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कहीं पीते हैं शव की राख का सूप, कहीं गिद्धों को खिलाते अपनों का मांस, अंतिम संस्कार के हैरान करने वाले रिवाज
Weirdest Funeral Rituals in World: मृत्यु जीवन का अंतिम सत्य है, लेकिन इस सत्य को स्वीकार करने और विदाई देने के तरीके दुनिया भर में इतने अलग हैं कि वे किसी को भी हैरत में डाल सकते हैं। आपने देखा होगा कि अधिकांश धर्मों और संस्कृतियों में शव को दफनाया या जलाया जाता है। वहीं दुनिया के अलग-अलग कोने में अंतिम संस्कार की कुछ ऐसी रस्में भी हैं जिन्हें सुन यकीनन आपकी रुह कांप जाएगी। आप सोच रहे होंगे कि शव को दफनाने और जलाने के अलावा और किस तरीके से किया जा सकता है अंतिम संस्कार?
लेकिन ये जानकर जरूर रुह कांप जाएगी कि कहीं अपनों की राख का सूप पिया जाता है, तो कहीं गिद्धों को शव परोसे जाते हैं। ये रिवाज हमें डरावने लग सकते हैं, लेकिन उन समुदायों के लिए ये अपनों के प्रति प्रेम और मोक्ष का रास्ता हैं। आइए जानते हैं दुनिया के 5 सबसे अजीबोगरीब और रोंगटे खड़े कर देने वाले अंतिम संस्कार के रिवाज।

1. अपनों की राख का सूप पीना
वेनेजुएला और ब्राजील के वर्षावनों में रहने वाली यानोमामी जनजाति का मानना है कि मृत्यु के बाद शरीर का कोई हिस्सा बाकी नहीं रहना चाहिए। उनके धर्म में शव को जला दिया जाता है और फिर उसकी बची हुई राख और हड्डियों के चूरे को केले के सूप में मिलाकर पिया जाता है। इनका मानना है कि ऐसा करने से मृतक की आत्मा को शांति मिलती है और वह अपने प्रियजनों के भीतर ही जीवित रहती है।

पक्षियों को खिलाई जाती है डेड बॉडी
तिब्बत और मंगोलिया के कुछ हिस्सों में बौद्ध समुदाय 'स्काई बरियल' की रस्म निभाते हैं। यह रिवाज प्रकृति के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है। यहां शव के छोटे-छोटे टुकड़े कर दिए जाते हैं और उन्हें ऊंचे पहाड़ों पर गिद्धों और अन्य मांसाहारी पक्षियों को खिलाने के लिए छोड़ दिया जाता है। इसके पीछे की मान्यता है कि बौद्ध धर्म में शरीर को केवल एक नश्वर खोल माना जाता है, इसलिए इसे अन्य जीवित प्राणियों (पक्षियों) को खिलाना अंतिम परोपकार माना जाता है।
शव की राख से मोती बनाना
दक्षिण कोरिया में जगह की कमी और आधुनिक सोच ने अंतिम संस्कार का एक नया और अनोखा तरीका जन्म दिया है। यहां लोग अपने परिजनों के शव को जलाने के बाद उसकी राख को संरक्षित नहीं करते, बल्कि उसे उच्च तापमान पर पिघलाकर सुंदर रंगीन मोतियों (Beads) में बदल देते हैं। इसके पीछे की मान्यता ये है कि इन चमकदार मोतियों को कांच के जार में घर पर ही सजाकर रखा जाता है, ताकि अपनों की मौजूदगी हमेशा साथ महसूस हो।
4. लाशों के साथ रहना
इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप पर रहने वाले 'तोराजा' समुदाय के लिए मौत कोई विदाई नहीं है। यहां किसी सदस्य की मृत्यु के बाद उसे दफनाया नहीं जाता, बल्कि हफ्तों या महीनों तक शव को घर में ही रखा जाता है। उसे कपड़े पहनाए जाते हैं और परिवार के सदस्य उसे खाना भी खिलाते हैं और बातें भी करते हैं। उनके धर्म के अनुसार, उनके लिए मृतक तब तक केवल 'बीमार' है जब तक कि अंतिम भव्य भोज (Funeral Feast) न हो जाए।
5. शव को निकालना और जश्न मनाना
माडागास्कर में 'फमादिहाना' नाम का एक त्योहार मनाया जाता है, जिसे 'हड्डियों का नाच' (Turning of the bones) भी कहा जाता है। हर 5 या 7 साल में परिवार के लोग अपने पूर्वजों की कब्रों को खोदकर उनके शव निकालते हैं। सड़े-गले अवशेषों को नए रेशमी कपड़ों में लपेटा जाता है और फिर लाइव संगीत पर उनके साथ नाच-गाना और जश्न मनाया जाता है। इसके पीछे मान्यता यह ह कि पूर्वजों के प्रति अपना प्यार और सम्मान दिखाने का तरीका है ताकि उनका आशीर्वाद परिवार पर बना रहे।



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