Sharda Sinha Chhath Geet Lyrics: 'रुनकी सुनकी के माई', शारदा सिन्हा के इन 5 गीतों बिना अधूरा है छठ पर्व

Sharda Sinha Chhath Geet Lyrics: छठ पूजा का पर्व आते ही हर गली-मोहल्ले में शारदा सिन्हा की मधुर आवाज गूंज उठती है। उनकी छठ गीतों के बिना यह पावन पर्व अधूरा लगता है। "केलवा के पात पर उगेलन सूर्य देव" से लेकर "पटना के घाट पर" तक, उनके गीतों में आस्था, भक्ति और लोकसंस्कृति की झलक मिलती है। बिहार और पूर्वांचल की लोकगायिका शारदा सिन्हा ने छठी मैया की महिमा को अपने सुरों में इस तरह पिरोया है कि हर अर्घ्य के समय लोग उनके गीत गुनगुनाए बिना नहीं रह पाते।

सूर्य अर्घ्य और उषा अर्घ्य के अवसर पर उनके गीत घर-घर में गूंजते हैं, जो भक्ति और भावनाओं का अद्भुत संगम पेश करते हैं। अगर आप भी इस छठ पूजा पर शारदा सिन्हा के छठ गीतों के लिरिक्स ढूंढ रहे हैं, तो यहां जानें उनके सबसे प्रसिद्ध और भक्ति से भरे गीतों के बोल।

Sharda Sinha Chhath Geet Lyrics

1. केलवा के पात पर उगेलन सूरज देव ॥

अर्घ देलन पूरब दिसा में,
सूरज देव हँसलें गगनवा से,
मइया के कृपा बरसावलन,
भक्तन पर सुख धन धनवा से ॥

केलवा के पात पर उगेलन सूरज देव ॥

सुख शांति के बरसात भइल,
भक्तन के मन में आनंद भइल,
मइया के जय जयकार गूंजे,
हर द्वारे उजियारा भइल ॥

केलवा के पात पर उगेलन सूरज देव ॥

भावार्थ:
यह गीत उषा अर्घ्य के समय का प्रतीक है, जब लोग सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं। इसमें लोकभक्ति, घर की पवित्रता और सूर्योपासना का वर्णन है।

2. "पटना के घाट पर"

Lyrics (शुरुआती बोल):

पटना के घाट पर छठी मईया आईं रे,
घरे-घरे गूंजे जय छठी मईया की बानी रे ॥

पटना के घाट पर छठी मईया आईं रे ॥

गंगा जी के किनारे सजल परसादी,
घट घट में भइल उजियारी रे ॥

पटना के घाट पर छठी मईया आईं रे ॥

नदिया के धार पे दीप जलइले,
भक्तन के मन में आनंद छाई रे ॥

पटना के घाट पर छठी मईया आईं रे ॥

सूरज देव के अर्घ देत बानी,
मइया से मांगत असीस पाई रे ॥

पटना के घाट पर छठी मईया आईं रे ॥

मइया के कृपा से भरल संसार,
हर द्वारे गूंजे जय जयकार रे ॥

पटना के घाट पर छठी मईया आईं रे,
घरे-घरे गूंजे जय छठी मईया की बानी रे ॥

भावार्थ:
यह गीत वाराणसी और पटना के घाटों की भव्यता को दर्शाता है, जहां लाखों दीपों और भक्ति के साथ छठ मैया की पूजा होती है।

3. "उठउ हे सूर्य देव"

Lyrics (शुरुआती बोल):

पाहिले पहिल छठी मईया, घर में अइलीं हो,
अंगना में बरिसे असीस के जोहर हो॥

पाहिले पहिल छठी मईया, घर में अइलीं हो॥

मइया के वरतिया नईकी बान्हली,
कइसे करीं पूजा, कइसे करीं स्नान हो॥

कइसे करीं सजनी संध्या अर्घ दान हो॥

पाहिले पहिल छठी मईया, घर में अइलीं हो,
अंगना में बरिसे असीस के जोहर हो॥

घरे घरे बाजे बांसुरी डुगडुगी,
घाट पे भइल भीड़ भइल उजियार हो॥

पाहिले पहिल छठी मईया, घर में अइलीं हो॥

छठी मईया के किरपा से सब सुख पावल जाई,
मइया के आशीष से हर दुख टल जाई॥

पाहिले पहिल छठी मईया, घर में अइलीं हो,
अंगना में बरिसे असीस के जोहर हो॥

भावार्थ:
यह गीत सूर्य देव को अर्घ्य देने के दौरान गाया जाता है। इसमें भक्ति, परिवार की मंगलकामना और सूर्य आराधना का मधुर भाव है।

4. "पाहिले पहिल छठी मईया"

Lyrics (शुरुआती बोल):

पाहिले पहिल छठी मईया,
हम होखीं निरहू के संग।
पाहिले पहिल छठी मईया,
हम होखीं निरहू के संग॥

घरे-घरे गूंजे जय छठी मईया,
हर घर में लागे रंग॥
पाहिले पहिल छठी मईया...॥

सुपवा में भरले अर्घ के दान,
गंगा जी के तीर पंहुचले जान॥
मनवा में उमंग, अँखिया में रंग,
पाहिले पहिल छठी मईया...॥

रात दिन सोचब, कैसे करब भोर,
कैसे देब अर्घ सुरज देव के ओर॥
छठी मईया के असीस लेब,
भक्ति के रंग में रंगब तन मन॥

पाहिले पहिल छठी मईया,
हम होखीं निरहू के संग॥

भावार्थ:
यह गीत पहली बार छठ पर्व मनाने वाली महिलाओं की भावनाओं को दर्शाता है। इसमें उत्साह, श्रद्धा और पारिवारिक प्रेम झलकता है।

5. "रुनकी सुनकी के माई"

रुनकी सुनकी के माई,
हे छठी मईया सुन ल न अर्जी हमारी।
रुनकी सुनकी के माई,
सुन ल न अर्जी हमारी।।

घरवा में सुख शांति रहे,
नाही कोनो रोग-संवारी।
रुनकी सुनकी के माई,
हे छठी मईया सुन ल न अर्जी हमारी।।

सुख समृद्धि से भर द न अँगना,
अइसन द न तोहर सवारी।
रुनकी सुनकी के माई,
सुन ल न अर्जी हमारी।।

ललना-ललना सब हँसे खेले,
घरे-घरे गूंजे जय छठी मईया की बानी।
रुनकी सुनकी के माई,
हे छठी मईया सुन ल न अर्जी हमारी।।
भावार्थ:
यह गीत मां की ममता और भक्त की विनती को भावपूर्ण ढंग से व्यक्त करता है - जिसमें व्रती अपने परिवार के सुख-समृद्धि के लिए छठी मैया से प्रार्थना करती हैं।

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