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ITC की पहल से सशक्त हो रही हैं झारखंड की गृहणियां, बना रहीं हैं अपने सपनों की दुनिया
झारखंड जैसे राज्य में जहां आधुनिक सुविधाओं का अभाव है। यहां रहने वाले लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में कई तरह के संघर्षों से जूझना पड़ता है। इन्हीं संघर्ष में से एक है भीड़ से हटकर खुद की एक नई पहचान बनाने की चुनौती। इस प्रदेश की आधी आबादी खासकर महिलाओं के सपने रसोई से शुरू होकर यहीं दम तोड़ देते हैं। लेकिन बदलते समय और डिजिटल युग में ये महिलाएं अब सिर्फ़ घर के भीतर अपनी भूमिकाओं के लिए पहचाने जाने से संतुष्ट नहीं हैं।
वे भी पारंपरिक भूमिकाओं से हटकर खुद के लिए व्यक्तिगत पहचान बनाने की कोशिश कर रही हैं। ऐसे ही महत्वकांक्षी और कुछ अलग करने की चाह रखने वाली महिलाओं के लिए आईटीसी सनराइस मसालों की एक पहल इस क्षेत्र की गृहणियों के लिए आशा की किरण लेकर आई हैं।
आईटीसी सनराइज मसाला की "खाओ, खिलाओ और हिट हो जाओ" प्रतियोगिता इन महिलाओं के लिए अपने कुकिंग टैलेंट सामना लाने का एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है, जहां वे पारंपरिक व्यंजनों में नए-नए बदलाव लाकर इनके स्वाद को बढा रही है, इनकी बताई रेसिपीज सिर्फ विदेशों में भी हिट हो रही है। आईटीसी की यह पहल न केवल गृहणियों को आगे बढने के लिए प्रोत्साहित करता है बल्कि उनके टैलेंट को पहचानने का माध्यम भी बन रहा है। बल्कि उन्हें चूल्हा-चौंका से बाहर निकालकर समाज में एक नई पहचान दे रहा है।

झारखंड की संस्कृति और स्वाद का अनूठा मिश्रण
इस मुहिम के जरिए झारखंड के कई पारंपरिक व्यंजनों को देश के बाकी हिस्सों में पहचान मिली है, इन ट्रेडिशनल रेसिपीज के बारे में के बाकी हिस्सों के लोग अनजान थे। पारंपरिक व्यंजनों को बनाने के लिए पारंपरिक सामग्री या मसाला एक जरुरी फैक्टर होता है। जिसके बिना पारंपरिक व्यंजनों में वो खास जायका नहीं मिल पाता है।
बात अगर पारंपारिक मसालों की करें तो लोगों के पास अब इतना समय नहीं हैं कि वो वो घंटों बैठकर इन मसालों को तैयार कर सकें। दूसरी तरफ मिलावट के इस दौर में पैकेटबंद मसालों पर भरोसा करना भी मुश्किल काम हो गया है। मगर इन सभी समस्याओं के बीच आईटीसी सनराइज मसालों की अलग-अलग रेंज एकमात्र वैकल्पिक समाधान है। यह मसाला न सिर्फ स्वाद और उच्च गुणवत्ता का वादा करता है बल्कि इससे बनने वाला भोजन भी पूरी तरह से शुद्धता से भरपूर होता है। जिसमें किसी तरह का केमिकल या प्रिजर्वेटिव का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। यहीं शुद्ध, लाजवाब और स्वादिष्ट भोजन झारखंड की गृहणियों के सपनों के सफर को पूरा करने में उनका साथ दे रहा है।
ताकि गुम न हो जाएं ये विरासत
आईटीसी सनराइज का "खाओ, खिलाओ और हिट हो जाओ" प्रतियोगिता के पीछे का मकसद झारखंड की संस्कृति का हिस्सा कही जाने वाले इन पारंपरिक व्यंजनों को नए कलेवर में सहजकर रखने के साथ ही इन रेसिपीज में पारंगत यहां की महिलाएं परिवार और समाज में भी एक पहचान दिलाना भी है। ताकि संस्कृति का यह अमूल्य हिस्सा कहीं आधुनिकता के दौर में गुम न हो जाएं और इन्हें आगे आने वाली पीढ़ी को विरासत के रुप में सौंपा जा सकें।
इन्हें मिली नई पहचान
झारखंड के पारंपरिक व्यंजनों को अपने अनूठे अंदाज़ में शामिल करके और अपने व्यंजनों में सनराइज़ मसाला को शामिल करके, अदिति ने डिजिटल दुनिया में अपने लिए एक अलग जगह बना ली है।
इसी तरह, रांची की अनीता गुप्ता और छवि गुप्ता (जिन्हें इंस्टाग्राम पर योर रेगुलर मॉम के नाम से जाना जाता है) ने अपनी घरेलू भूमिकाओं को पार करते हुए डिजिटल स्टार बन गई हैं, यहां तक कि फोर्ब्स मैग्जीन से भी पहचान हासिल की है।
इस पहल ने दी सपनों को नया आकार
'खाओ खिलाओ और हिट हो जाओ' कैंपेन सिर्फ एक कुकिंग कॉम्पिटिशन नहीं है बल्कि एक ऐसी मुहिम बन चुकी है। इसमें भाग लेने वाली महिलाएं अपनी घरेलू ज़िम्मेदारियों को निभाने के साथ ही अपने सपनों को हकीकत में बदल रही है और अपनी एक अलग पहचान बना रही हैं। इस मंच के माध्यम से झारखंड की महिलाएं न केवल अपने कुकिंग टैलेंट सामने ला रही हैं बल्कि अपनी एक अलग पहचान के साथ आकांक्षाओं को भी नया आकार दे रही हैं। अब ये महिलाएं किचन की दहलीज को बिना लांघे ही सोशल मीडिया की दुनिया में अपने हुनूर का जलवा बिखेर रही हैं।



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