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क्या आपने कभी रंग बदलने वाली झील देखी है? आइए जानें 50,000 साल पुरानी इस Lake का रहस्य
Lonar Lake Mystery: अगर नेचर की खूबसूरती को देखते हैं तो नजरें हटाने का मन ही नहीं करता है। लेकिन इस प्रकृति के रहस्य भी इतने अजीब हैं कि कई बार वो हमें हैरान कर देते हैं। आपने पर्वत,पहाड़ और झीलें तो कई बार देखी होंगी और उनकी खूबसूरती में खो गए होंगें। लेकिन हमें ये बताइए कि क्या आपने कभी धरती पर ऐसी झील देखी है जो रंग बदलती है? अगर नहीं तो आज हम आपको एक ऐसी ही झील के बारे में बताने जा रहे हैं जो मौसम के अनुसार अपना कलर चेंज करती है और वो महाराष्ट्र के बुलढाणा में स्थित लोनार झील है। आइए जान लेते हैं 50,000 साल पुरानी इस झील का रहस्य जिसे देखकर खुद नासा (NASA) के वैज्ञानिक भी दंग रह गए थे। कैसे अंतरिक्ष से आए एक मेहमान ने इसे जन्म दिया...

क्या है लोनार झील का इतिहास?
लोनार झील का इतिहास किसी रोमांचक फिल्म से कम नहीं है। वैज्ञानिक शोधों के अनुसार, आज से लगभग 35,000 से 50,000 साल पहले एक विशालकाय उल्कापिंड अत्यधिक तेज गति से धरती से टकराया था। इस टक्कर ने जमीन के अंदर एक विशाल गड्ढा (क्रेटर) बना दिया। अब सवाल उठता है कि ये क्रेटर इतना खास क्यों है? दरअसल, यह पूरी दुनिया में बेसाल्ट रॉक (Basalt Rock) से बना इकलौता इम्पैक्ट क्रेटर है। इस क्रेटर की संरचना चंद्रमा और मंगल ग्रह पर मिलने वाले क्रेटरों जैसी है, इसलिए दुनिया भर के वैज्ञानिक यहां रिसर्च के लिए आते हैं।
क्यों इस झील का बदलता है रंग?
हमने ये तो जान लिया कि इस झील का उदगम कैसे हुआ? अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर इस झील का पानी रंग क्यों और कैसे बदलता है? असली और चौंकाने वाला रहस्य तो यही है जो इस झील को रहस्यमी और आकर्षक बनाता है। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2020 में रातों-रात इस झील का पानी हरे से गुलाबी हो गया था, जिसकी तस्वीरें सैटेलाइट से भी ली गई थीं। यह कोई चमत्कार नहीं बल्कि पानी में मौजूद 'हेलोआर्किया' (Haloarchaea) नामक सूक्ष्मजीवों का कमाल है।
जब गर्मी बढ़ती है, तो झील का पानी सूखने लगता है और खारापन (Salinity) बढ़ जाता है। अधिक खारेपन और बढ़ते तापमान में ये जीव बहुत तेजी से बढ़ते हैं। ये जीव अपनी सुरक्षा के लिए पानी में गुलाबी रंग छोड़ना शुरू कर देते हैं, जिससे पूरी झील का रंग बदल जाता है।
लोनार झील की अनूठी है बनावट
ये झील जितनी रहस्यमयी है उसकी बनावट भी उतनी ही अनूठी है। दक्कन के पठार पर स्थित यह झील अपने आप में इंजीनियरिंग का अजूबा है। यह झील करीब 150 मीटर गहरी है और इसका व्यास लगभग 1,830 मीटर है। इस झील के पानी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह नमकीन (Saline) और क्षारीय (Alkaline) दोनों है। झील के किनारे जमीन की सामान्य सतह से करीब 20 मीटर ऊंचे उठे हुए हैं, जो उल्कापिंड की टक्कर की गवाही देते हैं।
यहाँ घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच है, जब मौसम सुहावना होता है और झील के आसपास की हरियाली देखने लायक होती है।
शुरुआत में इसे ज्वालामुखी क्रेटर माना जाता था, लेकिन आधुनिक रिसर्च और नासा की स्टडी ने साबित किया है कि यह एक उल्कापिंड इम्पैक्ट क्रेटर है।



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