Diwali 2024: अलवर में ग्रीन पटाखों के नाम पर बेचे जा रहे हैं प्रदूषण वाले पटाखे, ऐसे करें असली की पहचान

Green Crackers : दिल्ली-एनसीआर और कई अन्य शहरों में प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए सरकार ने दिवाली के दौरान सामान्य पटाखों पर प्रतिबंध लगा दिया है, और केवल ग्रीन पटाखों (Green Crackers) को जलाने की अनुमति दी है। वहीं आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक अलवर में खुलेआम ग्रीन पटाखों के नाम पर प्रदूषण फैलाने वाले पटाखे बेचे जा रहे हैं। इसके अलावा विक्रेता नियमों को ताक पर रखते हुए पटाखों की होम ड‍िलीवरी तक करवा रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने एनसीआर क्षेत्र में पटाखों की बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगाई है, जिसमें अलवर भी शामिल है। हालांकि, वन विभाग ने प्रदेश में ग्रीन पटाखों के ल‍िए 2 घंटे की छूट दी है, लेक‍िन बावजूद इसके खुलेआम ग्रीन पटाखों के नाम पर प्रदूषण फैलाने वाले सामान्‍य पटाखों की ब‍िक्री हो रही है। आइए जानते हैं कि आख‍िर क्‍या है ग्रीन पटाखे और कैसे करें इनकी पहचान।

क्‍या है ग्रीन पटाखे?

ग्रीन पटाखे सामान्‍य पटाखों की तुलना में कम प्रदूषण उत्पन्न करते हैं। इन पटाखों को वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) द्वारा विकसित किया गया है, और इन्हें बनाने में ऐसे रसायनों का उपयोग किया जाता है, जो हानिकारक गैसों का उत्सर्जन कम करते हैं।

ग्रीन पटाखों की विशेषताएं

कम प्रदूषण: ग्रीन पटाखों से निकलने वाली हानिकारक गैसों, जैसे- सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड, का उत्सर्जन सामान्य पटाखों की तुलना में 30-35% तक कम होता है।

कम धुआं और शोर: ये पटाखे कम धुआं उत्पन्न करते हैं, जिससे वायु प्रदूषण कम होता है। साथ ही, इनकी आवाज़ भी कम होती है, जिससे ध्वनि प्रदूषण में कमी आती है।

वायु गुणवत्ता में सुधार: ग्रीन पटाखों में ऐसे रसायनों का उपयोग होता है जो हानिकारक धुएं को कम करते हैं, जिससे हवा की गुणवत्ता पर कम नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

सामान्य पटाखों से क‍ितने अलग होते हैं ग्रीन पटाखे

रासायनिक घटक: ग्रीन पटाखों में पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर की मात्रा कम होती है, जबकि सामान्य पटाखों में ये रसायन अधिक मात्रा में होते हैं।

प्रदूषण स्तर: ग्रीन पटाखे सामान्य पटाखों की तुलना में अधिक इको-फ्रेंडली हैं और इन्हें विशेष तकनीक से बनाया जाता है ताकि प्रदूषण कम हो।

ग्रीन पटाखों की मांग क्यों बढ़ रही है?

पर्यावरण की जागरूकता: अब लोग पर्यावरण के प्रति अधिक जागरूक हो गए हैं और प्रदूषण को नियंत्रित करने में सहायक उत्पादों की ओर रुझान बढ़ रहा है।

कानूनी न‍ियम : कई राज्यों और शहरों में प्रदूषण के कारण सामान्य पटाखों पर प्रतिबंध लग गया है। ऐसे में ग्रीन पटाखे एक बेहतर विकल्प के रूप में उभर रहे हैं।

स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रभाव: लोग अपने और दूसरों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो गए हैं। ग्रीन पटाखों का उपयोग कर वे एक सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल दीवाली मना सकते हैं। ग्रीन पटाखों की बढ़ती मांग का मुख्य कारण यही है कि ये पटाखे पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे लोग और सरकारें इनके प्रति अधिक आकर्षित हो रही हैं।


असली ग्रीन पटाखों की पहचान कैसे करें?

सर्टिफिकेट: ग्रीन पटाखों के पैकेट पर CSIR-NEERI (नेशनल एन्‍वायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट) का इको-फ्रेंडली सर्टिफिकेट होता है।

पैकेट पर मार्किंग: असली ग्रीन पटाखों के पैकेट पर QR कोड या ग्रीन मार्क होता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि ये पटाखे पर्यावरण-अनुकूल हैं।

बाजार से खरीदते समय सावधानी: बाजार में कई बार नकली ग्रीन पटाखे भी उपलब्ध होते हैं, इसलिए विश्वसनीय विक्रेताओं से ही पटाखे खरीदें और सर्टिफिकेट की जांच करें।

Story first published: Tuesday, October 29, 2024, 17:26 [IST]
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