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भगवान जगन्नाथ की बाहुड़ा यात्रा(2013) की तस्वीरें
भुवनेश्व में ओडिशा के पुरी में शुरू हुए भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा महोत्सव का आज अंतिम दिन है। हर साल में यह रथ यात्रा एक बार निकाली जाती है, जो कि बरसात के महीने में यानी आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को जगन्नाथपुरी में आरंभ होती है। यह रथयात्रा पुरी का प्रधान पर्व भी है। इसमें भाग लेने के लिए, इसके दर्शन लाभ के लिए हज़ारों, लाखों की संख्या में बाल, वृद्ध, युवा, नारी देश के सुदूर प्रांतों से आते हैं और पर्व में भाग लेते हैं। तीन मूर्तियों, जमन्नाथपुरी, बालभद्रा और सुभद्रा को गुंडीचा मंदिर तक रथ में ले कर ले जाया जाता है और उसके बाद दुबारा उन्हें वापस उसी रथ पर बिठा कर लाया जाता है। इसे रथ यात्रा कहा जाता है।
9 दिनों तक कुंडीचा मंदिर में रखने के बाद तीनों मूर्तियों को रथ दृारा पुरी जगन्नाथ मंदिर दुबारा लाया जाता है। जब भगवान दुबारा मंदिर वापस लाये जाते हैं तब इसको बाहुड़ा यात्रा कहा जाता है। आज पुरी में 18 जुलाई, 2013 को बहुदा यात्रा मनाई जा रही है। यह वह दिन है जब तीनों भाई-बहन यानी की भगवान कृष्ण, बलराम और सुभद्रा माता अपनी मौसी के घर ठहर कर आते हैं। रथयात्रा में सबसे आगे ताल ध्वज पर श्री बलराम, उसके पीछे पद्म ध्वज रथ पर माता सुभद्रा व सुदर्शन चक्र और अंत में गरुण ध्वज पर या नंदीघोष नाम के रथ पर श्री जगन्नाथ जी सबसे पीछे चलते हैं।
भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के लिए रथों का निर्माण लकड़ियों से होता है। इसमें कोई भी कील या काँटा, किसी भी धातु को नहीं लगाया जाता। पुरी में ढेर सारी पुलिस के बीच करोड़ों तीर्थयात्री सुबह से ही जमघट लगाए हुए हैं। हर किसी को भगवान जगन्नाथ पुरी का आर्शीवाद चाहिये। आइये इसी बहुदा यात्रा को हम देखते हैं तस्वीरों के जरिये-

बाहुड़ा रथ यात्रा
ये तीन रथ हैं जो कि अब दुबारा कुंडीचा मंदिर से निकल कर वापस पुरी जाएंगे।

तीर्थयात्रियों की भीड़
आप देख सकते हैं कि गुंडीचा मंदिर के सामने लोग कितनी बेसब्री से बहुदा यात्रा शुरु होने का का इंतजार कर रहे हैं। स्कंद पुराण में स्पष्ट कहा गया है कि रथ-यात्रा में जो व्यक्ति श्री जगन्नाथ जी के नाम का कीर्तन करता हुआ गुंडीचा नगर तक जाता है वह पुनर्जन्म से मुक्त हो जाता है।

गुंडीचा मंदिर
गंडीचा मंदिर को फूलों से सजाया गया है और पुलिस तथा तीर्थयात्रियों की भीड़ तो बस देखते ही बन रही है।

भगवान जगन्नाथ का रथ
भगवान जगन्नाथ का रथ लाल और पीले फूलों से सजाया गया है और मंदिर के बीचों बीच में जगन्नाथ जी को स्थापित किया जाएगा।

भगवान बलराम का रथ
ये है कृष्ण जी के बड़े भाई भगवान बलराम का का रथ।

तीर्थयात्रियों मे खुशी का मंजर
पंडा और भीड़ एक साथ इस यात्रा में भाग लेते हुए। कहते

तीन खूबसूरत रथ
तीनों ही रथ बडे़ विशाल हैं, यही वे रथ हैं जिन्हें खींच कर पुरी के मंदिर में ले जाया जाएगा।

भगवान बलराम
पंडितों दृारा भगवान बलराम को खीच कर रथ में रखा जा रहा है, यह बहुत ही कठिन कार्य है।

भगवान बलराम को दुबारा गुंडीचा मंदिर ले जाते हुए
बलराम को रथ से निकाल कर दुबारा गुंडीचा मंदिर में रखे जाने का प्रयास हो रहा है।

सुभद्रा की मूर्ती निकालते हुए
सुभद्रा को रथ से निकाला जा रहा है

भगवान जगन्नाथ
लकड़ी के भगवान जगन्नाथ को पंडित रथ से निकाल कर मंदिर में ले जाने का प्रयास कर रहे हैं।



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