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Bollywood Actors Who Are Cry Babies On Screen: लोग कहते हैं मर्द को दर्द नहीं होता है और वो रोते नहीं हैं। ये भी कहते हैं कि जो मर्द रोते हैं वो कमजोर होते हैं। लेकिन क्या ये बात सच है? जी नहीं, ऐसा नहीं है। मर्द को दर्द भी होता है और वो रोते भी हैं।
समाज में एक ऐसी धारणा बन गयी है कि भावुक होकर रोने को मर्दानगी से जोड़ दिया गया और ऐसा कहा जाने लगा कि रोने वाला मर्द कमजोर होता है। लेकिन आपको जानकर अच्छा लगेगा कि अब ये धारणा टूटने लगी है। रोने वाले मर्द के बारे में अब ये धारणा बनने लगी है कि वो सॉफ्ट दिल का है और रोना प्राकृतिक है।

इस अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस पर आइये जानते हैं कि असली मर्द को कैसे परिभाषित किया जाए। असली मर्द को दर्द भी होता है वो भावुक भी होते हैं और स्थिति के हिसाब से रोते भी है। पर्दे पर खतरनाक फाईट और माचो मैन का किरदार निभाने वाले कुछ ऐसे पुरुष नायकों के बारे में जानते हैं जो स्थिति के हिसाब से रोते भी हैं और अपने भावुक कर देने वाले अभिनय से मशहूर भी हुए हैं।
शाहरुख खान: 'कभी खुशी कभी गम', 'माई नेम इज खान' से लेकर 'देवदास' और 'पठान' तक - जब स्क्रीन पर भावनाओं को व्यक्त करने की बात आती है, तो 'बॉलीवुड के बादशाह' जैसा कोई नहीं है। शाहरुख खान को गहन और भावनात्मक चरित्रों को चित्रित करने में उनकी बहुमुखी प्रतिभा के लिए जाना जाता है और उनका व्यक्तित्व और ईमानदारी के साथ कैरेक्टर्स में पूरी तरह से डूबने की क्षमता हर किसी के लिए प्रेरणादायक है।
अमिताभ बच्चन: अपनी मध्यम और गहरी आवाज से लोगों को भावुक कर देने वाले अभिनय के लिए अमिताभ मशहूर हैं। इन्होंने जितने भी रोल्स निभाएं हैं उन सबसे दर्शकों को भावुक कर दिया है। अपने अभिनय कौशल से रियल और रील के बीच की दूरी को कम कर देते हैं। 'दीवार' और 'शोले' जैसी फिल्मों के अलावा बागबां फिल्म में इनका अभिनय दर्शकों की आंखों में आंसू ला देता है।
आमिर खान: मिस्टर परफेक्ट आमिर खान भूमिकाओं के प्रति अपने सूक्ष्म दृष्टिकोण और दर्शकों के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं। वह किसी जीनियस से कम नहीं हैं और उनकी 'तारे ज़मीन पर', 'थ्री इडियट्स' और 'दंगल' जैसी फिल्में दिल को छूने वाले किरदारों में इनकी अभिनय क्षमता दिखती है। दर्शक भावुक हुए बिना नहीं रह सकते हैं।
रणबीर कपूर: अपनी स्वाभाविक अभिनय शैली के लिए लोकप्रिय, रणबीर कपूर ने "रॉकस्टार," "बर्फी" जैसी फिल्मों में भावनात्मक रूप से भरे किरदार निभाए हैं, जो उनकी संवेदनशीलता और इंटेंस भावनाओं को व्यक्त करने की क्षमता का प्रदर्शन करते हैं।
विक्रांत मैसी: यह शानदार अभिनेता हमेशा अपने हर प्रदर्शन से छाप छोड़ता है, चाहे फिल्म में उसकी भूमिका की लंबाई या दायरा कुछ भी हो। वह खुद को एक मंझे हुए कलाकार के रूप में पेश करते हैं। उनकी 'ए डेथ इन द गुंज', 'छपाक' और '12वीं फेल' जैसी फिल्मों ने दर्शकों को आश्चर्यचकित कर दिया है।
पंकज त्रिपाठी: सरल और नेचुरल एक्टिंग के मामले में प्रतिभा का यह पावरहाउस दर्शकों को आश्चर्यचकित करना कभी नहीं छोड़ता। चाहे वह अपने अनूठे अंदाज में किरदार को गहराई से पेश करना हो, या स्क्रीन पर अपने दिल की बात व्यक्त करना हो, दर्शकों से एक अपनापन स्थापित कर लेते हैं। 'क्रिमिनल जस्टिस', 'शेरदिल' से लेकर 'ओएमजी2' तक; इनकी एक्टिंग ने दर्शकों को भावुक कर दिया।
तो आपने देखा की एक पुरुष जब भावुक होकर कुछ कहता है तो उसका असर ज्यादा होता है, कमजोर नहीं होता। अब आप वास्तविक पुरुषों की अपनी परिभाषा को बदल पाएंगे, और यदि अभी भी आपके दिमाग में जरा सा भी संदेह हो तो यह जान लें कि कई अध्ययनों से पता चला है कि भावनाओं और संवेदनाओं को दिल में दफ़न करने से स्वास्थ्य पर बुरा असर होता है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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