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स्पेस में पीरियड्स मैनेज करने के लिए क्या करती हैं एस्ट्रोनॉट्स? जानें फीमेल्स के लिए कितना बड़ा चैलेंज?
Female astronauts periods: 25 जून को भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला तीन अन्य एस्ट्रोनॉट सहित स्पेस के लिए रवाना हुए। पूरे 28 घंटे के सफर के बाद वो 26 जून को शाम 4:01 पर इंटरनेशनल स्पेस सेंटर में पहुंच गए थे।शुभांशु शुक्ला की टीम में एक फीमेल एस्ट्रोनॉट पेगी व्हिटसन भी शामिल हैं जो एक्सिओम मिशन 4 का हिस्सा बनी हैं। एक महिला के लिए अंतरिक्ष में कई सारे चैलेंज होते हैं उनमें से एक सबसे बड़ा चैलेंज होता है पीरियड्स को मैनेज करना।
लोगों के मन में ये सवाल जरूर आता है कि अंतरिक्ष में माहवारी (Menstruation in Space) के दौरान क्या होता है? क्या महिला एस्ट्रोनॉट्स इसे मैनेज कर पाती हैं? या फिर इसे रोकने के उपाय किए जाते हैं? आइए आज इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

अंतरिक्ष में पीरियड्स क्यों होता है ये मुद्दा?
हर महिला को पीरियड्स आते ही हैं जो धरती पर मैनेज करना सामान्य बात है लेकिन स्पेस में हालात बिल्कुल अलग होते हैं क्योंकि वहां पर माइक्रोग्रैविटी की वजह से शरीर के तरल पदार्थों का व्यवहार बदल जाता है। सैनिटरी प्रोडक्ट्स और डिस्पोजल की व्यवस्था चुनौतीपूर्ण होती है। हर चीज सतह पर तैरती है। सीमित पानी और संसाधनों के कारण सफाई बनाए रखना मुश्किल होता है। ऐसे में लंबे मिशन में पीरियड्स तनाव बढ़ा सकते हैं।

महिला एस्ट्रोनॉट के पास होते हैं दो विकल्प
एक रिपोर्ट के अनुसार, महिला एस्ट्रोनॉट के पास अंतरिक्ष में पीरियड्स मैनेज करने के दो विकल्प होते हैं। पहला ऑप्शन टैम्पून और सैनिटरी पैड्स होते हैं। जो महिला एस्ट्रोनॉट चाहती हैं कि उन्हें अंतरिक्ष में भी पीरियड्स आए तो वो इनका इस्तेमाल कर सकती हैं।
हालांकि इस दौरान उन्हें टैम्पोन और पैड्स को बदलने के लिए रिमाइंडर सेट करना पड़ता है। इसके अलावा वो धरती पर वापस आते हैं तो कचरा वापस पृथ्वी पर लाना पड़ता है क्योंकि स्पेस में डिस्पोजल एक समस्या होती है।
क्या है दूसरा ऑप्शन?
अब बात दूसरे ऑप्शन की कर लेते हैं जिसमें महिलाओं को हार्मोनल कॉन्ट्रासेप्टिव यानी गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल करना होता है। इन गोलियों में एस्ट्रोजन होता है, जो पीरियड्स को रोकने में मददगार होता है। फीमेल एस्ट्रोनॉट्स को अंतरिक्ष में रहने के दौरान रौज इन गोलियों का इस्तेमाल करना होता है, अच्छी बात ये है कि इन गोलियों से शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता। यह तरीका न केवल समय बचाता है, बल्कि रिसोर्स भी कम खर्च करता है।



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