Latest Updates
-
नसों में जमा कोलेस्ट्रॉल को कम कर सकते हैं ये 5 योगासन, नियमित अभ्यास से हार्ट डिजीज का खतरा होगा कम -
चेहरे पर नारियल तेल में मिलाकर लगाएं कॉफी पाउडर, स्किन की इन 5 समस्याओं से मिलेगा छुटकारा -
Myth Vs Fact: टाइट ब्रा पहनने से ब्रेस्ट कैंसर होता है? डॉक्टर से जानिए ऐसे ही 10 मिथ और उनकी सच्चाई -
Karwa Chauth Kab Hai 2026: करवा चौथ कब है? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और चांद दिखने का सटीक समय -
डायबिटीज में नारियल पानी पिएं या नींबू पानी? जानें शुगर कंट्रोल के लिए क्या है बेहतर -
Papankusha Ekadashi Vrat Katha: पापांकुशा एकादशी पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, सभी पापों से मिलेगी मुक्ति -
Papankusha Ekadashi 2026 Wishes: विष्णु जी की कृपा...पापांकुशा एकादशी पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
पार्टी में जल्दी बिगड़ जाता है मेकअप? केकी और पैची लुक से बचने के लिए अपनाएं ये 5 टिप्स -
दशहरा के बाद दिल्ली की हवा हुई जहरीली, 200 के पार पहुंचा AQI, प्रदूषण से बचाव के लिए फॉलो करें ये टिप्स -
कुल्लू दशहरा में नहीं जलता रावण का पुतला, देवलोक से आते हैं देवी-देवता, जानिए क्या है सदियों पुरानी परंपरा
Vidyasagar Maharaj Quotes : डरना और डराना दोनों पाप है.. आचार्य विद्यासागर के ये अनमोल वचन बदल देंगे आपका जीवन
Motivational And Inspiring Quotes by Acharya Vidyasagar Maharaj : छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्थित चन्द्रगिरि तीर्थ में शनिवार (17 फरवरी) की रात करीब 2:35 पर जैन धर्म में दिगंबर मुनि परंपरा के आचार्य विद्यासागर महाराज ने सल्लेखना के जरिए अपना शरीर त्याग दिया है।
वहीं इससे पहले उन्होंने आचार्य पद का त्याग कर दिया था और तीन दिन उपवास पर रहते हुए उन्होंने देह त्याग कर लिया था, इसके बाद उन्होंने प्राण त्याग दिए।
जैन मुनि आचार्य विद्यासागर जी के जीवन उपयोगी पावन अनमोल वचन जिन्हें जीवन में अपनाकर कोई भी अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता हैं।

जानिए विद्यासागर जी के कुछ खास अनमोल वचन...
आचार्य विद्यासागर के अनमोल वचन... (Motivational Thoughts of Shri Vidyasagar Ji)
1. जो दूसरों के अवगुण देखता है और दूसरों को सुखी देखकर ईर्ष्या करता है, वह कभी भी सुख-शांति का अनुभव नहीं कर सकता है।
2. अच्छे लोग दूसरों के लिए जीते हैं जबकि दुष्ट लोग दूसरों पर जीते हैं।
3. नम्रता से देवता भी मनुष्य के वश में हो जाते हैं।
4. जिस तरह कीड़ा कपड़ों को कुतर देता है, उसी तरह ईर्ष्या मनुष्य को।
5. जीव दया ही परम धर्म है।
6. . चार पर विजय प्राप्त करो- 1. इंद्रियों पर 2. मन पर 3. वाणी पर 4. शरीर पर।
7. लघु बनना सीख लो, क्योंकि लघु बने बिना विराटता का अनुभव नहीं मिल सकता है।
8. डरना और डराना दोनों पाप है।

9. दूसरों के हित के लिए अपने सुख का त्याग करना ही सच्ची सेवा है।
10. ईर्ष्या खाती है अंतरात्मा को, लालच खाता है ईमान को, क्रोध खाता है अक्ल को।
11. अच्छे लोग दूसरों के लिए जीते हैं, जबकि दुष्ट लोग दूसरों पर जीते हैं।
12. जो नमता है, वह परमात्मा को जमता है।
13. जिस तरह कीड़ा कपड़ों को कुतर देता है, उसी तरह ईर्ष्या मनुष्य को
14. भूत से प्रेरणा लेकर वर्तमान में भविष्य का चिंतन करना चाहिए।
15. अनुभव ही जीवन में काम आता है, सिर्फ किताबी ज्ञान कोई उपलब्धि नहीं दिला सकता है
16. आवश्यकता कभी समस्या नहीं बनती बल्कि अनावश्यकता ही समस्या की जननी है।



Click it and Unblock the Notifications
