Latest Updates
-
Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026: 6 या 7 मार्च, कब है भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी? जानें शुभ मुहूर्त, महत्व औ -
वरमाला डालते ही अर्जुन ने सानिया चंडोक को लगाया गले, सचिन तेंदुलकर का ऐसा था रिएक्शन, वीडियो वायरल -
बिग बॉस 17 फेम यूट्यूबर अनुराग डोभाल ने की सुसाइड की कोशिश, इंटरकास्ट शादी को लेकर परिवार पर लगाए गंभीर आरोप -
प्रेग्नेंसी में कटहल खाना चाहिए या नहीं? डाइट में शामिल करने से पहले जान लें इसके फायदे-नुकसान -
होली पर पकवान खाकर पेट में जमा हो गई है गंदगी, तो बॉडी डिटॉक्स के लिए इन चीजों का करें सेवन -
Holi Bhai Dooj Katha: होली के बाद भाई दूज क्यों मनाते हैं? जानें भ्रातृ द्वितीया की पौराणिक कथा -
Holi Bhai Dooj 2026 Wishes: माथे की टीका...इन खूबसूरत संदेशों के जरिए अपनों को दें होली भाई दूज की शुभकामनाएं -
होली की रात शारीरिक संबंध बनाना शुभ है या अशुभ? जानें क्या कहते हैं शास्त्र और पौराणिक मान्यताएं -
Holi 2026: होली में ज्यादा पी ली है भांग, तो नशा उतारने के लिए आजमाएं ये घरेलू उपाय -
क्यों जलाई जाती है होलिका और क्यों खेलते हैं रंग? जानें होली से जुड़ी 5 अद्भुत और प्राचीन पौराणिक कहानियां
सदी के अंत तक समुद्र निगल जाएगा भारत के इन 8 शहरों को, इस लिस्ट में कहीं आपका शहर तो नहीं?
Indian Cities That May Disappear Underwater : जलवायु परिवर्तन अब केवल चर्चा का विषय नहीं रहा, बल्कि यह धरती के अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है। इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC) और नासा (NASA) की हालिया रिपोर्ट्स में चेतावनी दी गई है कि अगर समुद्र के बढ़ते जलस्तर और ग्लोबल वार्मिंग को लेकर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो 2100 तक दुनिया के कई बड़े शहर पानी में समा सकते हैं। इनमें भारत के भी कई महत्वपूर्ण शहर शामिल हैं।
समुद्र के किनारे बसे ये शहर आज अपनी खूबसूरती, संस्कृति, रोजगार और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए पहचाने जाते हैं, लेकिन आने वाले समय में ये डूबने की कगार पर खड़े हो सकते हैं। आइए जानते हैं उन भारतीय शहरों के बारे में, जिन्हें सदी के अंत तक सबसे बड़ा खतरा है।

1. चेन्नई (Chennai)
तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई कला और संस्कृति का प्रमुख केंद्र माना जाता है। लेकिन नासा की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2100 तक चेन्नई का बड़ा हिस्सा करीब 1.87 फीट पानी में डूब सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो शहर की भौगोलिक और सामाजिक संरचना में भारी बदलाव देखने को मिलेंगे।
2. मुंबई (Mumbai)
देश की आर्थिक राजधानी और बॉलीवुड की दुनिया कहे जाने वाले मुंबई का भविष्य सबसे ज्यादा चिंता का विषय है। नासा की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सदी के अंत तक मुंबई का आधे से ज्यादा हिस्सा पानी में डूब सकता है। अरब सागर के किनारे बसा यह शहर समुद्र के जलस्तर में वृद्धि की वजह से सबसे ज्यादा खतरे में है।
3. विशाखापट्टनम (Visakhapatnam)
आंध्र प्रदेश का खूबसूरत तटीय शहर विशाखापट्टनम, जिसे लोग प्यार से "विज़ाग" भी कहते हैं, भी डूबने की कगार पर है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यहां का बड़ा हिस्सा 1.77 फीट तक पानी में समा सकता है। बंदरगाह और पर्यटन स्थल के रूप में मशहूर इस शहर की पहचान खतरे में पड़ सकती है।
4. भावनगर (Bhavnagar)
गुजरात का ऐतिहासिक शहर भावनगर, जिसे 1724 में राजधानी के रूप में स्थापित किया गया था, भी गंभीर खतरे में है। अनुमान है कि 2100 तक यहां करीब 2.70 फीट तक पानी भर सकता है। इसका मतलब है कि इस शहर की ऐतिहासिक धरोहर और सांस्कृतिक विरासत को भी नुकसान हो सकता है।
5. कोच्चि (Cochin)
केरल का प्रमुख शहर कोच्चि, जिसे "क्वीन ऑफ द अरेबियन सी" कहा जाता है, भी खतरे की जद में है। नासा की रिपोर्ट के अनुसार, 2100 तक यहां 2.32 फीट तक पानी का स्तर बढ़ सकता है। हिमालय की पिघलती बर्फ और समुद्र का बढ़ता जलस्तर इसकी सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है।
6. मंगलुरु (Mangaluru)
कर्नाटक का सुंदर तटीय शहर मंगलुरु अपनी धीमी रफ्तार वाली जिंदगी और खास संस्कृति के लिए जाना जाता है। लेकिन आने वाले समय में यह भी डूब सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2100 तक मंगलुरु का बड़ा हिस्सा 1.87 फीट पानी में डूब सकता है।
7. पारादीप, ओडिशा
ओडिशा का पारादीप राज्य का एकमात्र प्रमुख बंदरगाह है, जो कोलकाता से 210 नॉटिकल मील और विशाखापट्टनम से 260 नॉटिकल मील की दूरी पर स्थित है। यह बंदरगाह व्यापार और नौवहन के लिहाज से बेहद अहम है। लेकिन जलवायु परिवर्तन की वजह से 2100 तक इसके करीब 1.93 फीट पानी में डूबने की आशंका जताई गई है। अगर ऐसा हुआ तो यहां रहने वाले लोगों की आजीविका और जीवन दोनों पर गहरा असर पड़ेगा।
8. तूतीकोरिन (Tuticorin)
दक्षिण भारत का बंदरगाह शहर तूतीकोरिन भी खतरे की सूची में शामिल है। यह शहर 2100 तक लगभग 1.9 फीट पानी में डूब सकता है। यह बंदरगाह न केवल व्यापार का केंद्र है, बल्कि यहां की सांस्कृतिक पहचान भी दांव पर लग सकती है।
समाधान की ओर कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते सस्टेनेबल डेवलपमेंट, कार्बन उत्सर्जन में कटौती, और नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग नहीं बढ़ाया गया, तो समुद्र के किनारे बसे ये शहर हमेशा के लिए नक्शे से मिट सकते हैं। ऐसे में जरूरी है कि सरकारें और नागरिक मिलकर जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में ठोस प्रयास करें।



Click it and Unblock the Notifications











