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बीवी के ‘घूंघट’ पर ट्रोल हुए खान सर, आखिर भारत में कैसे पहुंची पर्दा प्रथा
Khan Sir Wife's Ghunghat Video Goes Viral : देशभर में लोकप्रिय टीचर खान सर इन दिनों अपनी शादी को लेकर चर्चा में हैं। कुछ दिनों पहले ही उन्होंने गुपचुप तरीके से निकाह किया और 2 जून को पटना में एक ग्रैंड रिसेप्शन पार्टी दी, जिसमें कई बड़े राजनेता, मीडिया हस्तियां और सेलिब्रिटी शामिल हुए। इस खास मौके पर जहां उन्हें ढेरों बधाइयां मिलीं, वहीं उनकी पत्नी के 'घूंघट' में नजर आने पर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई।
रिसेप्शन पार्टी में खान सर की पत्नी पूरे समय घूंघट में रहीं। न तो उन्होंने अपना चेहरा दिखाया और न ही खान सर ने उनकी कोई तस्वीर सार्वजनिक की। इस पर कुछ यूजर्स ने खान सर को ट्रोल करना शुरू कर दिया। उनका तर्क था कि एक शिक्षक और आधुनिक सोच रखने वाले इंसान को घूंघट जैसे पुराने रिवाजों को बढ़ावा नहीं देना चाहिए। वहीं, कुछ ने इसे निजी और पारिवारिक परंपरा मानते हुए खान सर का समर्थन किया।

इस बहस ने एक बार फिर भारत में पर्दा प्रथा और घूंघट की प्रथा को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। आखिर यह परंपरा आई कहां से?
पर्दा प्रथा का इतिहास
'पर्दा' शब्द मूल रूप से फारसी भाषा से आया है, जिसका अर्थ होता है 'ढकना'। इस्लामी संस्कृति में महिलाओं के शरीर को ढंकने की परंपरा बुर्का और हिजाब के रूप में देखी जाती है। भारत में इस्लाम के आगमन के साथ ही पर्दा प्रथा का प्रभाव बढ़ा। हालांकि, भारत के प्राचीन ग्रंथों जैसे रामायण और महाभारत में महिलाओं द्वारा चेहरा ढकने का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है। पुराने मंदिरों की मूर्तियों में भी महिलाएं खुली साड़ी और खुले चेहरे में दिखाई देती हैं।
मुगलों की देन हैं घूंघट
घूंघट की शुरुआत भारत में इस्लाम के आगमन के बाद मानी जाती है। मुगल शासनकाल में यह प्रथा मजबूत हुई और 19वीं सदी में इसका विस्तार हुआ। वेद-पुराणों या किसी प्राचीन ग्रंथ में घूंघट का उल्लेख नहीं मिलता। खजुराहो और एलोरा जैसे ऐतिहासिक स्थलों की मूर्तियों में भी महिलाओं को बिना घूंघट दर्शाया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि यह परंपरा बाद में विकसित हुई।
गर्मी से सुरक्षा के लिए भी ढंकती हैं चेहरा
इसके अलावा, राजस्थान जैसे गर्म और रेत्तीले इलाकों में महिलाएं गर्मी और धूल से बचने के लिए भी सिर और चेहरा ढकने लगीं। जैसे अरब देशों में महिलाएं अबाया और बुर्का पहनती हैं, वैसे ही भारत के कुछ हिस्सों में घूंघट का चलन एक पारंपरिक परिधान के रूप में विकसित हुआ।
ईसाई धर्म में शादी के वक्त दुल्हन क्यों पहनती हैं घूंघट
ईसाई धर्म में भी 'वेल' पहनने की परंपरा रही है, जिसे दुल्हनें शादी के समय पहनती हैं। यह न केवल बुरी नजर से बचाने के लिए होता है बल्कि पवित्रता और शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। वहीं, नन्स भी सिर ढकती हैं।



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