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Kedarnath Dham Yatra 2026: दिल्ली से केदारनाथ कैसे पंहुचें? जानें पूरा रूट, रुकने की जगह और कितना आएगा खर्च
Kedarnath Dham Yatra 2026 Travel Guide: केदारनाथ मंदिर के कपाट 22 अप्रैल 2026 की सुबह श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। इसके साथ ही चारधाम यात्रा की शुरुआत भी हो चुकी है। हिमालय की खूबसूरत वादियों के बीच करीब 3,500 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर हर साल लाखों शिव भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करता है। कपाट खुलते ही केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी है। हालांकि, ऊंचाई और कठिन रास्तों की वजह से यह यात्रा थोड़ी चुनौतीपूर्ण भी मानी जाती है। खासकर जो लोग पहली बार जा रहे हैं, उनके मन में यात्रा के रूट, खर्च, ठहरने की जगह और समय को लेकर कई सवाल रहते हैं।

अगर आप दिल्ली से केदारनाथ यात्रा का प्लान बना रही हैं, तो पहले से सही जानकारी रखना बेहद जरूरी है। इससे आपकी यात्रा ज्यादा सुरक्षित, आरामदायक और आसान हो सकती है। आइए जानते हैं दिल्ली से केदारनाथ पहुंचने का रूट, बजट और जरूरी ट्रैवल टिप्स -
यात्रा से पहले रजिस्ट्रेशन कराना है जरूरी
केदारनाथ मंदिर की यात्रा पर जाने से पहले श्रद्धालुओं को रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होता है। अच्छी बात यह है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह मुफ्त है और घर बैठे ऑनलाइन भी की जा सकती है। मोबाइल नंबर के जरिए OTP वेरिफिकेशन करने के बाद यात्री को अपनी बेसिक जानकारी और पहचान पत्र अपलोड करना होता है। प्रक्रिया पूरी होने पर एक ई-पास जारी किया जाता है, जिसमें QR कोड होता है। यात्रा के दौरान कई जगह इसकी जांच की जाती है, इसलिए इसे अपने साथ रखना जरूरी है। जो लोग ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन नहीं कर पाते, वे हरिद्वार, ऋषिकेश या सोनप्रयाग में ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन भी करवा सकते हैं।
दिल्ली से केदारनाथ कैसे पहुंचें?
दिल्ली से केदारनाथ पहुंचने के लिए सबसे पहले हरिद्वार, ऋषिकेश या देहरादून तक जाना होता है। सड़क मार्ग से यात्रा करने वाले लोग बस, टैक्सी या निजी वाहन से आसानी से यहां पहुंच सकते हैं। हरिद्वार से आगे का रास्ता ऋषिकेश, रुद्रप्रयाग और गुप्तकाशी होते हुए गौरीकुंड तक जाता है। अगर आप ट्रेन से सफर करना चाहती हैं, तो हरिद्वार और ऋषिकेश सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन हैं। वहीं हवाई यात्रा करने वाले यात्री देहरादून एयरपोर्ट तक पहुंचकर वहां से टैक्सी या बस की मदद से आगे का सफर तय कर सकते हैं।
मंदिर तक पहुंचने का रास्ता
गौरीकुंड के बाद सीधे मंदिर तक सड़क सुविधा नहीं मिलती। यहां से केदारनाथ धाम तक करीब 16 से 18 किलोमीटर का ट्रेक करना पड़ता है। कई श्रद्धालु पैदल यात्रा करते हैं, जिसमें मौसम और स्वास्थ्य के अनुसार 6 से 10 घंटे तक का समय लग सकता है। जो लोग पैदल नहीं चल सकते, उनके लिए घोड़ा, खच्चर और पालकी जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध रहती हैं। इसके अलावा फाटा, सिरसी और गुप्तकाशी से हेलीकॉप्टर सेवा का विकल्प भी लिया जा सकता है।
कैसा रहता है मौसम?
अप्रैल और मई के दौरान केदारनाथ में मौसम काफी ठंडा और बदलता हुआ रहता है। दिन में हल्की धूप के बावजूद सुबह और रात में तेज ठंड महसूस होती है। कई बार अचानक बारिश या ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी भी देखने को मिल जाती है। इसलिए यात्रा पर जाते समय गर्म कपड़े, रेनकोट और मजबूत जूते साथ रखना बेहद जरूरी माना जाता है।
यात्रा में कितना आ सकता है खर्च?
दिल्ली से केदारनाथ यात्रा का कुल खर्च आपकी यात्रा के तरीके और ठहरने की सुविधा पर निर्भर करता है। सामान्य तौर पर एक व्यक्ति का बजट करीब 10 से 20 हजार रुपये तक पहुंच सकता है। बस और ट्रेन से यात्रा करने पर खर्च कम आता है, जबकि हेलीकॉप्टर सेवा लेने पर बजट बढ़ सकता है। हेलीकॉप्टर सेवाएं सिरसी, फाटा और गुप्तकाशी से उपलब्ध रहती हैं, जिनका किराया अलग-अलग हो सकता है। वहीं होटल, खाने-पीने और लोकल ट्रांसपोर्ट का खर्च भी यात्रा के कुल बजट में शामिल होता है।



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