Latest Updates
-
Koffee With Karan 9: करण जौहर का ‘कॉफी विद करण’ 22 साल बाद होगा खत्म, जानें कब और कहां स्ट्रीम होगा आखिरी सीजन -
Jitiya Vrat 2026: कब है जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत? जानें सही तारीख, और नहाय-खाय से लेकर पारण तक का समय -
लाखों में बिकती है दुनिया की सबसे महंगी कॉफी, लेकिन बनाने का प्रोसेस जानकर फ्री में भी पीने से करेंगे तौबा! -
पाम ऑयल क्या होता है और इसे खाने से क्या नुकसान होते हैं? जानिए इससे शरीर पर क्या असर होता है -
October 2026 Vrat Tyohar List: नवरात्रि, दशहरा से करवा चौथ तक, यहां देखें व्रत-त्योहारों की पूरी लिस्ट -
जुबिन नौटियाल बने पापा, पत्नी ने दिया बेटे को जन्म, गणेश चतुर्थी पर घर आया नन्हा मेहमान -
'मन की बात' में PM मोदी ने बताया क्यों इतना खास है आंवला, जानिए इसके 5 जबरदस्त फायदे और सेवन का सही तरीका -
World Heart Day 2026: क्रॉनिक स्ट्रेस बन सकता है हार्ट अटैक और स्ट्रोक की वजह, डॉक्टर से जानें बचाव के तरीके -
Pitru Paksha 2026: गया जी के इस मंदिर में जिंदा लोग खुद करते हैं अपना पिंडदान, बेहद अनोखी है मान्यता -
दिल को हेल्दी रखते हैं ये 5 योगासन, हार्ट अटैक से बचने के लिए आज से ही बना लें रूटीन का हिस्सा
फादर्स डे स्पेशल: एक पिता की मुहिम जिसने मातम को हरियाली में बदला, अब विदेशों तक गूंज रही है इसकी मिसाल
Fathers Day 2025 Special : राजस्थान के राजसमंद जिले से करीब 15 किलोमीटर दूर बसा एक गांव पिपलांत्री। एक समय था, जब इस गांव में बेटी का जन्म पर मायूसी सी छा जाती थी, लेकिन आज वही गांव बेटियों के जन्म पर जश्न मनाता है, वो भी पेड़ लगाकर, प्रकृति को अपनाकर, जीवन को संजोकर। इस बदलाव की शुरुआत हुई एक पिता के दर्द और प्रेम से। उस पिता का नाम है श्याम सुंदर पालीवाल, जिन्होंने अपनी बेटी की याद में जो बीज बोया, उसने पूरे गांव को हरा-भरा कर दिया।
साल 2007 की बात है। पालीवाल की 16 साल की बेटी, बीमारी के चलते अचानक दुनिया छोड़ गई। एक पिता के लिए इससे बड़ा आघात क्या हो सकता है? लेकिन श्याम सुंदर ने अपने दर्द को एक मुहिम में बदल दिया। उन्होंने बेटी की याद में एक पेड़ लगाया। उस पेड़ को वे खुद सींचते, उसका हर पत्ता उनकी बेटी की मुस्कान जैसा लगता। शायद यहीं से जन्म हुआ एक ऐसे विचार का, जो आगे चलकर पूरे देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी मिसाल बन गया।

बेटी जन्म के पर 111 पेड़ लगाकर मनाते हैं खुशियां
पालीवाल ने तय किया अब जब भी उनके गांव में कोई बेटी जन्म लेगी, 111 पेड़ लगाए जाएंगे। शुरुआत में लोगों ने इसे भावुकता में उठाया कदम माना, लेकिन धीरे-धीरे यह एक मजबूत परंपरा बन गई। गांव के लोग खुद बेटियों के नाम पर पेड़ लगाते हैं और उनकी देखभाल भी करते हैं। ये सिर्फ पेड़ नहीं हैं, ये हर बेटी के भविष्य के लिए आशा के प्रतीक बन गए हैं।
एक पिता की यही संवेदनशीलता पिपलांत्री को एक आदर्श गांव में बदलने का कारण बनी। बेटी के जन्म पर न सिर्फ पेड़ लगाए जाते हैं, बल्कि गांव वाले चंदा इकट्ठा कर बेटी के नाम डाकघर में फिक्स डिपॉजिट भी करवाते हैं, ताकि जब वो बड़ी हो, तो उसका भविष्य सुरक्षित हो। यह सब उस एक पिता के कारण संभव हो पाया, जिसने अपनी बेटी को खोने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी।
In Piplantri, Rajasthan, when a girl is born, villagers plant 111 trees & put 41000 rupees in FD for the girl till she turns 18. Brainchild of Shyam Sunder Paliwal whose 16 year old daughter Kiran died tragically, this scheme has created a forest & made the village prosperous. pic.twitter.com/uiREAk95p6
— Dr. Ajayita (@DoctorAjayita) September 30, 2020
अपने मुहीम से गांव की कर दी कायापलट
श्याम सुंदर पालीवाल ने सरपंच बनकर अपने गांव के लिए इतना कुछ किया कि सरकार ने भी उनकी योजनाओं को देश भर में लागू करने का निर्णय लिया। जल संरक्षण के लिए उन्होंने एनीकट बनवाए, गांव के स्कूलों का जीर्णोद्धार कराया और जैविक खेती को बढ़ावा दिया। कभी जिस गांव में पानी के लिए 500 फीट खुदाई करनी पड़ती थी, वहां आज प्राकृतिक झरने बहते हैं।
फादर्स डे पर जब हम अपने पिता को याद करते हैं, उनके संघर्ष और प्रेम को महसूस करते हैं, तो श्याम सुंदर पालीवाल जैसे पिता का ज़िक्र करना जरूरी हो जाता है। उन्होंने साबित कर दिया कि एक पिता का प्यार सिर्फ अपने बच्चे के लिए ही नहीं, बल्कि समाज को भी बदलने की ताकत रखता है।
पद्मश्री से सम्मानित हो चुके हैं श्याम सुंदर पालीवाल
पालीवाल को उनके कामों के लिए कई पुरस्कार मिले। साल 2007 में गांव को खुले में शौच से मुक्त कराने के लिए उन्हें राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से स्वच्छता पुरस्कार मिला। और 2021 में पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया। आज पिपलांत्री की कहानी डेनमार्क के स्कूलों के पाठ्यक्रम में पढ़ाई जाती है। यूएन भी श्याम सुंदर के पिपलांत्री मॉडल की तारीफ कर चुका है।
हर बेटी में अपनी बेटी देखते हैं श्याम सुंदर
श्याम सुंदर कहते हैं, "मैंने अपनी बेटी को खोया जरूर है, लेकिन हर उस बेटी में मेरी बेटी का अंश है, जिसके नाम पर गांव में पेड़ लगे हैं। जब वो हँसती हैं, स्कूल जाती हैं, तो मुझे लगता है मेरी बेटी अब भी मेरे साथ है।"
फादर्स डे पर यह कहानी सिर्फ एक पिता की नहीं, बल्कि उस अडिग प्रेम, त्याग और समर्पण की है, जो हर पिता के भीतर होता है। वो जो हर दर्द को छुपा लेता है, हर सपने को बच्चों के नाम कर देता है और अपने आंसुओं को मुस्कान में बदल देता है, क्योंकि वो "पापा" है।



Click it and Unblock the Notifications
