International Literacy Day 2026: क्यों मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस? जानें इतिहास, महत्व और थीम

International Literacy Day 2026: हर साल 8 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को शिक्षा और साक्षरता की जरूरत के बारे में जागरूक करना है। पढ़ना-लिखना सीखना सिर्फ नौकरी या परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को अपने अधिकार समझने, सही फैसले लेने और समाज में बेहतर तरीके से आगे बढ़ने में भी मदद करता है। अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस दुनिया के अलग-अलग देशों में शिक्षा और साक्षरता के महत्व को लेकर जागरूकता फैलाने का मौका देता है। भारत में भी इस दिन साक्षरता और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई तरह के कार्यक्रम और अभियान आयोजित किए जाते हैं। 2026 में अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस की 60वीं वर्षगांठ भी है। आइए जानते हैं, कि 8 सितंबर को ही अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस क्यों मनाया जाता है, इसकी शुरुआत कैसे हुई और इसका क्या महत्व है -

International Literacy Day

साक्षरता क्या होती है?

साक्षरता का सामान्य अर्थ पढ़ने और लिखने की क्षमता से है। यानी जो व्यक्ति लिखे हुए अक्षरों और शब्दों को समझ सके और पढ़-लिख सके, उसे साक्षर कहा जाता है। हालांकि आज के समय में साक्षरता का मतलब केवल अक्षर पहचानना नहीं रह गया है। जरूरी जानकारी को समझना, उसका सही इस्तेमाल करना और अपने फैसले खुद लेना भी इसके दायरे में आता है। साक्षरता बच्चों तक ही सीमित नहीं है। युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों समेत हर उम्र के लोगों को शिक्षा से जोड़ना जरूरी है। इसी वजह से अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के जरिए समाज के उन वर्गों तक शिक्षा पहुंचाने पर जोर दिया जाता है, जो किसी कारण से पढ़ाई से दूर रह गए हैं।

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस का इतिहास

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस की पृष्ठभूमि 1965 में ईरान की राजधानी तेहरान में हुए शिक्षा मंत्रियों के विश्व सम्मेलन से जुड़ी है। इस सम्मेलन में निरक्षरता को कम करने और दुनिया के ज्यादा से ज्यादा लोगों को शिक्षा से जोड़ने पर चर्चा हुई थी। इसके बाद यूनेस्को ने 1966 में अपने 14वें आम सम्मेलन में 8 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के रूप में घोषित किया। इसके अगले साल यानी 8 सितंबर 1967 को पहली बार यह दिवस मनाया गया। तब से हर साल 8 सितंबर को यह दिन मनाया जा रहा है। इस दिन की शुरुआत का मुख्य उद्देश्य लोगों को शिक्षा के महत्व से जोड़ना और दुनिया से निरक्षरता कम करने के प्रयासों को आगे बढ़ाना था।

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस क्यों मनाया जाता है?

साक्षरता को केवल पढ़ने-लिखने की क्षमता के तौर पर नहीं देखा जाता। यह व्यक्ति को समाज में बराबरी के अवसर पाने में मदद करती है। पढ़ा-लिखा व्यक्ति सरकारी योजनाओं, जरूरी दस्तावेजों, अपने अधिकारों और आसपास की घटनाओं को बेहतर तरीके से समझ सकता है। साक्षरता का संबंध रोजगार और आर्थिक स्थिति से भी है। पढ़ाई और जरूरी कौशल होने पर लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं और वे अपनी कमाई बेहतर करने की कोशिश कर सकते हैं। इसी वजह से साक्षरता को गरीबी कम करने के प्रयासों से भी जोड़ा जाता है। महिलाओं के लिए शिक्षा और साक्षरता का महत्व और भी ज्यादा है। इससे उन्हें अपने अधिकारों को समझने, परिवार और बच्चों से जुड़े फैसले लेने तथा आर्थिक रूप से आगे बढ़ने में मदद मिलती है। इस तरह साक्षरता महिला सशक्तिकरण में भी अहम भूमिका निभाती है।

आज के समय में डिजिटल साक्षरता भी जरूरी

आज शिक्षा का दायरा किताबों और कागज तक नहीं रहा। मोबाइल, इंटरनेट और ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के कारण डिजिटल जानकारी भी जरूरी हो गई है। ऑनलाइन फॉर्म भरना, डिजिटल भुगतान करना, सरकारी सेवाओं का इस्तेमाल करना, इंटरनेट पर सही जानकारी ढूंढना और गलत जानकारी से बचना डिजिटल साक्षरता का हिस्सा है। इसलिए आज के दौर में केवल पढ़ना-लिखना आना ही पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि डिजिटल दुनिया को समझना भी जरूरी है।

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2026 की थीम

यूनेस्को ने अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2026 की थीम "Literacy for people, the planet and prosperity" रखी है। इसका आसान अर्थ है "लोगों, धरती और समृद्धि के लिए साक्षरता।" यह थीम इस बात पर जोर देती है कि साक्षरता से लोगों को बेहतर अवसर मिल सकते हैं, समाज में भागीदारी बढ़ सकती है और टिकाऊ भविष्य के लिए जरूरी समझ विकसित हो सकती है। 2026 में यूनेस्को का वैश्विक आयोजन 8 और 9 सितंबर को मेक्सिको के चियापास में होगा।

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस का महत्व

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस हर व्यक्ति तक शिक्षा पहुंचाने की जरूरत को सामने लाता है। साक्षरता से व्यक्ति को अपने अधिकार समझने, रोजगार के अवसर तलाशने और समाज में अपनी बात रखने में मदद मिलती है। यह दिन यह भी याद दिलाता है कि शिक्षा सिर्फ स्कूल जाने तक सीमित नहीं है। बदलती दुनिया में लोगों को जीवनभर नई चीजें सीखने, डिजिटल साधनों को समझने और जरूरी जानकारी का सही इस्तेमाल करने की जरूरत है। इसलिए 8 सितंबर का दिन केवल एक जागरूकता दिवस नहीं, बल्कि यह सोचने का मौका भी है कि शिक्षा से दूर रह गए लोगों को पढ़ाई और जरूरी कौशल से कैसे जोड़ा जाए। यही प्रयास समाज को ज्यादा बराबरी वाला और आगे बढ़ने वाला बनाने में मदद कर सकता है।

Story first published: Tuesday, September 8, 2026, 10:00 [IST]
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