Yashoda Jayanti 2024: संतान की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है यशोदा जयंती व्रत, नोट करें तिथि व पूजा विधि

Yashoda Jayanti 2024 Kab Hai: पंचांग के अनुसार फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को यशोदा जयंती मनाई जाती है। 2024 में यशोदा जयंती 1 मार्च दिन शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन दुनिया के अलग अलग हिस्सों में मौजूद इस्कॉन मंदिरो तथा अन्य कृष्ण मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ पहुंचती है।

यशोदा जयंती भगवान श्री कृष्णा के माता यशोदा के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन माताएं अपने संतान की लंबी उम्र तथा खुशहाली के लिए व्रत रखकर भगवान श्रीकृष्ण और माता यशौदा के प्रार्थना करती हैं। यह त्यौहार उत्तरप्रदेश में काफी लोकप्रिय है। साथ ही यह गुजरात, महाराष्ट्र तथा दक्षिण भारतीय राज्यों में भी प्रचलित है। ऐसे में आइए जानते हैं यशोदा जयंती 2024 का शुभ मुहूर्त, महत्व तथा पूजा विधि।

Yashoda Jayanti 2024 Kab Hai: Date, Shubh Muhurat, Puja Vidhi and Significance in Hindi

यशोदा जयंती का महत्व (Yashoda Jayanti 2024 Significance)

यशोदा जयंती मां और उसके संतान के प्रेम व स्नेह संबंध को दर्शाता है। यह दिन माताओं के लिए बहुत ही खास होता है। यशोदा जयंती के दिन माता अपने बच्चों के लिए उपवास रखकर उसके लंबे उम्र तथा खुशी के लिए भगवान श्री कृष्णा तथा माता यशोदा से प्रार्थना करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यशोदा जयंती के शुभ अवसर पर माता यशोदा के साथ बाल स्वरूप भगवान श्री कृष्ण का पूजन किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से संतान की इच्छा पूर्ति होती है और संतान के जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती है।

यशोदा जयंती की पूजा विधि (Yashoda Jayanti Puja Vidhi)

• यशोदा जयंती के दिन सर्वप्रथम सूर्योदय से पहले उठे और ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके माता यशोदा का ध्यान करें।

• उसके बाद पूजा के लिए माता यशोदा के गोद में श्री कृष्ण कन्हैया की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।

• अगर माता यशोदा की तस्वीर का अभाव है तो उनके नाम से भगवान श्री कृष्ण को ध्यान लगाकर उनके ही समक्ष दीपक जलाएं।

• माता यशोदा को उसके जन्म जयंती पर लाल चुनरी के साथ श्रृंगार सामान जरुर चढ़ाएं।

• माता यशोदा को मिठाई तथा भगवान श्री कृष्ण को मक्खन का भोग लगाएं।

• इसके बाद सच्ची श्रद्धा और निष्ठा से मंत्र उच्चारण के साथ माता यशोदा और भगवान श्री कृष्ण की आरती करें। उसके पश्चात गायत्री मंत्र का जाप करें।

• विधि विधान से पूजा समाप्ति होने के पश्चात माता यशोदा तथा भगवान श्री कृष्ण से प्रार्थना करें और आपकी सारी मनोकामनाएं भगवान श्री कृष्ण के समक्ष रखें। कुछ समय में आपको प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

Story first published: Wednesday, February 28, 2024, 16:40 [IST]
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