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Friendship Day Sanskrit Wishes : हर दुख-सुख में साथ रहे उस दोस्त को दें संस्कृत के मधुर शब्दों में शुभकामनाएं
Friendship Day 2025 Quotes in Sanskrit : मित्रता एक अनमोल रिश्ता है जिसे हम खुद चुनते हैं। बचपन की दोस्ती सबसे मासूम और निश्छल होती है, जहाँ न स्वार्थ होता है और न कोई मतलब। सच्चा मित्र हमारे हर सुख-दुख में बिना कहे साथ खड़ा रहता है। भगवान श्रीकृष्ण-सुदामा और अर्जुन-कृष्ण की मित्रता आज भी प्रेरणा का स्रोत है।
मित्रता विश्वास, सम्मान और सहयोग की नींव पर टिकी होती है। एक सच्चा मित्र हमारी गलतियों पर हमें टोकता है और सही राह दिखाता है। हमारे शास्त्रों में भी मित्रता पर कई सुंदर संस्कृत श्लोक मिलते हैं जो इस रिश्ते की गहराई को उजागर करते हैं।
हर वर्ष अगस्त के पहले रविवार को Friendship Day मनाया जाता है। 2025 में यह दिन 3 अगस्त को आएगा। इस दिन संस्कृत श्लोकों के माध्यम से अपने मित्रों को शुभकामनाएं दें और इस रिश्ते को और मजबूत बनाएं।

Friendship Day Qoutes and Shalok in Sanskrit
1.
"सत्यं तन्मित्रं दोषान् यन्मम पृष्ठतः श्रुत्वा यथाथतोऽन्येभ्यो मां संकोचं विना वदेत्।"
हिंदी अर्थ:
सच्चा मित्र वही होता है जो मेरी बुराइयाँ या गलतियाँ, दूसरों से सुनकर, मुझसे बिना संकोच के साफ़-साफ़ कह देता है।
2. "आढ्यो वाऽपि दरिद्रो वा दुःखितोऽपि सुखीऽपि वा। निर्दोषो वा सदोषो वा वयस्यः परमा गतिः।।"
भावार्थ - मित्र चाहे अमीर हो या गरीब, दुखी हो या सुखी, दोषी हो या निर्दोष-हर हाल में वही सबसे बड़ा सहारा होता है।
3."चन्दनं शीतलं लोके, चन्दनादपि चन्द्रमाः। चन्द्रचन्दनयोर्मध्ये शीतला साधुसंगतिः।।"
भावार्थ - संसार में चंदन ठंडक देने वाला है, चंदन से भी अधिक शीतल चंद्रमा है, लेकिन इन दोनों से भी अधिक ठंडक देने वाली है सज्जनों की संगति (अच्छे मित्रों का साथ)।
4."आपत्काले तु संप्राप्ते यन्मित्रं मित्रमेव तत्। वृद्धिकाले तु संप्राप्ते दुर्जनोऽपि सुहृदेव भवेत्।।"
भावार्थ - जो मित्र संकट के समय काम आता है, वही सच्चा मित्र होता है। सुख-समृद्धि के समय तो दुर्जन (बुरा व्यक्ति) भी मित्र बन जाता है।
5."विवादो धनसम्बन्धो यश्च स्वप्नापि, मित्रतां भिनत्ति तत्क्षणात्।" (शुद्ध रूप)
भावार्थ -विवाद, धन के लेन-देन और बार-बार उपकार की अपेक्षा करना, ये सभी बातें मित्रता को पल भर में तोड़ सकती हैं।
6. आतुरे व्यसने प्राप्ते दुर्भिक्षे शत्रु संकटे।
राजद्वारे श्वशाने च यस्तिष्ठति स वान्धवः।।
भावार्थ - जब कोई बीमार होने पर, संकट में, असमय शत्रु से घिर जाने पर, राजकार्य में सहायक रूप में तथा मृत्यु पर श्मशान भूमि में ले जाने वाला व्यक्ति सच्चा मित्र और बन्धु है।
7. विद्या मित्रं प्रवासेषु भार्या मित्रं गॄहेषु च।
व्याधितस्यौषधं मित्रं धर्मो मित्रं मॄतस्य च।।
भावार्थ : प्रवास में विद्या मित्र होती है (अर्थात घर से दूर रहने पर विद्या मित्र समान होती है ), घर में पत्नी मित्र होती है, रोग में औषधि मित्र होती है और मृतक का मित्र धर्म होता है(अर्थात मृत्यु के समय धर्म मित्र समान है)।
8. परोक्षे कार्यहंतारं प्रत्यक्षम् प्रियवादिनं।
वर्जयेतादृशं मित्रं विष कुम्भम् पयो मुखम्।
भावार्थ - ऐसे मित्र को त्याग देना चाहिए जो पीठ पीछे काम बर्बाद करते हैं और सामने मीठा बोलते हैं क्योंकि ऐसे मित्र विष भरे घड़े के ऊपर रखे दूध के समान है।
9. तन्मित्रं यत्र विश्वासः
भावार्थ - मित्र वही है जिस पर विश्वास कर सके।
10. अमित्रं कुरुते मित्रं मित्रं द्वेष्टि हिनस्ति च।
कर्म चारभते दुष्टं तमाहुर्मूढचेतसम्।।
भावार्थ - जो व्यक्ति शत्रु से दोस्ती करता तथा मित्र और शुभचिंतकों को दुःख देता है, उनसे ईर्ष्या-द्वेष करता है। सदैव बुरे कार्यों में लिप्त रहता है, वह मूर्ख कहलाता है।
11. सखा सप्तपदी जाता, सखेति प्रतिवेदयन्।
तस्मात् सख्यं विवर्धेत, पन्था: सन्तु विशां पथ:॥"
भावार्थ - ऋग्वेद में वर्णित इस श्लोक के अनुसार सात कदम साथ चलने वाला सखा बन जाता है। इसलिए इस मित्रता को हमेशा बढ़ाते रहना चाहिए।
संतप्तायसि संस्थितस्य पयसो नामापि न ज्ञायते
मुक्ताकारतया तदेव नलिनीपत्रस्थितं राजते।"
(हितोपदेश)
अर्थ: जैसे गर्म लोहे पर रखा जल तुरंत भाप बन जाता है, पर वही जल कमल पत्र पर मोती जैसा दिखता है। वैसे ही सच्चा मित्र कठिन समय में भी आपका साथ देता है, और आपको निखारता है।



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