Vidyasagar Maharaj Quotes : डरना और डराना दोनों पाप है.. आचार्य विद्यासागर के ये अनमोल वचन बदल देंगे आपका जीवन

Motivational And Inspiring Quotes by Acharya Vidyasagar Maharaj : छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्थित चन्द्रगिरि तीर्थ में शनिवार (17 फरवरी) की रात करीब 2:35 पर जैन धर्म में दिगंबर मुनि परंपरा के आचार्य विद्यासागर महाराज ने सल्‍लेखना के जरिए अपना शरीर त्याग दिया है।

वहीं इससे पहले उन्होंने आचार्य पद का त्याग कर दिया था और तीन दिन उपवास पर रहते हुए उन्‍होंने देह त्‍याग कर लिया था, इसके बाद उन्होंने प्राण त्याग दिए।

जैन मुनि आचार्य विद्यासागर जी के जीवन उपयोगी पावन अनमोल वचन जिन्हें जीवन में अपनाकर कोई भी अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता हैं।

Motivational Thoughts of Shri Vidyasagar Ji

जानिए विद्यासागर जी के कुछ खास अनमोल वचन...

आचार्य विद्यासागर के अनमोल वचन... (Motivational Thoughts of Shri Vidyasagar Ji)

1. जो दूसरों के अवगुण देखता है और दूसरों को सुखी देखकर ईर्ष्या करता है, वह कभी भी सुख-शांति का अनुभव नहीं कर सकता है।

2. अच्छे लोग दूसरों के लिए जीते हैं जबकि दुष्ट लोग दूसरों पर जीते हैं।

3. नम्रता से देवता भी मनुष्य के वश में हो जाते हैं।

4. जिस तरह कीड़ा कपड़ों को कुतर देता है, उसी तरह ईर्ष्या मनुष्य को।

5. जीव दया ही परम धर्म है।

6. . चार पर विजय प्राप्त करो- 1. इंद्रियों पर 2. मन पर 3. वाणी पर 4. शरीर पर।

7. लघु बनना सीख लो, क्‍योंक‍ि लघु बने बिना विराटता का अनुभव नहीं म‍िल सकता है।

8. डरना और डराना दोनों पाप है।

Motivational Thoughts Of Jain Saint Shri Vidyasagar Ji,

9. दूसरों के हित के लिए अपने सुख का त्याग करना ही सच्ची सेवा है।

10. ईर्ष्या खाती है अंतरात्मा को, लालच खाता है ईमान को, क्रोध खाता है अक्ल को।

11. अच्‍छे लोग दूसरों के ल‍िए जीते हैं, जबक‍ि दुष्‍ट लोग दूसरों पर जीते हैं।

12. जो नमता है, वह परमात्मा को जमता है।

13. जिस तरह कीड़ा कपड़ों को कुतर देता है, उसी तरह ईर्ष्या मनुष्य को

14. भूत से प्रेरणा लेकर वर्तमान में भविष्य का चिंतन करना चाहिए।

15. अनुभव ही जीवन में काम आता है, सिर्फ किताबी ज्ञान कोई उपलब्धि नहीं दिला सकता है

16. आवश्‍यकता कभी समस्‍या नहीं बनती बल्कि अनावश्‍यकता ही समस्‍या की जननी है।

Story first published: Sunday, February 18, 2024, 16:15 [IST]
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