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क्यूं मनाई जाती है अक्षय तृतीया?
हिन्दुओं में अक्षय तृतीया साल भर का सबसे बड़ा पर्व होता है। इस दिन कोई भी नया बिजनेस, नए घर में प्रवेश, नया वाहन खरीदना या शादी करना आदि बड़ी ही मुख्य बाते होती हैं। वैसाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को ‘अक्षय तृतीया'कहते हैं। इस साल यह सोमवार यानी आज 13 मई को मनाई जा रही हैं।
अक्षय का शाब्दिक अर्थ है ‘अक्षय' अर्थात जो ‘सदा-सर्वदा' रहे। इस दिन हर कोई सोना खरीदता है, माना जाता है कि यह काल स्वर्ण खरीदने का सबसे अच्छा काल होता है।

पौराणिक मान्यताएं इस तिथि में आरंभ किए गए कार्यों को कम से कम प्रयास में ज्यादा से ज्यादा सफलता प्राप्ति का संकेत देती है। सामन्यतया अक्षय तृतीया में 42 घड़ी और 21 पल होते हैं। पद्म पुराण अपराह्म काल को व्यापक फल देने वाला मानता है। साथ ही यह भी माना जाता है कि अक्षय तृतीया का समय अपनी योग्यता को निखारने और अपनी क्षमता को बढ़ाने के लिए उत्तम है।
यह मुहूर्त अपने कर्मों को सही दिशा में प्रोत्साहित करने के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। शायद यही मुख्य कारण है कि इस काल को 'दान' इत्यादि के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। कभी आपने सोचा है कि इस दिन हम सोना क्यों खरीदते हैं वो इसलिये क्योंकि यह दिन सोना, चांदी आदि खरीदने के लिये सबसे उत्तम दिन माना जाता है। इस दिन भगवान कुबेर ने धन और समृद्धि माता लक्ष्मी देवी को दर्शन दे कर उपदेश दिया था।
अक्षय तृतीया के लिए बाजार सज चुके हैं। पिछले काफी वक्त के बाद सोने की कीमत में आई नरमी ने इस मौके पर सोने की खऱीद को और आकर्षक बना दिया है। सोने की कीमत पिछले साल अक्टूबर के 32,400 रुपए प्रति 10 ग्राम से करीब 16 फीसदी तक नीचे आ गई है। अभी सोने की कीमत 26 हजार से 27 हजार के बीच है।



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