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Independence Day: जिन्ना ने नहीं इस शख्स ने दिया था 'पाकिस्तान' को नाम, पर नहीं बना इस मुल्क का हिस्सा
How did Pakistan get its name : 15 अगस्त 1947 का दिन हर हिंदुस्तानी के लिए गौरव का दिन होता है, हालांकि आजादी मिलने की खुशी तो हर किसी को होती हैं लेकिन भारत के एक बड़े तबके के लिए यह तारीख विभाजन की त्रासदी की भी याद दिलाती है।
इस दिन देश तो आजाद हो गया लेकिन अंग्रेज एक देश को 2 हिस्सों में बंट गए। आजादी के बाद हजारों ऐसे परिवार रहे, जिनके लिए इस बंटवारे ने कई बुरी यादें पीछे छोड़ दी। 15 अगस्त से ठीक एक दिन पहले पाकिस्तान बना। वैसे कभी आपने सोचा हैं कि हिंदुस्तान नाम तो पहले से था, लेकिन देश के बंटवारे के सााथ पड़ौसी मुल्क का नाम नाम 'पाकिस्तान' कैसे पड़ा? कहां से यह शब्द ईजाद हुआ? चलिए झांकते हैं इतिहास के पन्नों में?

मोहम्मद अली जिन्ना के विचार से बना नया देश
पाकिस्तान के नामकरण की कहानी 1920 से शुरू होती है, जब मुस्लिम लीग के नेता मोहम्मद अली जिन्ना ने इंडियन नेशनल कांग्रेस (INC) से इस्तीफा देकर अलग हुए और यहीं से एक अलग देश बनाने का विचार आया, जो जल्द ही एक मांग में बदल गई। 1930 के दशक में जब गोलमेज सम्मेलन की शुरुआत हुई तो तीसरे कॉन्फ्रेंस में एक अलग मुस्लिम राष्ट्र बनाने की मांग शुरू हो गई हालांकि तब तक इसका नाम नहीं सोचा गया होगा।
इस शख्स ने दिया था पाकिस्तान नाम
पाकिस्तान को नाम देने वाले शख्स का नाम था चौधरी रहमत अली। 1933 में इंग्लैंड के कैंब्रिज विश्वविद्यालय में वकालत की पढ़ाई कर रहे एक मुस्लिम राष्ट्रवादी छात्र चौधरी रहमत अली ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर अलग देश की मांग शुरू की। चौधरी रहमत अली ने ही तत्कालीन भारत के उत्तरी हिस्से के चार मुस्लिम बहुल प्रांतों को मिलाकर पाकिस्तान नाम का नया देश बनाने का विचार पेश किया। बाद में मुहम्मद अली जिन्ना ने अपने राजनीतिक दल मुस्लिम लीग के जरिए इन विचारों को हवा दी और पाकिस्तान बना।
अपनी बुकलेट में पहली बार किया था इस नाम का जिक्र
तीसरे गोलमेज सम्मेलन में ब्रिटिश और भारतीय नेताओं के बीच रहमत अली ने इस नाम का विचार सामने रखा।
उन्होंने 'Now Or Never' टाइटल से एक बुकलेट तैयार करवाया था, जिसमें पाकिस्तान नाम का पहली बार जिक्र किया गया था। 28 जनवरी 1933 को पहली बार पाकस्तान शब्द दुनिया के सामने आया था। उन्होंने इस नए देश में शामिल किए जाने वाले राज्यों के तर्ज पर इसका नाम रखा था। इसमें P से पंजाब, A से अफगानिस्तान, K से कश्मीर, S से सिंध और Tan यानी बलूचिस्तान वगैरह राज्यों को मिलाकर एक नया देश बनाने की मांग की थी। उन्होंने 'पाकिस्तान' शब्द को दो भागों में विभाजित किया: 'पाक' जिसका मतलब पर्शियन और उर्दू में मतलब 'शुद्ध' होता है, और 'स्थान; जिसका मतलब 'भूमि' होता है। पाकिस्तान मतलब पवित्र भूमि।
पाकस्तान से बना पाकिस्तान
इन सभी राजनीतिक गतिविधियों के बीच मुस्लिम लीग के नेता मोहम्मद अली जिन्ना और अल्लामा इकबाल ने नए मुस्लिम राष्ट्र का नाम तय कर लिया। लाहौर अधिवेशन में वे पहले ही टू नेशन थ्यौरी और अलग मुस्लिम संविधान की मांग कर चुके थे। हालांकि उस समय उनके पास नाम नहीं था तो उन्होंने रहमत के बुकलेट से पाकस्तान नाम लिया और इसे मोडिफाई करते हुए पाकिस्तान (Pakistan) कर दिया। इसमें Pak यानी शुद्ध और Stan का मतलब जमीन था। तो इस तरह भारत के विभाजित हिस्से को पाकिस्तान का यह नाम मिला।
पाकिस्तान बनते हुए कहा थे रहमत अली?
हालांकि रहमत अली के विचारों ने पाकिस्तान की वैचारिक नींव रखने में योगदान दिया, लेकिन वो इस राष्ट्र के निर्माण में वह किसी तरह शामिल नहीं हो पाए थे। इतिहास के मुताबिक रहमत अली पाकिस्तान बन जाने के बाद भी खुश नहीं थे। वो पंजाब के बंटवारे से बहुत दुखी थे। वो पंजाब को पाकिस्तान में देखना चाहते थे।
हिंदुस्तान-पाकिस्तान के विभाजन और पाकिस्तान के निर्माण के दौरान पाकिस्तान बनते वक्त वो इंग्लैंड में गुमनाम सी जिंदगी जी रहे थे। रहमत अली का निधन 3 फरवरी 1951 को कैम्ब्रिज, इंग्लैंड में हुआ। मृत्यु के बाद रहमत अली को कैम्ब्रिज स्थित न्यू मार्केट के कब्रिस्तान में दफन किया गया।



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