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भगवान जगन्नाथ पुरी मंदिर के ऊपर से पक्षी, विमान क्यों नहीं उड़ते है, यह है वजह
जगन्नाथ पुरी चार धामों में से एक है। हर साल यहां निकलने वाली रथ यात्रा में देश-विदेश के लोग हिस्सा लेने पहुंचते हैं। इस साल 20 जून से रथ यात्रा शुरु होगी। इस मंदिर की महिमा और चमत्कार दुनियाभर में प्रसिद्ध है।
कुछ चमत्कार तो इतने रहस्य से भरे हैं कि लोग सुनने के बाद दांतों तले अंगुली चबा लेते हैं। इन्हीं चमत्कारों में से एक रहस्य को जानकर आपको हैरानी होगी कि भगवान जगन्नाथ पुरी मंदिर के ऊपर से कोई भी विमान या पक्षी उड़ान नहीं भरते हैं। इसके पीछे पौराणिक और वैज्ञानिक दोनों प्रकार की वजह हैं, आइए जानते हैं इस बारे में-

विज्ञान क्या कहता है?
वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं का मानना है कि चूंकि जगन्नाथ मंदिर ओडिशा में स्थित है। यह एक तटीय क्षेत्र है। यहां हवाएं बेहद तेज होती हैं जिससे पक्षियों के लिए ऊंचाई पर उड़ना मुश्किल हो जाता है। जगन्नाथ मंदिर की ऊंचाई लगभग 1000 फीट है। जगन्नाथ पुरी मंदिर के ऊपर से हवाई जहाज नहीं उड़ते हैं क्योंकि मुख्य रूप से पुरी किसी भी उड़ान मार्ग के अंतर्गत नहीं आते हैं और ऐसा नीलचक्र की उपस्थिति के कारण होता है। नीलचक्र एक आठ धातु चक्र है जिसे जगन्नाथ मंदिर पुरी के ऊपर रखा गया है। माना जाता है कि यह धातु सभी वायरलेस संचार को अवरुद्ध करती है, इस प्रकार इस क्षेत्र में हवाई जहाज उड़ाना खतरनाक है। इसलिए माना जाता है कि जगन्नाथ पुरी मंदिर के ऊपर से हवाई जहाज नहीं उड़ते।
पौराणिक मान्यता
अगर हम धार्मिक मान्यता के अनुसार मानें तो भगवान जगन्नाथ को पक्षियों के राजा 'गरुड़ देव' द्वारा ले जाया जाता है, जिनका हिंदू साहित्य में बहुत महत्व है। ऋग्वेद के अनुसार, गरुड़ देव दिव्य गरुड़ (चील के समान पक्षी) हैं जो भगवान विष्णु के वाहन माने जाते हैं और भगवान जगन्नाथ को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। इसलिए यह माना जाता है कि पक्षियों के राजा गरुड़ देव स्वयं मंदिर की रक्षा कर रहे हैं और इसलिए पक्षी मंदिर के ऊपर उड़ने से डरते हैं। यह उपासकों और पुजारियों की धार्मिक मान्यता है।
हवा के विपरीत दिशा में लहराता है झंडा
आमतौर पर कोई भी झंडा हवा के अनुकूल लहरता रहता है, लेकिन इस मंदिर के शीर्ष पर लगा झंडा हवा के विपरीत दिशा में लहरता रहता है। जिसे लेकर वैज्ञानिक भी हैरान है।



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