुर बनेगा, उस व्यक्ति को मंदिर का पुजारी नियुक्त कर दिया गया। ये पुजारी हैं आचार्य सत्येंद्र दास। आइये इस पुजारी के बारे में जाने कुछ रोचक जानकारी।

जानें कौन हैं राम लला की पूजा करने वाले मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास
उस समय के विवादित राम मंदिर जन्मभूमि के रिसीवर ने आचार्य सत्येन्द्र दास को 5 मार्च 1992 को पुजारी के तौर पर नियुक्त कर दिया था। इसके नौ महीने के बाद बाबरी मस्जिद को भीड़ ने तोड़ दिया। भयावह दंगे हुए, कई लोगों की जान चली गयी लेकिन निडर पुजारी आचार्य सत्येन्द्र दास ने अपनी पूजा जारी रखी। तब से लेकर आजतक ये नियमित रूप से पुजारी के तौर पर कार्यरत रहे।

पुजारी बनने से पहले आचार्य दास एक अध्यापक थे। जीवन में मोड़ आया और ये पुजारी बन गए। इसकी कहानी भी रोचक है। दास बचपन से ही अपने पिता के साथ अयोध्या जाया करते थे। उन दिनों यानी 1949 में कुछ वैरागियों ने विवादित स्थल पर रामलला की प्रतिमा स्थापित कर दी। इन वैरागियों में से एक थे अभिराम दास। जब आचार्य दास अभिराम के संपर्क में आये तो प्रभावित होकर साधू बनने के इच्छुक हो गए। लेकिन ये अपनी पढ़ाई भी जारी रखना चाहते थे। इनकी भावना का सम्मान करते हुए इनके पिता ने इनको साधू बनने के लिए स्वतंत्र कर दिया। फिर इन्होने आचार्य की डिग्री ली और अध्यापक बन गए। आगे चलकर राम लला स्थल पर पूजा पाठ के लिए पुजारी के तौर पर नियुक्त कर दिए गए।

जब आचार्य दास की पुजारी के तौर पर नियुक्ति हुई तो उस समय उनका वेतन 100 रुपये महीने था। लेकिन इतने कम वेतन से भी दास को कोई फर्क नहीं पड़ा क्यूंकि ये अध्यापक की नौकरी करते रहे। अब इनकी तनख्वाह 13 हजार रुपये कर दी गयी है। एक साधू से अध्यापक और फिर राम मंदिर का पुजारी बनने की इनकी कहानी काफी प्रेरणादायक है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications











